5 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बच्चों को करना था पैरों पे खड़ा, पैर ही जवाब दे गए

- दोनों बेटों के कमर से नीचे के शरीर ने बंद किया काम, मजदूर पिता के बस में नहीं इलाज करवाना, जो संभव था किया, अब किस्मत पर छोड़ा

2 min read
Google source verification

image

bhawani singh

Feb 21, 2017

barmer

barmer

शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर जानसिंहपुरा जूनापतरासर निवासी दिहाड़ी मजदूर भंवरसिंह ने अपने बेटों को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाना चाहता था। उसका सपना था कि उसके बेटे उसीकी तरह मजदूरी नहीं कर अच्छी नौकरी करे और अपने पैरों पर खड़े हो। लेकिन उसे क्या मालूम कि इनके पांव ही जवाब दे जाएंगे।

भंवरसिंह के 11 वर्षीय पुत्र मोतीसिंह व 14 वर्षीय सवाईसिंह को स्कूल में दाखिल करवाया। दोनों के स्कूल जाने के साथ ही भंवरसिंह मजदूरी पर ध्यान देने लगा ताकि उसकी मेहनत से बेटों की जिंदगी संवर जाए। करीब चार साल पहले बड़े बेटे और फिर दूसरे बेटे के कमर के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया और दोनों ही लाचार हो गए। पिता ने अपनी स्थिति के अनुसार उपचार करवाया, लेकिन कुछ ही समय में उसकी आर्थिक स्थिति जवाब दे गई। तब से इन दोनों को घर में ही रखा हुआ है।

मजदूरी करके पाल रहा पेट

भंवरसिंह अब इन दोनों बेटों के लिए सुबह से शाम तक कमाता है। जो भी मजदूरी मिलती है उससे दोनों का पेट पाल रहा है और उनकी दवाई और अन्य खर्च उठा रहा है। इनके इलाज के लिए किसी बड़े अस्पताल ले जाकर कुछ दिन रुकना जरूरी है, लेकिन इतनी हैसियत नहीं है।

कोई सरकारी सहायता नहीं मिल रही

उन्हें अभी तक किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिल रही है। विकलांगता की श्रेणी में नहीं लिए जाने से विकलांग पेंशन भी नहीं मिल रही है।

मदद की दरकार

दोनों बेटों के कमर से नीचे के शरीर ने काम करना बंद कर दिया है। जितना पास में था इलाज पर लगवाया। अब उपचार और अन्य खर्च करना मुश्किल हो रहा है।-भंवरसिंह, पिता

सरकारी मदद मिलनी चाहिए

परिवार में दोनों लड़कों के आधे शरीर ने काम करना बंद कर दिया है। इनके लिए सरकारी मदद होनी चाहिए। एेसे बच्चों की जानकारी ग्रामीण स्तर पर जिन सरकारी कार्मिकों को मिलती है वे खुद ही इनकी मदद को आगे आने चाहिए।-कल्याणसिंह इंद्रोई, समाजिक कार्यकर्ता

ये भी पढ़ें

image

बड़ी खबरें

View All

ट्रेंडिंग