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मेधा पाटकर को जबरन अनशन स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया

चिखल्दा में 12 दिन से उपवास पर बैठीं मेधा पाटकर के अनशन तुड़वाने के लिए सेहत का आधार बताकर जबरन अनशन स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया। 

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Rajiv Jain

Aug 07, 2017

बड़वानी. धार जिले के चिखल्दा में 12 दिन से उपवास पर बैठीं मेधा पाटकर के अनशन तुड़वाने के लिए सेहत का आधार बताकर जबरन उन्हें अनशन स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया। इससे पहले करीब एक घंटे तक पाटकर के समर्थक- एनबीए कार्यकर्ताओं और पुलिस में संघर्ष चला। उनके अनशन स्थल के पंडाल को भी पुलिस ने तोड़ दिया। इस दौरान उनके समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। दिनभर समझौतों के प्रयासों के बीच शाम सात बजे पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई की। पाटकर २७ जुलाई से अनशन पर थीं, उनके साथ नर्मदा घाटी के ११ लोग भी अनशन कर रहे थे। सभी को सख्ती के साथ पुलिस ने उठा लिया और अस्पताल में भर्ती करने के लिए बिना उनके परिजन और समर्थकों को बताए लेकर रवाना हो गई। सोमवार को उनके समर्थकों को सुबह से ही आशंका थी पाटकर के गिरते स्वास्थ्य के चलते सरकार उन्हें किसी भी हाल में अस्पताल में भर्ती कराकर अनशन खुलवा सकती है। धार और बड़वानी जिलों का प्रशासनिक अमला और भारी पुलिस बल करीब ७५ किमी क्षेत्र में तैनात था। बड़वानी में ठिकरी से लेकर राजघाट तक कई चेकपोस्ट बनाकर पुलिस बल लगा दिया थाा। उधर धार जिले में निसरपुर, कड़माल, गणपुर तक पुलिस बल तैनात था। दोपहर में पुलिस ने राजघाट पुल पर निजी वाहनों को भी रोका। वहीं, कलेक्टर, एसपी भी राजघाट पर डटे रहे। एनडीआरएफ की फोर्स भी ८ बोट लगाकर राजघाट नर्मदा में गश्त करती रही।


इससे पहले सोमवार को दिनभर मेधा पाटकर को अनशन स्थल से ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराने के लिए प्रशासन प्रयास करता रहा। सुबह दो बार धार कलेक्टर श्रीमन शुक्ल और एसपी वीरेंद्रसिंह मेधा पाटकर के अनशन को तुड़वाने पहुंचा था, लेकिन अनशनकारियों का कहना था कि जब तक निर्णय लेने में सक्षम प्रतिनिधिमंडल आकर चर्चा नहीं करता, तब तक अनशन नहीं खुलेगा। तीसरी बाद धार कलेक्टर ने १५ मिनट ४५ सेकंड तक मेधा पाटकर से फोन पर बात क ी और बार-बार उनके स्वास्थ्य की चिंता जताते हुए अनशन खोलने की मांग करते रहे। मेधा पाटकर का कहना था जब तक सहनीय है और मुझमें धैर्यबल है, तब तक अनशन पर रहूंगीं। आप मेरे अकेले की चिंता क्यों कर रहे हैं, मेरे साथ ११ साथी भी अनशन पर हैं और पूरी घाटी के ४० हजार लोगों की जान का सवाल है। इसके बाद मेधा पाटकर ने फोन काट दिया।

ऐसे चला रात से दिनभर घटनाक्रम
सरदार सरोवर बांध के डूब प्रभावितों के पुनर्वास तक बांध के गेट खुलवाने, ट्रिब्यूनल के फैसले के अनुसार पुनर्वास करने की मांग को लेकर नबआं नेत्री मेधा पाटकर और ११ अनशनकारी १२ दिन से अमरण अनशन पर है। रविवार रात एक बार फिर मेधा पाटकर की तबीयत बिगड़ी। रात में ही डॉक्टर्स ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया। डॉक्टर ने प्रशासन और नबआं कार्यकर्ताओं को साफ कर दिया कि जल्द अनशन नहीं खुलवाया गया तो मेधा पाटकर का स्वास्थ्य ज्यादा खराब हो सकता है। इसके बाद से ही प्रशासन अनशन खुलवाने के लिए प्रयासरत हो गया। रात ३ बजे तक धार एसडीएम ऋषभ गुप्ता व टीम डटी रही,लेकिन कार्यकर्ताओं ने भर्ती कराने से मना कर दिया।

कलेक्टर वापस जाओ के लगे नारे
सोमवार सुबह कलेक्टर धार श्रीमन शुक्ल अनशन स्थल पहुंचे। उस समय यहां गिनती के कार्यकर्ता मौजूद थे। कलेक्टर ने नबआं के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल के देवराम कनेरा, भागीरथ धनगर, अमूल्य निधि, राहुल यादव, मुकेश भगोरिया व अन्य ने एक घंटे का समय मांगा। इसके बाद धार कलेक्टर सुबह ११ बजे फिर एसपी धार के साथ अमरण अनशन स्थल पहुंचे। यहां कलेक्टर को देखते ही कार्यकर्ता जमा हो गए और वापस जाओ के नारे लगाने लगे। एक बार फिर प्रतिनिधिमंडल से कलेक्टर ने चर्चा की और मेधा पाटकर के स्वास्थ्य की चिंता जताते हुए राज्य सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर चर्चा की बात की। कलेक्टर का कहना था कि अनशन खत्म कर दिया जाए, यहां एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल चर्चा करने के लिए तैयार है। इस दौरान मेधा पाटकर बात करने की स्थिति में नही थी, जिसके कारण नबआं कार्यकर्ताओं ने आपस में बैठक कर जवाब देने की बात कही। इसके बाद अधिकारी वापस लौट गए।

16 मिनट तक चली चर्चा, नहीं मना पाए कलेक्टर
इसके एक घंटे बाद कलेक्टर धार ने मेधा पाटकर को फोन लगाया। मेधा पाटकर की कलेक्टर से चर्चा करीब १६ मिनट तक चली, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। मेधा पाटकर ने धार कलेक्टर से फोन पर चर्चा करते हुए कहा कि आप कह रहे संवाद करें। लेकिन जो भी बात होनी है अनशन के साथ होगी। इसके पूर्व भी प्रतिनिधिमंडल ने यहां आकर बात की थी, उस समय भी हमने सारे मुद्दे रखे थे। जिसमें कमिश्नर ने कहा था कि ट्रिब्यूनल अवार्ड अंतिम नहीं होता।हमनें कानून दायरे में अपनी बात रखी थीं। बिना संपूर्ण पुनर्वास डूबा नही सकते, यह कानूनी शर्त है। इन तमाम मुद्दों पर निर्णायक चर्चा करनी है तो राज्य स्तरीय लोग होना चाहिए है कि केन्द्रीय दल आना चाहिए। यह हम भी जानते और आप भी। इन सभी मुद्दों पर निर्णय ले सके ऐसे अधिकारी व मंत्रियों का दल आना चाहिए। इस पर कलेक्टर श्रीमन शुक्ल ने कहा कि आपकी स्थिति ठीक नही है। जो-जो दल बनना है बिल्कुल बनाएंगे। इन चीजों में समय लगेगा। अब समय नही है। चर्चा चलती रहेगी और सार्थक चर्चाए होगी। राज्य सरकार सरकार जो संभव होगा करेंगे।

मरते दम तक चर्चा करूंगी
मेधा पाटकर ने कहा कि बांध का काम पूरा हो चुका है। उसमें पानी भर चुका है। 12 अगस्त को प्रधानमंत्री उद्घाटन कर सकते है। ऐसे में चर्चा बाद में क्यो। हम अनशन बीच आप चर्चा किजिये। मैं तो मरते दम तक चर्चा में रहुुंगीं। अनशन जारी रहने के दौरान प्राथमिक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। नही तो मतलब ही क्या, हम आगे कैसे जाएंगें। यह मुद्दा जीने मरने का है। बिना पुनर्वास डूब नही आ सकती। आप मुख्यमंत्री को हमारी तरफ से व्यक्तिगत कहें कि वे कोर्टमें कहे की पुनर्वास बाकी है। हम मानवीय रूप से पुनर्वास चाहते है। हम करने को तैयार है और तब तक डूब नही आएगी। वे अगर ट्विटर पर ही बात करना चाहते है मैं नही कर सकती। हमारे लिए यह प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं है। हम तो कानून के तहत पालन चाहते है। यह घाटी के जीवन का मुद्दा है। अगर केवल प्रधानमंत्री निर्णय ले सकते है तो उनसे बात होनी चाहिए है या उनके नुमाईंदे होने चाहिए। अनशन ऐसे कैसे खत्म हो जाएगा। अनशन के बाद चर्चा होगी तो निर्णय कब होगा। मुझे अनशन से कोई तकलीफ नही आप चिंता नही करें। कलेक्टर ने कहा कि आप अनशन जारी रखे, लेकिन ड्रीप लगवा ले। मेधा ने कहा कि फिर अनशन का मतलब ही क्या है। आप तो हमारी बात बिना एडिट के सीएम तक पहुंचाएं। आप कोर्ट में बोलने को तैयार नहीं है यहां बोलने को तैयार नहीं है। अनशन का मुद्दा बीच में न लाएं, हमें इससे कोई दिक्कत नही है।

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