
Under the leadership of Narmada Bachao Andolan held silent rally
बड़वानी. नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को प्रदेश और केंद्र सरकार के खिलाफ मुंह पर काला मास्क पहन मौन रैली निकालकर ज्ञापन सौंपा। इन्होंने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सरदार सरोवर के प्रभावितों के पुनर्वास अधिकारों को नकारने, सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना करने तथा केन्द्र सरकार द्वारा आत्मनिर्भर किसानों को उद्योगपतियों पर निर्भर करने का आरोप लगाते हुए जनविरोधी अध्यादेशों का विरोध किया। साथ ही अध्यादेशों की प्रतियां जलाई गई। नबआं कार्यालय से प्रारंभ हुई रैली बस स्टैंड, कोर्ट चौराहा, रणजीत चौक होते हुए कारंजा पहुंची। यहां पर सभा का आयोजन किया गया। इसके बाद नायब तहसीलदार जगदीश बिलगावे को ज्ञापन दिया गया। इन्होंने यहां हुई सभा में बताया कि केंद्र सरकार किसानों को निजी कंपनियों के भरोसे छोड़कर देश के किसानों की अवमानना कर रही है। कोविड काल में 24 प्रतिशत तक सिकुड़ चुकी अर्थव्यवस्था में सिर्फ एक ही कृषि क्षेत्र ऐसा है, जिसका प्रदर्शन ऋणात्मक नहीं है, लेकिन अब सरकार 60 प्रतिशत आबादी की आजीविका खेती को भी उद्योगपतियों के पास गिरवी रखना चाहती है। सरदार सरोवर प्रभावितों के अधिकारों का हनन हो या जनविरोधी अध्यादेशों के माध्यम से देश की खेती-किसानी को सुनियोजित तरीके से कमजोर करना हो, दोनों समान रूप से निंदनीय है।
कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुआ पुनर्वास : डूब प्रभावितों की समस्याओं को सामने लाते हुए सभा में बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 8 फरवरी 2017 को केंद्र व मध्यप्रदेश समेत गुजरात और महाराष्ट्र सरकारों को आदेश दिया था कि सरदार सरोवर बांध के सभी प्रभावितों का डूब से पहले पुनर्वास कर दिया जाए। वर्ष 2019 में मध्यप्रदेश के प्रभावित गांवों को डूबो तो दिया लेकिन सरकार हजारों परिवारों को पुनर्वास नहीं कर रही है। इस वर्ष फिर से उन्हीं परिवारों की संपत्ति डूबाई जा रही है, जिन्हें बिना पुनर्वास उजाड़ा गया था। यहां बताया कि सरकार की असंवेदनशीलता इतनी है कि अभी तक कोई कर्मचारी डूब प्रभावितों की खबर लेने नहीं पहुंचा है।
पिछले साल जिन गांवों को डूबोया, पंचनामे बनाए, उनका पुनर्वास भी नहीं हुआ है। डूब आने के बाद पांच हजार परिवारों को अस्थाई टीनशेड में रखा है। उनका पुनर्वास करना भी बाकी है। इस साल भी बैक वाटर की डूब में कई गांव और खेत टापू बन गए हैं। इसके लिए भी कोई व्यवस्था नहीं की है। सभा के दौरान नबआं के कैलाश यादव, गौरीशंकर कुमावत, जगदीश पटेल, सुरेश पाटीदार, रमेश जाट, भारत मछुआरा, गेदालाल भिलाला, राधा बहन, कमला यादव, राहुल यादव उपस्थित थे।
कई गांव हैं प्रभावित
इधर राजघाट में नर्मदा का जलस्तर सोमवार शाम को बढ़कर 137.350 मीटर पर पहुंच गया है। सरदार सरोवर बांध के बैक वाटर से नर्मदा पट्टी के कई गांव प्रभावित हो रहे हैं। वहीं जो गांव और खेत टापू बने हैं, उससे लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल आई डूब के बाद भी प्रशासन ने अब तक पुल-पुलियाओं का निर्माण नहीं कराया है।
Published on:
15 Sept 2020 03:11 am
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