
Order of the administration of the Ranjit Club
बड़वानी. शहर का प्रसिद्ध रणजीत क्लब को प्रशासन द्वारा अधिग्रहित करने की कार्रवाई शुरु कर दी है। बुधवार को कलेक्टर शिवराजसिंह वर्मा ने लीज की शर्तांे का उल्लंघन कर खेल गतिविधियों के अलावा बिना सक्षम अधिकारी के अनुमति के भोजनालय, दुकानें, बैडमिंटन हाल, आवास गृह, स्वीमिंग पुल, टेनिस कोर्ट आदि का निर्माण कर व्यवसायिक उपयोग करने पर क्लब की सभी परिसंपतियों और सरंचनाओं तथा नजूल भूमि का अधिग्रहण कर दो दिनों में कब्जा लेने के आदेश लोक निर्माण विभाग और तहसीलदार दिए है।
कलेक्टरेट से प्राप्त जानकारी अनुसार इसके साथ ही कलेक्टर ने रणजीत क्लब के अध्यक्ष को भी निर्देशित किया है कि वे वर्ष 2001 के बाद परिसंपतियों, दुकानों आदि से प्राप्त आय शासन कोष में तत्काल जमा कराए। वहीं आगामी माह से इन दुकानों का मासिक किराया सीधे किराएदारों के माध्यम से शासन पक्ष में जमा करवाना सुनिश्चित करें। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बड़वानी के माध्यम से रणजीत क्लब की भूमि का सीमांकन, क्लब के अध्यक्ष व सचिव की उपस्थिति में कराया था। इसमें स्पष्ट हुआ कि क्लब के कब्जे में नजूल भूमि सर्वे नंबर 1/1 पैकि रकबा 1.200 हेक्टर भूमि पर क्लब का भवन, का पलेक्स, बेडमिंटन हाल, लॉन टेनिस प्रेक्टिस हाल, स्वीमिंग पुल, लॉन टेनिस ग्राउंड तथा खुला क्षेत्र पाया गया। जबकि लीज डीड की शर्तांे अनुसार यह उल्लंघन की श्रेणी में आता है, क्योंकि पटटाधारी बंगला व आउट हाउस का प्रयोग क्लब व इससे संबंधित गतिविधियों के अतिरिक्त अन्य उद्देश्य के लिए नहीं होना था, लेकिन आउट हाउस में दुकान निर्माण कर किराए पर दिया गया। इसके लिए लोक निर्माण विभाग के मु य अभियन्ता से अनुमति भी प्राप्त नहीं की गई थी।
12 हजार वर्गमीटर में हुए हैं निर्माण
कलेक्टर द्वारा उप पंजीयक / जिला पंजीयक से प्राप्त मूल्यांकन रिपोर्ट अनुसार 75 वर्गमीटर पर बने भोजनालय का मूल्य 5002500 रुपए, 343.80 वर्गमीटर पर बनी 16 दुकानों का मूल्य 22931460 रुपए, 239.70 वर्गमीटर पर बने बेडमिंटन हाल का मूल्य 15987990 रुपए, 320 वर्गमीटर पर बने 6 आवास गृह का मूल्य 21344000 रुपए, 1156 वर्गमीटर पर बने स्वीमिंग पुल का मूल्य 77105200 रुपए, 2136 वर्गमीटर पर बने टेनिस कोर्ट का मूल्य 142471200 रुपए, 7729.50 वर्गमीटर रिक्त भूखंड का मूल्य 432852000 रुपए इस प्रकार कुल 12000 वर्गमीटर का मूल्य 717694350 रुपए बनता है।
प्रक्रिया का पालन करें, तो विचार करेंगे
कलेक्टर ने क्लब के पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया था। इस पर से उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब के साथ कोई प्रमाण पत्र, अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया। जिस पर से कलेक्टर ने उक्त समस्त परिस पतियों को अधिग्रहण करने का आदेश जारी किया है। साथ ही कलेक्टर श्री वर्मा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि रंजीत क्लब के द्वारा नजूल निवर्तन नियम 2020 या अन्य नियमों के तहत लीज नवीनीकरण के लिए आवेदन दिया जाता है और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है तो लीज नवीनीकरण के लिए विचार किया जा सकेगा ।
खास-खास
-वर्तमान में रणजीत क्लब भवन बड़वानी शासकीय रेकार्ड अनुसार लोक निर्माण विभाग के भवन रजिस्टर में न्यू रणजीत क्लब एवं आउट हाउस तल मंजिल, प्रथम मंजिल वर्ष 1942, स्कॉच रूम वर्ष 1936 एवं पावर हाउस वर्ष 1943 - 44 जीएडी विभाग (राजस्व) के अंतर्गत गैर आवासीय मद में दर्ज है।
-रणजीत क्लब बड़वानी के पदाधिकारियों द्वारा परिसर में वर्तमान में निर्मित भवन, दुकान व आवास गृह और अन्य निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग बड़वानी के भवन बुक पर अंकित नहीं है।
-रणजीत क्लब भवन वर्ष 1936 से 1943-44 तक की समयावधि में लोक निर्माण विभाग की पुस्तिका में दर्ज होकर उक्त समयावधि में भवन फ्री लीज पर था।
-क्लब द्वारा प्रस्तुत लीज डीड अनुसार लीज की समयावधि 1976 से वर्ष 2001 तक थी।
-वर्ष 2001 से आज दिनांक तक क्लब के द्वारा लीज नवीनीकरण के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया या अभी तक इसका नवीनीकरण नहीं करवाया गया।
-नियमानुसार क्लब को वर्ष 2001 में ही लीज का नवीनीकरण करवाना अनिवार्य था साथ ही लीज डीड की शर्तांे अनुसार क्लब को संरचना का केवल खेल गतिविधियों के लिए ही उपयोग करना था, लेकिनु क्लब के द्वारा खेल गतिविधियों के साथ क्लब का उपयोग बिना किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति लिए व्यवसायिक गतिविधियों और आवासीय गतिविधियों के लिए भी किया जाना पाया गया।
-क्लब द्वारा बिना किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति लिए क्लब परिसर में 27 दुकानों का निर्माण कर उन्हें व्यवसायिक रूप में उपयोग करने के लिए विक्रय कर दिया गया जब कि प्रस्तुत लीज डीड में स्पष्ट उल्लेख है कि क्लब का उपयोग केवल खेल गतिविधियों के लिए ही किया जाएगा।
मामला कोर्ट में चल रहा है
वहीं मामले को लेकर रणजीत क्लब के अध्यक्ष प्रकाश यादव ने बताया कि हमने धारा 52 बी के तहत कलेक्टर को एक आवेदन दिया है। वैसे कलेक्टर को पावर रहता हैं, वो ऐसा आदेश दे सकते है। मामला कोर्ट में चल रहा है।
Published on:
21 Jan 2021 12:22 pm
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