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पहाड़ी पर बना परमार वंशजों का गढ़ हुआ जीर्ण-शीर्ण

पूरी तरह जर्जर हो गया है रामगढ़ का किला, धन के लालचियों ने की खुदाई

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Ramgarh Fort dilapidated

Ramgarh Fort dilapidated

बड़वानी. जिला मुख्यालय से करीब 65 किमी दूर सतपुड़ा की ऊंची पहाड़ी पर स्थित रामगढ़ का किला अब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। पाटी ब्लॉक की रामगढ़ पंचायत के ग्राम पारा में ये किला स्थित है। बारिश के मौसम में यहां के पहाड़ों की खूबसुरती रोमांचित कर रही है। वहीं ठंड के समय पर यहां पूरा पहाड़ धूंध से घिरा रहता है। इस किले का निर्माण परामर वंश ने कराया था। ऊंचे स्थान पर होने के कारण यहां के जंगलों में बादल कुछ इस तरह दिख रहे हैं, जैसे वो जमीन पर उतर आए हो। संरक्षण के अभाव में किला जीर्ण-शीर्ण हो गया है। यहां खजाना पाने के लालच में लोगों ने कई स्थानों पर खुदाई की थी। ये किला समुद्र तल से 1532 फीट ऊंचाई पर बना हुआ है।
पर्यटन स्थल बनाने भेजा था प्रस्ताव
रामगढ का किले को पर्यटन स्थल बनाने के लिए पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां पहुंच मार्ग आसान न होने के कारण लोग नहीं आ पा रहे हैं। पर्यटन स्थलों पर आवास की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। पर्यटन स्थलों से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी शहर या अन्य स्थानों पर उपलब्ध नहीं है।
परमारकाल में हुआ था निर्माण
इतिहास के जानकार डॉ. एसएन यादव ने बताया परमारकाल में इस किले का निर्माण किया गया था। जो करीब 1 हजार साल पुराना है। यह किला 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच बना था। इसके बाद बड़वानी के सिसोदिया शासकों ने किले का जीर्णोद्धार कराया था। जानकारी के अनुसार दक्षिण क्षेत्र की ओर से होने वाले हमले से बचाव के लिए इसे बनाया गया था। दक्षिण क्षेत्र के महाराष्ट्र की सीमा से लगे खेतिया व पानसेमल की ओर मैदानी इलाका है। जबकी दक्षिण क्षेत्र के मैदानी इलाके के बाद यह पहला सबसे बड़ा पर्वत है। आजादी के बाद लोगों ने धन की लालच में इस किले की खुदाई कर दी थी, ये अब जीर्ण शीर्ण अवस्था में है।