
Shiva Baba Temple in Ambapani
बड़वानी/अंजड़. स्टेट हाईवे खंडवा बड़ौदा राज्य मार्ग पर अंजड़ और राजपुर नगर के बीच अंबापानी में स्थित शिवा बाबा मंदिर का पहुंच मार्ग जर्जर हो चुका है। इससे दर्शनार्थियों को मंदिर तक जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्षेत्रीय विधायक बाला बच्चन के गृह ग्राम के समीप स्थित सिनगुन पंचायत में आने वाले गांव अंबापानी में स्थित मंदिर के लिए ग्रामीणों को उम्मीद है कि मंदिर कि व्यवस्थाओं में सुधार होगा। इसकी वजह ये है कि ये क्षेत्र राजपुर ब्लॉक के सिनगुन ग्राम पंचायत के तहत आता है।
बडवानी-खरगोन मार्ग पर स्थित मंदिर में शिवा बाबा का चमत्कारीक मंदिर है। मंगलवार एवं बाकी के दिन दूरदराज से मन्नतधारी और दर्शनार्थी अपनी मन्नत उतारने यहां आते है। वैसे पूर्व विधायक देवीसिंग पटेल ने उबड़-खाबड़ रोड को सीमेंटीकरण कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब उनके स्वर्गवास के बाद ये आस भी टूट गई है। मार्ग उबड़-खाबड़ होने के साथ ही पीने के पानी, सिर पर आसरे के लिए टीनशेड सफाई और महिलाओं और पुरुषों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। शिवावाबा मंदिर जो पूर्व सांसद के नगर राजपुर से महज 4 किमी और कासेल वर्तमान गृह मंत्री के गृहग्राम से महज 1 किमी पास होने के बावजूद अभी तक इस जगह पर कोई ठोस व्यवस्था आज तक नहीं हो पाई है। शिवा बाबा के प्रति आस्था के चलते बड़वानी, सिलावद, अंजड़, खरगोन, सेंधवा और पास के जिले धार क्षेत्र के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात तक के लोग दर्शन करने आते है और मन्नत पूरी होने पर फल, मिठाई, पशु बली आदि देकर मन्नत को पूरा करते है। यात्रियों के बैठने के लिए टीनशेड, भोजनशाला, पानी और मंदिर तक पहुंच मार्ग सहित सफाई का खासा अभाव है।
रूकने और भोजन बनने के लिए नहीं है टीनशेड
शिवा बाबा मंदिर के पुजारी घनश्याम बाबा ने बताया कि 3 से 4 हजार की संख्या में प्रति मंगलवार सहित पूरे सप्ताह में यहां मन्नत उतारने और बाबा के दर्शन करने दूर-दूर से श्रद्धालु आते है, लेकिन यात्रियों को रूकने, भोजन निर्माण करने के लिए टीनशेड नहीं है। महिलाओं के लिए शौचालय नहीं होने से उन्हें शर्म का सामना करना पड़ता है। रात्रि के समय विद्युत की व्यवस्था नहीं होने से रात के समय खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमार्ग से मंदिर तक पहुंच मार्ग की घोषणा पूर्व विधायक देवीसिंग पटेल ने की थी, लेकिन उनके देहांत के बाद वह आस भी टूट गई है। ये मंदिर सिनगुन ग्राम पंचायत के तहत आता है, लेकिन पंचायत के सरपंच और सचिव ने आज तक यहां मंदिर में व्यवस्थाओं की सुध तक नहीं ली है। महाराष्ट्र के सांगवी से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि हम भी मंगलवार को दर्शन करने यहां आते हैं, लेकिन यहां फैली अव्यवस्थाओं की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
खुली पहाड़ी पर है मंदिर
अंजड़ के जगदीश भाई कोली ने बताया कि करीब 5 वर्ष से भी ज्यादा समय से इस मंदिर में मन्नत उतारने और समाज के लोगों के साथ मन्नत उतारने आते रहते है। ये मंदिर अंजड़ और राजपुर के बीच खुली पहाड़ी पर होने की वजह से मन्नत उतारने के बाद खाना बनाने और शौचालय सहित कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रात के समय के लिए रात्रि विश्राम और बिजली के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं है। बताया जाता है कि शिवा बाबा को मानने वालों में सभी समाज के लोग है, लेकिन विशेषकर आदिवासी और बंजारा समाज में शिवा बाबा को मानने और उन पर आस्था रखने वालों की संख्या जाता है।
फिलहाल विधायक और सांसद से उम्मीदें
गजेंद्र पटेल के सांसद बनने के बाद श्रद्धालुओं को अपेक्षा है कि टीनशेड, मार्ग निर्माण सहित पानी की व्यवस्था कर शिवा बाबा क्षेत्र का विकास होगा। यहां आगंतुकों के लिए भोजन और विश्राम करने के लिए टीनशेड, पीने के पानी, विद्युत व्यवस्था सहित रोड बन जाता है, तो मंदिर में आने वाले लोगों को सुविधा होगी। ग्राम अंबापानी पर स्थित शिवा बाबा मंदिर की स्थापना वर्ष 2002 में संत तपस्वी रामराव महाराज निवासी पोखरा देवी द्वारा की गई थी। फिलहाल पिछले 19 सालों से यहां पर घनश्याम बाबा पुजारी का काम संभाल रहे है। शिवा बाबा के मंदिर के पास एक और अंबे माता का मंदिर बना हुआ है। शिवा बाबा के अनुयायियों में विशेषकर आदिवासी, बंजारा, कोली सहित अन्य समाजों में माने जाते है। ये स्थल वर्ष 2002 के बाद से शिवा बाबा के नाम से जाना जाने लगा है।
बकरे की बली देने का है रिवाज
पूरे बड़वानी जिले के साथ इंदौर, उज्जैन, अलिराजपुर सहित आसपास के सीमावर्ती राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात सीमा पर स्थित शिवा बाबा के नाम से विख्यात है। आदिवासी समाज द्वारा कहा जाता है कि यहां मंदिर में मन्नत लेने पर अधिकांश बकरे की बली देने का रिवाज है। यहां क्षेत्र सहित आसपास की विभिन्न जगहों से बाबा के अनुयायी पहुंचते है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। भक्त दर्शन करने के लिए आते है। विशेष धार्मिक दिनों में इस क्षेत्र से गुजरने वाले हर नेता तथा अधिकारी बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी अवश्य लगाते है। कई नेताओं ने तो यहां आने के बाद इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने तथा सरकारी अनुदान से जीर्णोद्धार कराने की बात कर चुके है, लेकिन आज तक इसका वास्तविक विकास नहीं हो पाया है। आज भी ये स्थल बड़वानी आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद मुर्तरूप में अपना स्थान हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों एवं अन्य जगहों पर सफाई और शौचालय का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन ये स्थल अधिकारियों और राजनेताओं की उदासीनता का शिकार है।
Published on:
30 May 2019 11:49 am
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