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उम्मीद की बड़ी चौखट है कालिका और मोटी माता के मंदिर

माता की मूर्ति खुद ही यहां प्रकट हुई थी। इसे स्वयंभू प्रतिमा कहा जाता है। माता की प्रतिमा को जब भी मंदिर में रखने की कोशिश की, वह खुद भी खुद ही परिसर

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Temple of Cali and moti Mata in barwani

Temple of Cali and moti Mata in barwani

बड़वानी. ऐसा माना जाता है कि कलिका माता मंदिर लगभग दो वर्ष से ज्यादा पुराना हैं। तत्कालीन बड़वानी नरेश ने यहां मंदिर बनाने के निर्देश दिए थे। माता की मूर्ति खुद ही यहां प्रकट हुई थी। इसलिए इसे स्वयंभू प्रतिमा कहा जाता है। वह कहते हैं कि माता की प्रतिमा को जब भी मंदिर में रखने की कोशिश की गई, वह खुद भी खुद ही परिसर में बने कुएं के पास आ जाती थी। ऐसे में यह प्रतिमा फिर नहीं हटाई गई।
मान्यता: कहा जाता है कि जिस कुएं के पास यह प्रतिमा रखी हुई है। उसका पानी आज तक नहीं सूखा। नवरात्र पर यहां दोनों समय विशेष पूजा अर्चना होती है। अष्टमी पर चंडी हवन का आयोजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि स्वयंभू होने के कारण माता के दर से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता। हर मन्नत पूरी होती है।
विशेषता: मंदिर करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर के व्यवस्थापक मोहनलाल कहते हैं कि यहां खुला मैदान हुआ करता था। जहां बेर के पेड़ के पास माता बेदी बनी हुर्ई थी। मोहनलाल के मुताबिक 1946 में लक्ष्मीनारायण गुप्ता की मां को मोटी माता सपने में दिखाई दी और कहा कि मंदिर बनवाए। लक्ष्मीनारायण गुप्ता न 1947 में इस यहां मंदिर का निर्माण कराया और माता की बेदी को मंदिर में स्थापित कराया।
मान्यता: मोहनलाल कहते हैं कि इस मंदिर की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि जिन लोगों को भी माता निकलती है। (मेडिकल में मिजल्स कहा जाता हैं) वह यहां आकर माता के चरणामृत का जल लेकर छिडक़ता है। इससे वह ठीक हो जाता है। यहां नौ दिन तक विशेष पूजा अर्चना होती है। यहां गुजरात से भी लोग आते हैं।
नौरात्र का मेला:
मंदिरों के आसपास तो मेला नहीं लगता है। लेकिन शहर के झामरिया गॉर्डन में तीन दिनों तक हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जहां गणगौर माता की सवारी निकाली जाती है। इस मौके पर भक्तों में उत्साह रहता है।
शनि अमावस्या पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
शनि अमावस्या होने से नर्मदा नदी पर स्नान के लिए सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इसके अलावा अंजड़ नाका स्थित सांई शनैचर मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन किया। मुख्य यजमान प्रतिक शर्मा व पूजा शर्मा थे। मंदिर में अभिषेक, हवन, पूजन व सब्जी-पुड़ी की प्रसादी बांटी। शहर के सेगांव बायपास स्थित शनि मंदिर में भी पूजा-अर्चना हुई। प्रसादी भी बांटी।