
विधालय को आदर्श का तमगा तो मिला पर सुविधाएं नहीं, कम हो रहा नामांकन
विराटनगर (जयपुर)। ग्रामीण परिवेश के विधार्थियों को अच्छी शिक्षा मुहैया कराने के लिए सरकार एक ओर शिक्षा के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च कर रही है। विधालयों को आदर्श का दर्जा दिया लेकिन आवश्यक सुविधाओं पर ध्यान नहीं गया। ऐसा ही पंचायत समिति का एक विधालय राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विधालय पापडा है।
जिसे सरकार ने वर्ष 1967-68 में प्राथमिक स्थर से शुरू कर वर्ष 1988-89 में उच्च प्राथमिक, वर्ष 2013-14 में माध्यमिक तथा 2017-18 में उच्च माध्यमिक स्तर तक क्रमोन्नत कर आदर्श विधालय का तमगा तो दे दिया लेकिन इसकी आवश्यक सुविधाओं की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। विधालय में ना तो पर्याप्त अध्यापक है ना ही पर्याप्त कक्षा कक्ष व बिजली, पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं। विधालय में आवश्यक सुविधाओं के अभाव में प्रतिवर्ष नामांकन कम होता जा रहा है।
एक दर्जन शिक्षकों के पद रिक्त
विधालय में वर्तमान में करीब डेढ़ दर्जन शिक्षकों के पद स्वीकृत है जिनमें प्रधानाचार्य सहित एक दर्जन शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे है। वर्तमान में यहां छह अध्यापकों के सहारे विधालय में शिक्षण व्यवस्था का संचालन हो रहा है। विधालय में दो पद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद स्वीकृत है। पिछले कई वर्षों से दोनों ही पद रिक्त है।
पर्याप्त कक्षा कक्ष का अभाव
विधालय में कहने को तो 10 कमरे है। लेकिन पांच कमरों की हालत जर्जर होने के कारण यहां पांच कमरों में 11 कक्षाएं संचालित हो रही है। जिसके कारण एक कमरे में दो कक्षाओं का संचालन करना पड़ रहा है। जिससे विधार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
इनका कहना है
विधालय में शिक्षकों के रिक्त पदों व आवश्यक सुविधाओं के लिए पूर्व में कई बार विभागिय अधिकारियों, विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया लेकिन इस और कोई ध्यान नहीं दिया गया।
हरिराम रैगर, कार्यवाहक प्रधानाचार्य, राआउमा विधालय, पापडा
Published on:
27 May 2018 08:09 pm
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