
अयोध्या के काठिया मंदिर में त्रिवेणीधाम के रामरतन दास आसीन
शाहपुरा।
त्रिवेणी धाम एवं डाकोर धाम के संत पद्म श्री नारायण दास महाराज के भगवद् धाम प्रवेश हो जाने पर अयोध्या स्थित काठिया मंदिर की गद्दी पर त्रिवेणीधाम के रामरतन दास महाराज आसीन हुए। रामरतन दास महाराज पर संत समाज की ओर से चादरपोशी की गई।
इस अवसर पर मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमे हजारों भक्त एवं संतों ने हिस्सा लिया।
चादरपोशी कार्यक्रम में जगदगुरु राम दिनेशाचार्य महाराज, अखिल भारतीय पंच रामानंदी खाकी अखाड़ा के महंत मोहन दास महाराज, खोजी द्वाराचार्य रामरिछपाल दास महाराज, रामजन्म भूमि न्यास एवं मणिराम दास की छावनी के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास महाराज, बड़ा स्थान जानकी घाट के जन्मेजय दास, बड़ी जगह दशरथ महल के देवेंद्राचार्य, करुणा निधान के रामजी दास, चतुर्भुज मंदिर के पहाड़ी बाबा, राम कथा कुंज के रामानंद दास, बड़ी छावनी के जगदीश दास, मोनी माझा के राम प्रिय दास, वशिष्ठ भवन के महंत एवं पूर्व सांसद रामविलास दास वेदांती, राम वल्लभा कुंज के राम शंकर दास, एवं राजकुमार दास, फलाहारी बाबा, जयपुर के राम मनोहर दास, सांवल दास बगीची के सियाराम दास, बंसी वाले बगीचे के अवधेश दास, डाकोर धाम के पुजारी केशव दास, केदार दास, देवा दास एवं अखाड़ा परिषद के संत -महंत द्वाराचार्य एवं महामंडलेश्वर आदि मौजूद थे
मंदिर में पं. दिनेश आचार्य एवं उपेन्द्र गंगावत ने वैदिक मंत्रों से श्री सीताराम जी एवं नारायण दास महाराज की पूजा करवाई। इसके बाद संत समाज द्वारा राम रतन दास महाराज पर चादर विधि की गई।
अयोध्या स्थित काठिया मन्दिर
छोटी छावनी के पास श्री वासुदेव घाट पर स्थित श्री काठिया मंदिर भरत दास महाराज का आश्रम था। त्रिवेणी धाम के संस्थापक ऋषि राज आचार्य परम् तपोनिष्ठ गंगा दास महाराज ने आचार्य भरत दास महाराज से दीक्षा लेकर लगभग 12 वर्षों तक वहीं तपस्या की। इसके बाद गंगा दास महाराज शाहपुरा के पास अरावली की पहाडिय़ों में तपस्या करने लगे। जिसे बाद में ( गोसाई वाड़ा ) त्रिवेणी धाम के नाम से जाना जाने लगा। इन्होंने ही त्रिवेणी धाम की स्थापना की थी।
Published on:
02 Jan 2019 08:03 pm
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