
बस्सी (जयपुर)। नगरपालिका के लिए ग्राम पंचायत बस्सी तय मापदंडों पर खरी उतरती है लेकिन राज्य सरकार ने इसे पालिका का दर्जा दिलाने में रुचि नहीं दिखाई। जिससे राजधानी की नाक के नीचे बसे बस्सी के बाशिंदों को नगरीय सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। हालांकि फिर से बस्सी पंचायत को नगरपालिका बनाने के लिए उपखण्ड कार्यालय की ओर से सर्वे रिपोर्ट जिला कलक्टर को भिजवाई गई। जिससे माना जा रहा है कि अगले साल चुनावी वर्ष में सरकार इसे पालिका बनाने की बजट घोषणा कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार राजधानी से 28 किलोमीटर दूर जयपुर-आगरा हाईवे पर स्थित पंचायत बस्सी वर्ष 1978 में नगरपालिका बनाया था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने वर्ष 1991 में इसे पुन: ग्राम पंचायत में परिवर्तित कर दिया। इसके बाद तत्कालीन पालिका के अध्यक्ष को सरपंच एवं वार्ड पार्षदों को वार्ड पंच बना दिया गया। इसके बाद सरकार में बस्सी क्षेत्र के लोगों की राजनीतिक पैठ मजबूत नहीं होने से यह फिर से नगरपालिका नहीं बन पाई। पिछली सरकार ने जरूर वाहवाही लूटने के मकसद से नगरपालिका बनाने की घोषणा की।
इसका गजट नोटिफिकेशन भी करवाया, लेकिन वर्ष 2013 में नई सरकार बनने के बाद इसे निरस्त कर दिया, जिसके चलते बस्सी का नगरपालिका बनने का सपना चूर हो गया। वर्तमान सरकार का कार्यकाल वर्ष 2019 में पूरा होने जा रहा है तो उसी के निर्देश पर जिला कलक्टर ने बस्सी पंचायत को नगरपालिका बनाने के संबंध में सर्वे पिछले महीनों में करवाया था, जिसकी रिपोर्ट भी एसडीएम कार्यालय की ओर से भेज दी गई है। सूत्रों की मानें तो सरकार अगले बजट में बस्सी को नगरपालिका बनाने की घोषणा की जा सकती है, क्योंकि अगले विधानसभा चुनाव में सरकार हर हाल में चाहेगी, कि इसका सकारात्मक प्रतिफल भाजपा को मिले।
मूलभूत सुविधाओं से हो रहे वंचित
एसडीएम की ओर से कलक्टर को भेजी गई रिपोर्ट में बताया है कि बस्सी में उपखंड कार्यालय, तहसील कार्यालय, पंचायत समिति कार्यालय, एसीपी कार्यालय, पुलिस थाना, ब्लॉक स्तरीय कार्यालय होने के कारण हर व्यक्ति बस्सी कस्बे में आना-जाना होता है। अन्य जिलों एवं राज्यों के यात्री भी यहां से होकर बसों एवं निजी साधनों से गुजरते हैं। उनकी आवश्यक सुविधाओं की पूर्ति बस्सी ग्राम पंचायत होने के कारण नहीं हो पाती है। इतना ही नहीं, पंचायत क्षेत्र में रहने वाली 40-50 हजार की जनसंख्या के अनुपात में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना पंचायत की निजी आय से संभव नहीं है। जनंसख्या के अनुपात में विकास न्यूनतम है। पंचायत के अधिकार एवं आय सीमित है, जिससे प्रशासकीय कार्यों से काफी शिथिलता होती है। ऐसे में बस्सी को नगरपालिका बनाना जरूरी है।
यह भी पढे:कानोता में व्यापारी व सीआरपीएफ के जवानों ने कुछ ऐसा कि हर कोई सलाम करता गया
नगर निगम से 20 किलोमीटर दूर
सर्वे रिपोर्ट में बताया कि ग्राम पंचायत बस्सी से करीब 20 किलोमीटर दूर तक जयपुर नगर निगम कार्यरत है। क्षेत्र में राजकीय कार्यालय, शिक्षण संस्था, व्यावसासिक क्षेत्र, रीको क्षेत्र, रेलवे स्टेशन, वाणिज्यिक संस्थान, राजकीय चिकित्सालय भी है।
सीमा का किया जिक्र
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार बस्सी पंचायत की सीमा जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे स्थित बस्सी चक आगरा रोड से पश्चिम में 1.5 किलोमीटर दूर बिहारीपुरा-ग्राम मानसर खेड़ी की सीमा तक, पूर्व दिशा में 1.5 किलोमीटर ग्राम पंचायत मोहनपुरा की सीमा तक, उत्तर में 2 किलोमीटर ग्राम भौन्यावाला ग्राम पंचायत मोहनपुरा की सीमा तक, दक्षिण दिशा में 2 किमी बस्सी मुख्य ग्राम एवं मुख्य ग्राम से 1 किमी भांकरी ग्राम पंचायत मनोहरपुरा की सीमा तक है।
इनका कहना है
कलक्टर की ओर से बस्सी पंचायत को पुन: नगरपालिका बनाने के लिए संंबंधित सूचनाएं मांगी थी, जिसकी सर्वे रिपोर्ट एक पखवाड़े पहले भेजी जा चुकी है, जिसमें बस्सी को पालिका का दर्जा दिलाने का आग्रह भी किया गया है।
प्रभुदयाल शर्मा, एसडीएम बस्सी
Published on:
17 Oct 2017 12:21 am
बड़ी खबरें
View Allबस्सी
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
