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वीडियो कॉलिंग करते समय नेटवर्क टूटते ही चार साल का बेटा मोबाइल में ढूंढ़ता है ‘पापा’

कोरोना योद्धा डॉ. अनिल शर्मा बेटे से वीडियो कॉलिंग पर करते है बात

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बस्सी

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Vinod Sharma

Apr 20, 2020

 कोरोना योद्धा डॉ. अनिल शर्मा बेटे से वीडियो कॉलिंग पर करते है बात

वीडियो कॉलिंग करते समय नेटवर्क टूटते ही चार साल का बेटा मोबाइल में ढूंढ़ता है 'पापा'

आंधी(जयपुर). लॉकडाउन में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर अजमेर के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में जमवारामगढ़ तहसील के फुटोलाव गांव निवासी डॉ. अनिल शर्मा कोरोना योद्धा के तौर पर दिन-रात जुटे हुए हैं और यही मकसद है कि किसी भी स्थिति में कोरोना को हराना है। भावुक स्थिति तब होती है, जब फुर्सत के क्षणों में परिजनों से वीडियो कॉलिंग करते हैं और कई बार नेटवर्क चला जाता है तो चार साल का बेटा सिर्फ मोबाइल की स्क्रीन पर हाथ लगाकर पापा-पापा करता रह जाता है। आंधी के राजकीय चिकित्सालय में कई सालों तक सेवा दे चुके डॉ. शर्मा की मानें तो तीन महीने से घर नहीं आए हैं। मार्च महीने के अन्तिम सप्ताह में छुट्टी लेकर घर जाने की मंशा थी लेकिन कोरोना संक्रमण बढऩे से जिम्मेदारी अधिक बढ़ गई। अब जब तक कोरोना से जंग नहीं जीतेंगे तब तक चिकित्सा सेवा में ही जुटे रहना है।

परिजन भी बढ़ा रहे हौसला——-
कोरोना योद्धा ने बताया कि चूंकि मम्मी प्रभाती देवी-पापा नंदकिशोर, पत्नी कांता और चार साल का बेटा वासु गांव में रहते हैं। ऐसे में वे टीवी व समाचार पत्र पढ़कर चिंतित जरूर रहते है लेकिन वे सदैव हौसला बढ़ाते रहते हैं। शायद वे दूर रहकर भी मेरा मनोबल बढ़ाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही फुर्सत मिलती है तो वे परिजनों से बातचीत कर लेते है लेकिन सबसे ज्यादा भावुक क्षण तब होता है कि जब वीडियोकॉलिंग से बेटे से बात कर रहा होता हूं। परिजन बताते है कि किन्हीं कारणों से नेटवर्क चला जाता है तो बेटा मोबाइल की स्क्रीन पर बार-बार हाथ लगाकर पापा-पापा कहकर रोने लगता है।

आइसोलेशन वार्ड में तैनात——-
डॉ. अनिल ने बताया कि यह पेशा ही सेवा का है। एक चिकित्सक के लिए मरीज की जान बचाने से बड़ा कोई धर्म नहीं है। अभी वे आइसोलेशन वार्ड में ही तैनात हैं। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया है कि हर हाल में लॉकडाउन में रहें। सरकारी एडवायजरी की पालना करें। सोशल डिस्टेंसिंग रखें।