
मुंह में झाग, लार पडऩा, धूजणी लगकर भैंसों की मौत का कारण संक्रमण, चिकित्सकों ने ये बताए बचाव के उपाय
शाहपुरा. विराटनगर और चंदवाजी इलाके में बीते एक सप्ताह में पशुओं के बीच ब्लड़ में बैक्टीरिया का संक्रमण फैल रहा है। संक्रमण पशु के लीवर व फैफड़ों के कमजोर होने से डेढ़ दर्जन से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। वहीं एक दर्जन पशु बीमारी की चपेट में हैं। पशुपालकों के मुताबकि यहां विराटनगर क्षेत्र के दूदी आमलोदा के सुंदरपुरा गांव में 10 भैंस बीमारी के चलते काल का ग्रास बन गई है। वहीं चंदवाजी के चिताणु कला ग्राम पंचायत के जुगलपुरा गांव में 7 भैंस दम तोड़ चुकी है। इनके अलावा कई पशु बीमारी की चपेट में है। दुधारू पशुओं की मौत से पशुपालक आजीविका चलाने को लेकर चिंतित है। क्षेत्र में पिछले सात दिन से पशुओं के मरने का सिलसिला जारी है। वहीं पशु चिकित्सा विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में बचाव के कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। चिकित्सकों को भी रिपोर्ट का इंतजार है।
एक भैंस की कीमत 70 हजार
पशुपालक ने बताया कि एक अच्छी नस्ल की भैंस की कीमत करीब 70 हजार रुपए से शुरू होती है। बीमारी से मरी कई भैंस अच्छी नस्ल की बताई गई है। ऐसे में पशुपालकों को कई लाख रुपए का नुकसान हो गया है। सुंदरपुरा गांव में पशुओं की मौत के बाद से नोडल अधिकारी बीएल यादव के नेतृत्व में चिकितसकों की टीम लगातार निगरानी कर रही है। हालांकि पशुपालकों ने बताया कि सूचना पर स्थानीय पशु चिकित्सक उपचार के लिए पहुंचते हैं और पीडि़त पशुओं को एंटीबाइटिक का इंजेक्शन लगाकर चले जाते हैं।
इन पशुपालकों के पशु मरे
यहां चिताणु ग्राम पंचायत के जुगलपुरा में राजेन्द्र गुर्जर की 1 भैंस, सुंदर मीणा की 3 भैंस, प्रहलाद मीणा की 2 भैंस, सीताराम गुर्जर 1 भैंस की मौत हो चुकी है। इधर, सुंदपुरा में गांव में झाजूराम फागणा की 1 भैंस, गोपाल फागणा की 1, रामगोपाल फागणा की 1, रामनारायण चेची की 2, कैलाश कसाणा, पूर्व सरपंच सीताराम गुर्जर की 1 भैंस, कैलाश रावत की 1 भैंस सहित अन्य कई लोगों की चार भैंस की बीमारी से मौत हुई है। गांव में झाजूराम फागणा, रामलाल फागणा, सुरजमल खर्लवा, लीलाराम खर्लवा, बोदूराम रावत, मोठे राम चेची, कानाराम चनेजा, कलाराम रावत की भैंस बीमार है।
पशुओं में बीमारी के लक्षण
पीडि़त पशुओं में पहले मुंह में झाग आना, लार पडऩा, धूजणी लगना और श्वांस लेने में परेशानी आ रही है। इन लक्षणों के बाद पीडि़त पशु तीन-चार घंटे में दम तोड़ देता है। पशुपालकों ने बताया कि सुंदरपुरा में जयपुर से पहुंची टीम ने बीमार पशुओं के लक्षण और मरे पशुओं के पोस्टमार्टम से सैम्पल लिए हैं, लेकिन अभी तक बीमारी पर अंकुश नहीं लग पाया है।
पशु पशुपालक ये रखें ध्यान
विराटनगर नोडल अधिकारी ने बताया कि पशुपालकों को बीमार पशुओं का विशेष ध्यान रखने के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि बीमार पशुओं को अन्य स्वस्थ पशुओं से दूर रखें। साथ ही इनके लिए अगल से खाने-पीने व्यवस्था रखें। सर्दी से बचाव के लिए ठंडा पानी नहीं पिलाएं। बीमारी के लक्षण नजर आने पर तत्काल संबंधित चिकित्सालय केन्द्र के चिकित्सकों को अवगत कराकर उपचार करवाए। इसके अलावा पशुओं को दूषित पानी नहीं पिलाया जाए। बाड़े को साफ एवं स्वच्छ रखने के साथ ही लाल दवा के घोल का बाड़े सहित आसपास के क्षेत्र में छिड़काव करें।
इनका कहना है
पीडि़त पशुओं का उपचार चल रहा है। जयपुर से पहुंची टीम ने सैम्पल लिए थे। जांच में पशुओं के रक्त में बैक्टीरिया का संक्रमण पाया गया है, जो गुर्दें व फैफडों को कमजोर करता है। बीमारी से संबंधित पीडि़त पशुओं का उपचार जारी किया जाएगा। मौसम बदलाव के कारण संक्रमण फैलता है।
बीएल यादव, नोडल अधिकारी, पशुचिकित्सा विभाग, विराटनगर।
Published on:
11 Feb 2020 11:50 pm
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