जयपुर ग्रामीण में भारी बरसात से भले ही बाजरे की कड़बी और मूंगफली की फसल में नुकसान हुआ है, लेकिन यह बरसात रबी की बुवाई के लिए रामबाण साबित हुई है।
बस्सी/पत्रिका. जयपुर ग्रामीण में भारी बरसात से भले ही बाजरे की कड़बी और मूंगफली की फसल में नुकसान हुआ है, लेकिन यह बरसात रबी की बुवाई के लिए रामबाण साबित हुई है। यदि विद्युत निगम के बस्सी, कानोता व बांसखोह उपखण्ड की बात की जाए तो विद्युत मोटरों से खेतों में बुवाई करते तो करीब 1 करोड़ 30 लाख यूनिट बिजली की खपत हो जाती।
एक पानी देने में ही निगम का करीब 1 करोड़ 22 लाख 20 हजार रुपए के बिल जारी होते हैं। जिसका बरसात ने सीधा फायदा करा दिया है। हालांकि किसानों को एक हजार रुपए प्रति माह की सब्सिडी मिलती है। सब्सिडी काट कर एक यूनिट का 94 पैसे का उपभोक्ता को बिल जारी किया जाता है। एक यूनिट के 94 पैसे के हिसाब से भी एक करोड़ 22 लाख 20 हजार रुपए की बचत हो गई।
विद्युत निगम के बस्सी राजस्व अधिकारी राजेश मीना ने बताया कि कृषि के सीजन में विद्युत निगम के बस्सी उपखण्ड में करीब 60 लाख यूनिट बिजली की यूनिट खर्च होती है। इसी प्रकार कानोता एवं बांसखोह उपखण्ड में भी करीब 70 लाख यूनिट बिजली खर्च होती है। बरसात होने से इसका सीधा फायदा निगम व और किसानों को हुआ है। यदि सीजन में दो मावठ और भी हो जाती है तो तो पानी की बचत में भी करीब ढाई करोड़ यूनिट बिजली की बचत होती है।
किसानों की मेहनत की भी बचत
बरसात से बिजली की बचत हो ही गई है, वहीं किसान यदि मोटरें चला कर खेतों में पानी भरा कर बुवाई करते तो उनको काफी मेहनत करनी पड़ती उसकी भी बचत हो गई है। किसानों को खेतों में पानी भराने के लिए दिन और रात में बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है। वहीं खेतों में पानी देने के लिए क्यारी व धोरे भी बनाने पड़ते हैं और फिर पानी देना पड़ता है। ऐसे में बिजली के साथ मेहनत की भी बचत हो गई है।
पंखे- कूलर बंद होने से भी बिजली की बचत
बरसात होने के बाद तापमान में भी कमी आ गई है । इससे लोगों को गुलाबी सर्दी का भी अहसास होने लगा है। रात को लोग कूलर तो लोगों ने बंद ही कर दिए हैं। कई लोग आधी रात तक पंखा चलाते हैं वह भी बहुत कम स्पीड में चलाते हैं ,फिर सर्दी का अहसास होने पर पंखे भी बंद कर देते हैं। ऐसे में लाखों यूनिट बिजली की यहां भी बचत हो गई है।
ट्रिपिंग व लोड भी पड़ गया कम
भीषण गर्मी और कृषि में पानी भराते समय बिजली का लोड़ अधिक आता है। क्योंकि उस वक्त बिजली खर्च अधिक होती है। लेकिन बरसात होने से तापमान कम पडऩे से कूलर, एसी पूरी तरह बंद है और पंखे भी कुछ ही देर चलते हैं। बिजली की मोटरें नहीं चल रही है। ऐसे में इस वक्त बिजली की खपत बहुत कम है। इसलिए लोड भी नहीं आ रहा है। ऐेसे में बिजली कटौती व ट्रिपिंग भी बहुत ही कम हो रही है।