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बारिश ने फेरा किसानों की उम्मीदों पर पानी, भीग गई अन्नदाता की मेहनत

बारिश के मौसम में इस बार हुई अच्छी बारिश से कई जिलों में पहले ही फसल खराब हो गई थी। लेकिन अब दो दिन की बारिश ने किसान के सामने कंगाली में आटा गीला कर दिया है।
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जयपुर

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Santosh Trivedi

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Updated: 8 Oct 2022, 2:59 PM IST

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राजस्थान के कई जिलों में पिछले दो दिन में हुई बारिश ने अन्नदाता की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में पानी भरने से किसानों के सामने कटी पड़ी फसल को बचाने का संकट पैदा हो गया है। बारिश के मौसम में इस बार हुई अच्छी बारिश से कई जिलों में पहले ही फसल खराब हो गई थी। लेकिन अब दो दिन की बारिश ने किसान के सामने कंगाली में आटा गीला कर दिया है। पत्रिका ने बारां, झालावाड़ और प्रतापगढ़ जिले में फसल खराबे की पड़ताल कराई तो हालात कुछ ऐसे ही सामने आए। बारां जिले में 30, झालावाड़ में 55 और प्रतापगढ़ में 30 फीसदी तक फसल खराब हुई है।

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झालावाड़ : फसल बचाने के प्रयास विफल
झालावाड़ जिले में खेतों में कटी फसलों में पानी भरने से सोयाबीन, उड़द, मक्का की फसलें पूरी तरह से खराब होने के कगार पर है। कई किसानों ने फसल को तिरपाल से ढकने का प्रयास किया, लेकिन तेज बारिश ने प्रयास विफल कर दिए। जिले में करीब 84,958 हेक्टेयर में बोई फसल प्रभावित हुई है। कृषि विभाग 10 से 55 फीसदी तक नुकसान मान रहा है।

प्रतापगढ़ : खेतों में कटी पड़ी हैं प्रमुख फसलें
प्रतापगढ़ जिले में इन दिनों खरीफ की फसल समेटी जा रही है। खेतों में मक्का और सोयाबीन की फसलें कटी पड़ी है। खेतों में कटी फसल भीग गई। कटी फसलों में 20 से 30 प्रतिशत नुकसान हो गया है।

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बारां जिले में सर्वाधिक खराबा सोयाबीन की फसल में हुआ है। इससे सोयाबीन की गुणवत्ता खराब होने के साथ उसके दाने का वजन भी कम होने की संभावना बढ़ गई है। खरीफ में यहां 2.54 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई थी। अगेती बुवाई की करीब 80 हजार हेक्टेयर सोयाबीन की कटाई व थ्रेसिंग हो गई। शेष 1.76 लाख हेक्टेयर की फसल में से आधी फसल किसानों ने खेतों में सुखा रखी थी। लगभग 80 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन अभी खेतों में खड़ी है।