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कोटपूतली में चेजा पत्थर के लिए पहाडिय़ां छलनी, गहरे खनन से निकल आया पानी

(mining) 100 से 150 फीट गहराई तक खनन, 300 से 400 ट्रक प्रतिदिन गुडगांव- दिल्ली पहुंच रहे

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कोटपूतली में चेजा पत्थर के लिए पहाडिय़ां छलनी,  गहरे खनन से निकल आया पानी

कोटपूतली में चेजा पत्थर के लिए पहाडिय़ां छलनी, गहरे खनन से निकल आया पानी

कोटपूतली. क्षेत्र में अर्थवस्था की धुरी माने जाने वाले चेजा पत्थर को धरती से निकालने के लिए खानों में पाताल तोड़ खनन किया जा रहा है। इससे खाने गहरी होने के कारण हादसे के खतरे के साथ पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। अवैध खनन व अवैध ब्लास्टिंग के चलते कई खानों में 100 से 150 फीट गहराई तक खनन होने से पानी निकल रहा है। अवैध खनन से सरकार को रायल्टी के रूप में होने वाली राजस्व आय का चूना लग रहा है। खान मालिकों के अलावा ग्रामवासी भी कई जगह कब्जा करके चेजा पत्थर का अवैध खनन कर रहे हैं। एक समय कल्याणपुरा कला व महड़ावाली को चेजा पत्थर का बड़ा हब माना जाता था, लेकिन अवैध खनन के चलते खान मालिकों पर लगाए गए भारी जुर्माने के बाद खान विभाग ने यहां खनन पर रोक लगा दी। यहां से आसपास के बड़ी संख्या में क्रशरों पर चेजा पत्थरों की आपूर्ति हो रही थी। भैंसलाना में काले रंग का विश्व प्रसिद्ध मार्बल निकलता है।

यहां होता है खनन

इस क्षेत्र में नीमकाथाना रोड पर नारहेड़ा, चोटिया, पवाला राजपूत, बनार, शुक्लाबास, बेरी बंाध, मीरापुर फार्म, भैंसलाना, पाछूड़ाला, द्वारिकपुरा, टोरडा रामपुरा, टोरडा ब्राह्मण, फतेहपुरा, मोहनपुरा, कूजोता व पवाना अहीर में खनन होता है। यहां मुख्य रूप से चेजा पत्थर का खनन अधिक होता है। इसके अलावा चूना पत्थर का भी बड़े पैमाने पर खनन होता है। चूना पत्थर का उपयोग यहां सीमेन्ट फैक्ट्री में हो रहा है। इसके अलावा फल्सपार, क्वार्टज व चाइना क्ले का भी कई जगह खनन हो रहा है।

दिल्ली- गुडगांव में मांग अधिक

हरियाणा में खनन पर रोक लगने व दिल्ली में चेजा पत्थर की रोड़ी की मांग अधिक होने से चेजा पत्थर की मांग बढ़ गई। इस पत्थर से बनी रोड़ी की मांग गुडगंाव दिल्ली में एकाएक बढऩे से अंधाधुंध खनन किया जा रहा है। अप्रत्यक्ष रूप से कई प्रभावशाली इस व्यवसाय से जुड़ गए। शुरू में यहां से चेजा पत्थर के 700 से 800 ट्रक रोड़ी के यहां से गुडगांव व हरियाणा जाने लगे। वहां इसकी रोड़ी तैयारी होती थी, लेकिन अब हरियाणा के लोगों ने यहां आकर क्रशर लगा लिए और रोड़ी बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद हरियाणा से दिल्ली में रोड़ी की आपूर्ति शुरू होने के बाद इस क्षेत्र की रोड़ी की मांग कम होने से अभी भी यहां से 300 से 400 ट्रक प्रतिदिन गुडगांव व दिल्ली जा रहे हैं। (नि.सं.)