
देवगांव(जयपुर)। एक तरफ सरकार जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को मकान उपलब्ध कराने के लिए जोर-शोर से योजना चला रही है। दूसरी तरफ ग्राम पंचायत मुण्डली के झींझा गांव में सांभरिया-देवगांव सड़क मार्ग पर 1985 से 1990 के बीच निर्माण कराए गए इंदिरा गांधी आवास योजना के 40 मकान जिम्मेदारों की ओर से पट्टे तथा अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देने से खंडहर का रूप ले चुके हैं। ऐसे में सरकार के लाखों रुपए पर पानी फिर रहा है।
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सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन समय में झींझा गांव देवगांव ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता था। उस समय जनप्रतिनिधियों ने गांव में 50 इंदिरा गांधी आवास बनवाए और 10 घरों के पट्टे भी साथ की साथ ही वितरित हो गए लेकिन शेष 40 परिवारों को उस समय पट्टे नहीं मिलने से यह भवन आज भी खाली अवस्था में खंडर हो रहे हैं। उस समय जिन लोगों को यह भवन आवंटित हुए उन लोगों ने भी रुचि नहीं दिखाई तथा बने हुए भवनों के दरवाजे, खिड़कियां भी समाजकंटक खोल कर ले गए। ऐसे में ये भवन वीरान दिखाई दे रहे है।
सुविधाओं से युक्त बने थे भवन
पूर्व सरपंच राम प्रसाद सुलानिया बताते हैं कि उस समय काफी जद्दोजहद के बाद इन भवन की स्वीकृति तथा इनका निर्माण करवाया गया था भवनों में कमरे, रसोई तथा शौचालय-स्नानघर का भी निर्माण करवाया गया था, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी से सरकार के लाखों रुपयों पर पानी फिर गया।
समाजकंटकों का जमावड़ा
इन्दिरा आवास के सुनसान रहने से रात के समय सन्नाटा छाया रहता है। ऐसे में यहां पर समाजकंटक शराब आदि पीते है। मजे की बात तो यह है कि लोग इन भवनों के दरवाजे, खिड़कियां खोलकर ले गए।
पट्टे मिले तो हो सकता है कायाकल्प
मुण्डली ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि सीताराम मीणा का कहना है कि इन भवनों से संबंधित सभी दस्तावेज पंचायत समिति में जमा हो गए थे, वर्तमान समय में इन भवनों से संबंधित कोई भी जानकारी ग्राम पंचायत के पास मौजूद नहीं है पंचायत समिति स्तर के अधिकारी चाहे तो उस समय के फाइलें निकालकर इन भवनों की जानकारी जुटा सकते हैं जिससे लोगों को पट्टे मिले तथा पट्टे मिलने से निश्चित रूप से इन भवनों का कायाकल्प सकता है।
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गंदगी का छाया आलम
भवनों के कई वर्षों से खाली रहने से गंदगी फैली हुई है। यदि उनमें लोग निवास करने लग जाए तो उनकी हालत सुधर सकती है। जानकार सूत्रों ने बताया कि भवन में कई लोग रात में अंधेरे का फायदा उठाकर गंदगी आदि कर जाते है। ऐसे में इन भवनों के हालात खराब पड़े है।
यह था सरकार का उद्देश्य
इंदिरा आवास योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, मुक्त बंधुआ मजदूरों के सदस्यों को मकानों के निर्माण में मदद करना तथा गैर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के गरीबी रेखा से नीचे के ग्रामीण लोगों को अनुदान मुहैया कराकर मदद करना है।
इनका कहना है
यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। आज ही मामले से संबंधित सभी जानकारी लेकर ही मैकुछ कह सकती हूं।
नीरू मीना, विकास अधिकारी, बस्सी
पहले भी कई बार इस मामले को जिला परिषद की बैठकों में उठाया है। आगामी बैठक में इस मामले को और जोर-शोर से इस मामले को उठाऊंगा, जिससे तत्काल लोगों को मदद मिल सके।
रामजीलाल मीना, जिला परिषद सदस्य, जयपुर
सरकार की ओर से इन भवनों के पट्टे जारी किए जाए तो यह सुनसान बस्ती फिर से लोगों से भर सकती है।
जयराम कुदाल्या, सामाजिक कार्यकर्ता
Published on:
29 Nov 2017 06:28 pm
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