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कभी रजवाड़ों की शान थी अब लगने लगी हैं डरावनी

खंडहरों के बन गए डरावने कहानी—किस्से

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बस्सी

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Arun Sharma

Dec 23, 2019

कभी रजवाड़ों की शान थी अब लगने लगी हैं डरावनी

प्रतिकात्मक फोटो

Jaipur विराटनगर/पावटा. रजवाड़ों के समय बनाई गई खूबसूरत हवेलियां अब डरावनी लगने लगी हैं। इन खंडहर हवेलियों के आसपास भी गुजरने में डर लगता है। इनकी कई डरावनी कहानियां भी चर्चित होने लगी हैं। वहीं प्रशासन की उपेक्षा के चलते आबादी के बीच में मौत के खंडहर खड़े हैं। विराटनगर, पावटा और अमरसर में सालों पुराने दो-तीनमंजिल की हवेलियां जर्जर हो चुकी है। कभी भी गिर सकती है। जो बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं। प्रशासन वाकिफ होते हुए भी इस मामले में किसी तरह की गंभीरता नहीं दिखा रहा। हवेलियों की नींव से पत्थर निकल आए हैं और दीवारों व छत से चूना भरभराकर गिर रहा है। दीवारों से पत्थर भी गिर रहे हैं। एक समय था, जब यह हवेलियां कस्बे का सौंदर्य बढ़ाती थी और आकर्षण का केंद्र होती थी, लेकिन रख-रखाव के अभाव में यह हवेलियां जर्जर होती गई। कई हवेलियों में मालिक के वहां नहीं रहने के चलते भी यह खंडहर हो गई है। पास खेलने वाले बच्चों में डर बना रहता है।

यहां मौजूद हैं खतरे की हवेली
पावटा कस्बे में गणेश मार्केट, बहरोडियों के मोहल्ले के आसपास सैकड़ों की आबादी बसी हुई है। पास से रास्ता भी गुजर रहा है। यहां आबादी के बीच तीन-चार हवेलियां ऐसी हैं, जो सालों पुरानी है। सभी हवेलियां का दो मंजिला भवन है। जो काफी जर्जर हो चुके हैं, जिनके पास से गुजरते डर लगता है। विराटनगर में भी आधा दर्जन सालों पुरानी हवेलियां आबादी के बीच में खड़ी है। कस्बे के छीपीयों का मोहल्ला, लापटनियों के मोहल्ले के पास, नगरपालिका के पास समेत आधा दर्जन हवेलियां है, जो गिरने के कगार पर है। इधर, शाहपुरा तहसील के अमरसर में डेढ़ दर्जन से अधिक हवेलियां है। जिनसे पत्थर गिरते रहते हैं।
जहरीले जीव पल रहे
खंडहर हुए भवनों में जहरीले जीव भी पल रहे हंै। बारिश के मौसम में लोगों का डर और बढ़ जाता है। इसके अलावा इन पुराने और जर्जर भवनों में लोगों की ओर से कूड़ा कचरा भी डाला जा रहा है। हवेलियों में जहरीले जीव कभी भी लोगों के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं।

नहीं सुन रहा ग्राम पंचायत प्रशासन
इधर, पावटा ग्राम पंचायत व प्रशासन को अवगत कराए जाने के बावजूद भी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही। कस्बे के वार्ड नम्बर दस में रामलीला मैदान के पास पटवार घर के पीछे एक परिवार की सालों पुरानी जर्जर हवेली है। जो गिरने के कगार पर है। लोगों ने हवेलियों को गिराने के लिए मुख्यमंत्री एवं कलक्टर को भी पत्र लिखा है।