कोटपूतली (जयपुर)। यहां राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल में पांच शल्य चिकित्सक (सर्जन) होने के बाद भी रोगियों के जरूरी ऑपरेशन नहीं हो पा रहे। ऑपरेशन के लिए चिकित्सक ऑपरेशन के लिए मरीजों को किसी ना किसी बहाने टाल कर उन्हे जयपुर रैफर कर रहे हैं। शल्य चिकित्सक राज्य सरकार की नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने की मंशा पर तो पानी फेर ही रहे है। चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना को भी ठेंगा दिखा रहे है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है अस्पताल में 5 शल्य चिकित्सकों के अलावा पांच ही अनिश्चेतन चिकित्सक (एनएस्थेटिस्ट ) है। ऑपरेशन नहीं होने से इनका भी कोई उपयोग नहीं हो रहा है। मई में केवल 51 ऑपरेशन हुए हैं, अस्पताल में ऑपरेशन नहीं होने से मरीजों को यहां से जयपुर जाना पड़ता है। अधिकांश एनस्थेटिस्ट उपस्थिति दर्ज करा कर निजी कार्यों से अस्पताल से नदारद हो जाते है। आइसीयू संचालित नहीं होने के बावजूद एक एनस्थेटिस्ट की ड्यूटी वहां लगी हुई है।
दो हजार से अधिक का आउट डोर….
अस्पताल में इन दिनों दो हजार से अधिक का आउट डोर चल रहा है। आसपास बड़ी संख्या में रोगी उपचार के लिए आते हैं। मौसमी बीमारियों के समय अस्पताल का आउटडोर 2500 से 3000 तक हो जाता है। अस्पताल में मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना के तहत सभी तरह की जांचों की नि:शुल्क सुविधा, डिजिटल एक्स-रे मशीन व सभी सुविधाओं युक्त ऑपरेशन थिएटर होने के बावजूद भी जिला अस्पताल में रोगियों के सामान्य ऑपेरशन भी नहीं होना लोगों को हैरत में डाल रहा है।

लेप्रोस्कोप का नहीं हो रहा उपयोग….
वर्तमान में पित्ताशय व किडनी में पथरी व गर्भाशाय में गांठ के कई ऑपरेशन लेप्रोस्कोप से होते हैं। लेकिन अस्पताल में लेप्रोस्कोप होने के बावजूद इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। चिकित्सकों ने इसमें तकनीकी कमी बताकर इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। अस्पताल में लेप्रोस्कोप सर्जन इसे दुरुस्त कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। यही कारण है कि अस्पताल में दूरबीन से एक भी सर्जरी नहीं हो रही। यहां अस्थि रोग विभाग में भी ऑपरेशन नहीं हो रहे है। दुर्घटना में घायल के फ्रैक्चर होने उनका सामान्य ऑपरेशन यहां करने के बजाय उन्हें भी जयपुर रेफर कर दिया जाता है। कई लोग निजी अस्पतालों में उपचार करवाने के लिए भर्ती होते हैं।
स्वास्थ्य निदेशक के आदेशों पर नहीं हो रहा असर….
यहां के अस्पताल के अलावा सीएचसी व पीएचसी में आउटडोर के समय चिकित्सकों के नहीं टिकने की भी प्रमुख समस्या रहती है। चिकित्सक ड्यूटी के समय ही नदारद होकर अस्पताल परिसर में घर पर और आसपास की दवाइयों की दुकानों पर फीस वसूल कर रोगियों की जांच करते हैं। गत दिनों स्वास्थ्य निदेशक ने परिपत्र जारी कर चिकित्सकों को आउटडोर के समय अस्पताल में मौजूद रहने रहने के लिए पाबंद किया था। संस्था प्रभरियों को बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पाबंद किया था। लेकिन आउटडोर से नदारद रहने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है।

फैक्ट फाइल….
-2500 से 3000 अस्पताल का आउटडोर
-51 ऑपरेशन हुए मई माह में
-5 से 7 ऑपरेशन रोजाना करते थे कुछ माह पहले तक दो सर्जन
इनका कहना है….
अस्पताल में पांच पांच सर्जन व एनस्थेटिस्ट होने के बाद भी ऑपरेशन कम हो रहे हैं। शल्य चिकित्सकों को पूर्व में भी ऑपेरशन की संख्या में बढ़ोतरी के लिए कहा गया था। इनको अब ऑपरेशन बढ़ाने के लिए इनको लिखित में पाबंद किया जाएगा।
—डॉ.सुमन यादव, पीएमओ, बीडीएम अस्पताल कोटपूतली