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बस्सी

मौत के मुंह में जा रहा है लंपी पीडि़त गौवंश

खुले में गौवंश मरने से संक्रमण का बढ़ रहा है खतरा

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बस्सी @ पत्रिका. उपखण्ड इलाके सहित आसपास के इलाके में लंपी बीमारी से पीडि़त गोवंश अब तेजी से दम तोड़ता जा रहा है, वहीं मृत गोवंश का खुले में पड़ा रहने से स्वस्थ्य पशुओं में भी संक्रमण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। लम्पी वायरस से पीडि़त जो गोवंश मौत का ग्रास बन रहे हैं , उनको न तो पशु चिकित्सा विभाग ना ही उपखण्ड प्रशासन और ना ही पंचायत प्रशासन जमीन में दफना रहा है।

लंपी वायरस अब धीरे – धीरे महामारी का रूप धारण कर चुका है। पशुपालन विभाग भी इन लंपी पीडि़त गोवंशों का इलाज करने में नाकाम साबित हो रहा है। हालांकि पालतू गोवंश का इलाज तो लोग कभी चिकित्सक को घर बुला कर तो कभी पशुचिकित्सालय ले जा कर इलाज करा रहे हैं, लेकिन मुश्किल हालात से तो आवारा गोवंश गुजर रहा है।

इलाज कर दिखावा अधिक

गोवंश सेवा से जुडे कई संगठन व लोग आवारा गोवंश का इलाज कराने में इतनी रुचि नहीं ले रहे हैं, जितना वे प्रचार व प्रसार कर रहे हैं। यदि गोवंश को बचाने में गोसेवा से जुड़े संगठन नजदीकी पशु चिकित्सकों एवं पशु चिकितसाकर्मियों को बुला कर उनका इलाज करवाते तो आज आवारा गोवंश इस हालात से नहीं गुजरता। हालात यह है कि संक्रमण की वजह से हर 10 गोवंश में से 7- 8 गोवंश लंपी से पीडि़त है। कई गोवंश सेवा संगठन एक गोवंश का इलाज करवाते हैं और वाहवाही लूटने के लिए सोशल मीडिया पर उसका फोटो या वीडियो वायरल करते हैं,।

यदि जमीनी स्तर पर इन आवारा गोवंश का इलाज होता तो पीडि़त कई गोवंशों में से रिकवर भी होते, लेकिन हालात यह है कि आवारा गोवंश में लंपी का खतरा दिनों – दिन बढ़ता ही जा रहा है। अब तो हर सो- दो सौ मीटर पर एक मृत गोवंश मिल जाएगा। अखिल भारतीय मीणा संघ के प्रदेश सचिव सोहन सिंह मीना ने बताया कि उनके गांव धामस्या में दर्जनों गोवंश लंपी से मौत का ग्रास बन चुका है। लंपी पीडि़त गोवंश की कोई सुध नहीं ले रहा है। जगह – जगह मृत गोंवश से स्वस्थ्य गोवंश में संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ता जा रहा है।

आंकड़े में भी है घालमेलइधर पशु चिकित्सा विभाग के हर नोडल केन्द्र प्रभारी प्रतिदिन 2 बजे लंपी पीडि़त एवं लंपी वायरस से मृत गोवंश की रिपोर्ट तैयार कर अपने उच्च अधिकारियों को भेज रहे हैं, लेकिन आंकड़े में भी घालमेल लग रहा है। पशुचिकित्सा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी पालतू गोवंश की रिपोर्ट तो तैयार कर रहे हैं, लेकिन आवारा गोवंश का कोई हिसाब किताब ही नहीं है।