
दूल्हे ने दहेज में मांगा कुछ ऐसा कि सब देखते रह गए,शादी की रही चर्चा
जमवारामगढ़ (jaipur). शादी में अगर सबसे अधिक किसी चीज की चर्चा होती है तो वह दहेज। दहेज कितना दिया, कितना लिया, इसको समाज प्रतिष्ठा से जोड़कर देखता है। दहेज को लेकर कई बार रिश्ते बिगड़ जाते है। यहां तक की महिला उत्पीडऩ के दर्ज होने वाले मुकदमों में दहेज को प्रमुख कारण माना जाता है। ऐसे में कोई समृद्ध परिवार बिना दहेज की शादी करें तो अपने आप में सराहनीय व अनुकरणीय है।
एक रुपए व नारियल लेकर की शादी...
ऐसे ही मामला यहां देखने को मिला है। कस्बे के रैगर मोहल्ला निवासी नाथू ठेकेदार के सुपौत्र मनमोहन वर्मा ने एक रुपए व नारियल लेकर दौसा निवासी पूजा वर्मा से 11 नवम्बर को शादी की है। वधु पूजा वर्मा के पिता सुखदेव फुलवारियां मजदूरी करते है, जबकि मां सुशीला देवी गृहणी है।
बिना दहेज की शादी से काफी खुश...
दूल्हे मनमोहन के माता-पिता सुशीला देवी व रामदयाल भी बिना दहेज की शादी से काफी खुश है। मनमोहन वर्मा ने बताया कि दहेज के चक्कर में कई युवतियों की जिंदगी नरक बन चुकी है। दहेज एक झूठी शान है। उन्होंने युवाओं से बिना दहेज की शादी करने का अनुरोध किया।
विश्वास दिलाया तब शादी के लिए तैयार हुए...
वधु पूजा ने बताया कि पहले तो पिताजी ने समृद्ध परिवार में शादी करने से मना कर दिया था, लेकिन पति मनमोहन ने बिना दहेज की शादी करने व जीवन में कभी दहेज संबंधी कोई बात नहीं करने का स्वयं व पूरे परिवार की ओर से विश्वास दिलाया। तब जाकर शादी के लिए तैयार हुए। मंगलवार को आशीर्वाद समारोह में भी बिना दहेज की शादी की चर्चा रही।
समाज के सामने मिसाल पेश की...
वहीं चंदवाजी के पास ग्राम रुंडल निवासी तथा बीएसएफ में सहायक उपनिरीक्षक (मिनिस्ट्रियल) पद पर कार्यरत कपिल देव पुत्र हेतराम बुनकर ने घाटा जलधारी निवासी रामलाल घुघरवाल की पुत्री पिंकी से शगुन बतौर एक रुपए में शादी कर समाज के सामने सकारात्मक मिसाल पेश की है। बिना दहेज के शादी करके कपिल ने समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है, जिसकी दिनभर क्षेत्र में चर्चा रही।
पहल समाज के युवाओं को प्रेरणा देगी...
अखिल भारतीय बलाई महासभा दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में यह शादी संपन्न हुई। मंगल चंद चांदोलिया ने बताया कि कपिल देव द्वारा की गई यह पहल समाज के युवाओं को प्रेरणा देगी तथा बुराई के रूप में व्याप्त दहेज प्रथा को समाप्त करने में सहायक सिद्ध होगी। इससे अन्य समाज के युवा भी प्रेरणा लेकर समाज को गति प्रदान कर सकते हैं।
बेटियों को सम्मान मिले...
अब वह समय आ गया है जब समाज से दहेज प्रथा के उन्मूलन के लिए सभ्य समाज के लोगों को आगे आना होगा। दहेज ना लेने का उनका एक मात्र उद्देश्य यही है कि बेटियों को उनका वास्तविक सम्मान मिले जिससे समाज की बेटियों को आगे बढऩे के पूरे अवसर मिले।
Published on:
14 Nov 2019 04:47 pm
बड़ी खबरें
View Allबस्सी
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
