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स्टेरॉयड से रोग प्रतिरोधक क्षमता और बुढापे में जोड़ो की हड्डियों खुलने का खतरा

Seasonal diseases : मौसमी बीमारियों की मार, झोलाझाप कर रहे स्वास्थ्य से खिलवाड़ (Due to seasonal diseases, messing with health) , ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक सक्रिय, रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ रहा असर

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ऐसी दवाओं के अधिक सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर और बुढापे में जोड़ो की हड्डियों खुलने का खतरा

ऐसी दवाओं के अधिक सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर और बुढापे में जोड़ो की हड्डियों खुलने का खतरा

आंतेला. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमा आमजन को बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के दावे कर रहा है, लेकिन विभागीय अनदेखी से इलाके की हर गली मोहल्ले में बिना डिग्री झोलाछाप डॉक्टरों का जाल फैला हुआ है, जो विभिन्न पेथियों से इलाज के नाम से लोगों के जीवन से खेल रहे हैं। ये बिना डिग्री झोलाछाप डॉक्टर मरीजों को स्टेरॉयड Steroid दवा दे रहे हैं। इससे मरीज एक बार तो ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ समय बाद बीमारी दोबारा से घर कर लेती है। सस्ते के फेर में लोग झोलाझाप से दवा खरीद लेते हैं, इन दवाओं के लम्बे समय तक सेवक से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता Effect on immunity पर खासा असर पड़ता है और मर्ज लाइलाज हो जाता है।

बेरोकटोक बिक रही स्टेरॉयड दवा

इस श्रेणी के चार ब्रांड की दवाएं उपलब्ध है। इनमें बेकलामेथासोन, डेक्सामेथासोन, हाईड्रोकोटीजोन और प्रेडनीस्लोन दवाओं की चिकित्सक की बिना पर्ची के खुलेआम बिक्री हो रही है। इन दवाओं का उपयोग दमा, एलर्जी और संक्रमण से बचाव में किया जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य कई दवा जिसका चिकित्सक बहुत ही कम प्रयोग करते हैं, लेकिन विभागीय अनदेखी से इसका बड़ी मात्रा में दुरुपयोग हो रहा है।

सस्ते के झांसे में मरीज

झोलाछाप की सक्रियता अधिकांशत: ग्रामीण क्षेत्र में है। गांवों के मरीजों को सस्ते उपचार और दवाओं का झांसा देकर झोलाछाप रोक लेते हैं। इन निजी दुकानों पर 30-40 रुपए रोज में स्टेरॉयड की दवाएं दी जाती है। इससे मरीज दो या तीन दिन में ठीक हो जाता है। इससे यहां मरीजों की कतार लगी रहती है। हालांकि लम्बे समय तक सेवन से व्यक्ति आदी हो जाता है। अचानक छोडऩे पर लीवर डेमेज जैसे दुष्परिष्णाम सामने आते हैं।

चार दर्जन से अधिक झोलाछाप सक्रिय

विराटनगर ब्लॉक में करीब चार दर्जन से अधिक बिना डिग्री झोलाछाप और नीम-हकीम सक्रिय है। कस्बे सहित क्षेत्र के ग्राम बजरंगपुरा, ढाणीगैसकान, किशनपुरा, लुहाकना कला, भाबरू, जयसिंहपुरा, छीतोली, बागावास अहिरान सहित कई गांव-ढाणियों में बिना डिग्री के झोलाछाप डॉक्टर की दुकानें संचालित है। मजे की बात तो यह है कि गांव-गांव में चिकित्सा विभाग की सीएचसी/ पीएचसी व सब सेन्टर होने के बावजूद झोलाछाप की दुकानों पर सुबह से लेकर शाम तक मरीजों की कतार लगी रहती है। मौसमी बीमारियों में झोलाछाप चांदी कूट रहे हैं।

बुढ़ापे में ज्यादा तकलीफ

लम्बे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त सी हो जाने से जुकाम-बुखार जैसी छोटी बीमारियां तो हमेशा जकड़े रहती है। शरीर की हड्डियों कमजोर हो जाती है। बुढापे में जोड़ो की हड्डी Joint bones in old age का अपने आप खुलने की सम्भावना बढ़ जाती है। (नि.सं.)

केस-1

स्थानीय निवासी गीता देवी श्वास संबंधी तकलीफ होने पर कस्बे में झोलाछाप से इलाज कराया। करीब 50-60 रुपए में तीन दिन की दवा में पूरा आराम आ गया। कुछ दिन बाद फिर तकलीफ होने पर दवा लेनी पड़ी। परेशान होकर जिला अलवर के बहरोड़ स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सक का इलाज जारी है। जिससे काफी आराम मिला है।

केस-2

कस्बा निवासी बनवारी लाल दमा से पीडि़त था। गांव में झोलाछाप से दवा लेने पर आराम आया, लेकिन दो माह बाद दवा बंद की तो स्थिति पहले से बदतर हो गई। निजी चिकित्सकों को भी दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब स्थानीय अस्पताल के चिकित्सक का उपचार जारी है।

इनका कहना है कि
क्षेत्र के दूर-दराज गांवों में करीब तीन दर्जन से अधिक झोलाछाप सक्रिय है। अप्रशिक्षित नीम हकीम मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग गम्भीर है। प्रभावी कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।

डॉ. सुनील कुमार सिवोदिया, बीसीएमएचओ, विराटनगर


स्टेरॉयड दवा का लगातार उपयोग करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। दमा, एलर्जी जैसे रोग में इस दवा के ज्यादा सेवन से शरीर में सूजन आ जाती है। जागरुकता की कमी से ग्रामीण क्षेत्र में यह समस्या बढ़ रही है।

डॉ. देवेन्द्र शर्मा, फिजीशियन, सीएचसी पावटा