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बस्सी / दूधली @ पत्रिका. महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में मजदूरी करने वाली महिला श्रमिक व महिला मेट की मनरेगा योजना की मजदूरी की राशि उनके बैंक खातों में आने से गरीब महिला श्रमिकों की तकदीर बदलती जा रही है। जिन महिलाओं को छोटे – छोटे खर्चे के लिए अपने पति या परिजनों से राशि मांगनी पड़ रही थी, अब वे आत्म निर्भर होती जा रही है। ममहिला श्रमिकों को अब उनके पति या परिजनों का मुंह नहीं ताकना पड़ रहा है। श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान उनके बैंक खाते में आता है। इससे महिला श्रमिकों को रसोई का सामान, सब्जी, कपड़े, श्रंगार का सामान, मोबाइलों में रिचार्ज, घरों में पंखे, कूलर, फ्रीज समेत कई चीजें अपनी मर्जी से खरीद लेती है। छोटी से छोटी चीज के लिए उनको श्रमिकों का मुंह नहीं ताकना पड़ता है।
सीधी बैंक खातों में आती है राशि ….
प्रदेश में मनरेगा योजना की शुरूआत वर्ष 2005 में हुई थी, पहले तो इस योजना में श्रमिकों को ऑफ लाइन भुगतान होता था। उनके हाथों में नकद रशि आती थी, इससे यह राशि नकद दी जाती थी। ग्राम पंचायतों के बैंक खातों में आती थी, लेकिन गड़बड़ी के चलते सरकार ने मजदूरों की मजदूरी को उनके बैंक खातों में हस्तांरित करना शुरू कर दिया, इससे मजदूरी की राशि को सीधा मजदूरों के बैंक खातों में ही डालना शुरू कर दिया। इससे महिलाओ को एक फायदा यह हो गया जो भी महिला मनरेगा योजना में काम करने लगती उनका बैंक खाता भी खुल गया। महिलाएं मजदूरी कर अपने बैंक खातों में राशि भी जमा करने लग गई। घर में कोई काम हो या फिर कोई चीज खरीदनी होती तो वे अपनी मर्जी से खरीद लेती थी।
निर्माण से जुड़े कई विभागों में मिलता है कार्य….
मनरेगा योजना की जब शुरूआत हुई थी, तब श्रमिकों को मात्र ग्राम पंचायतों में ही मजदूरी मिला करती थी, लेकिन ज्यों – ज्यो यह योजना गरीबों की लाइफ लाइन बनती गई, इस योजना में सार्वजनिक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग सहित कई वे विभाग जिनमें निर्माण कार्य होता है, उनमें भी मजदूरों को इस योजना से काम मिलता गया।
गांवों से शहरों में पलायन रोकने में भी मददगार हुई योजना…
मनरेगा योजना से पहले गांव के गरीब महिला व पुरष श्रमिकों के पास रोजगार नहीं था। गांव का गरीब परिवार समेत रोजगार की तलाश में शहर में पलायन करने लग गया। लेकिन 2005 में योजना आने के बाद गांव के लोगों को गांव में ही मजदूरी मिलने लग गई और गांवों से शहरों की ओर हाेने वाला पलायन थम गया। (कासं )
इन महिला श्रमिकों की जुबानी…
ग्राम पंचायत दूधली के रोहिताशपुरा निवासी प्रभाती देवी ने बताया कि मनरेगा योजना में वह कई वर्षों से काम कर रही है।मनरेगा योजना से मिलने वाली मजदूरी की राशि से उन्होंने अपने घर में टीवी, कूलर खरीद लिया है। वह इस राशि से रसोई का खर्च चलाती है। अपनी मर्जी से कपड़े भी खरीद लेती है।
– महिला श्रमिक उषा देवी ने बताया कि मनरेगा योजना में काम करने से मजदूरी की जो राशि उनके बैंक खाते में आती है, उससे उनका घर खर्च चल जाता है।
– महिला श्रमिक मन्ना देवी ने बताया कि मनरेगा योजना उनके लिए रामबाण साबित हो रही है। इस मजदूरी के रुपए से वह अपने परिवार के लिए अनाज व पशुओं के लिए चारा खरीद लेती है। घर का खर्च भी चल जाता है।
– मनभर देवी ने बताया कि मनरेगा योजना की मजदूरी में आने वाली राशि वे वे अब अपने बच्चाें के लिए किताबें, उनके कपड़े व घर का खर्च चलाती है। किसी से कर्ज लेने की जरूररत नहीं पड़ती है।
– सीता देवी ने बताया कि मनरेगा योजना में काम कर उन्होंने घर खर्च तो चलाया ही है साथ ही अपने लिए सिलाई मशीन खरीदी है। वह सिलाई मशीन से काम कर रुपए कमाती है, इससे घर में फ्रीज, कूलर व अन्य कई सामान खरीद लिया है।
– गुल्ली देवी ने बताया कि वह कई वर्षों से मजरेगा योजना में काम कर रही है। उसने अपने घर में फ्रीज, बर्तन, कपड़े सहित कई प्रकार का जरूरी सामान खरीद लिया है।