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यहां बुजुर्गों व युवाओं की टोली ने जीवित की होली की पुरानी परंपरा, देखिये धमाल….

ग्रामीण रात में ढप, चंग बजाकर व स्वांग रच करते हैं धमाल कई गांवों में फिर से लौटने लगी होली की पुरानी परम्पराएं

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शाहपुरा (जयपुर)। आधुनिकता एवं सोशल मीडिया के इस युग में होली सहित विभिन्न त्यौहारों की परम्पराएं व रौनक फीकी पड़ती जा रही है। गांवों में होली से पहले कई दिनों तक रात को चौपाल पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक खेल व धमाल भी लोग भूल से गए हैं।

हालांकि कुछ गांवों में फिर से होली के त्यौहारों की रौनक लौटने लगी है। क्षेत्र के ग्राम खोरी, राडावास सहित कुछ गांवों में कई सालों पहले भूले बिसराए होली के धमाल को बुजुर्ग व युवाओं की टोली पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। जिससे यहां लेकिन कुछ गांवों में अब फिर से त्यौहारों की रौनक लौटने लगी है।

खोरी गांव में तो रोज देर रात तक ग्रामीण लोग समूह बनाकर ढपव चंग बजाकर होली के धमाल का आनंद लेते हैं। यहां बुजुर्गों एवं युवाओं की टोली गांव के सहकारी समिति के पास चौपाल पर रोजाना रात को चंग की थाप पर होली के धमाल करना शुरू करते हैं जो देर रात तक जारी रहता है। बुजुर्गों के साथ इसमें गांव के युवा भी शामिल होते हैं।

यहां के शिक्षाविद अमरचंद चौहान व सूणाराम कुम्हार ने बताया कि उनके समय में होली के धमाल होलिका रोपण के साथ ही शुरू हो जाता था, लेकिन अब आधुनिकता एवं तकनीकी के बढ़ते प्रभाव के कारण त्यौहारों की रौनक भी सिमटकर रह गई। पहले जहां होली पर युवाओं का समूह पूरी पूरी रात लुकाछिपी एवं होली के धमाल करते थे। चंग बजाने की भी होड़ लगी रहती थी लेकिन आज मोबाइल का जमाना आने से पुराने वाद्ययंत्र भी लुप्त से हो गए है और कहीं है तो किसी को बजाना नहीं आता है।

दो साल कोरोना ने लगाए ब्रेक, इस बार फिर शुरू हुआ धमाल


अमरचंद चौहान का कहना है कि उन्होंने होली पर धमाल की परम्परा को जीवित रखने के लिए करीब चार साल पहले जयपुर से चंग एवं मंजीरें मंगवाए और अपने पुराने साथियों व युवाओं की टीम के साथ होली के गीत गाकर युवाओं को इसके लिए प्रेरित करना शुरू किया। इसी बीच कोरोना महामारी ने ब्रेक लगा दिए। जिससे दो साल तक फिर से धमाल को बंद करना पड़ा। अब कोरोना धीमा पडऩे से फिर से रोज रात को धमाल कार्यक्रम शुरू किया गया है।

युवाओं की टोली भी लगाती है टेर


यहां के निवासी पूरणमल कुम्हार, गजानंद बुनकर, कालूराम, मामचंद, पृथ्वी, मुकेश मीणा, भवानी, संदीप योगी, पंकज, महेंद्र, सुरेश, सुनिल आदि युवा भी धमाल में बढ़चढक़र उत्साह के साथ हिस्सा लेकर टेर में टेर लगाकर होली के गीत गाते है और नाचते है। धमाल कार्यक्रम देर रात तक चलता है।

धर्मपाल यादव ने बताया कि खोरी में धमाल का कार्यक्रम सडक़ से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। रोजाना गुजरने वाले कई वाहन चालक यहां रूककर मनोरंजन का आंनद लेते हैं। इसके अलावा राडावास व कांट सहित अन्य गांवों में भी इस तरह के कार्यक्रम होने लगे हैं।