6 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

icon

प्रोफाइल

पंडित दीनदयाल उपाध्याय दिव्यांग योजना: श्रेणी बढ़ाकर गाइड लाइन जारी करना भूली सरकार

सरकार ने दिव्यांगों की श्रेणी तो 7 से बढ़ाकर 21 कर दी, लेकिन नई श्रेणी के दिव्यांगों के प्रमाणीकरण के संबंध में गाइड लाइन जारी करना ही भूल गई।

3 min read
Google source verification

बस्सी

image

Vinod Sharma

Dec 10, 2017

Pandit Deendayal Upadhyay Divyang Yojana

शाहपुरा (जयपुर)। सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए दिव्यांगों की श्रेणी तो 7 से बढ़ाकर 21 कर दी, लेकिन नई श्रेणी के दिव्यांगों के प्रमाणीकरण के संबंध में गाइड लाइन जारी करना ही भूल गई। इससे नए जोड़े गए 14 प्रकार के दिव्यांगों को शिविरों में धक्के खाने पड़ रहे हैं। प्रमाण पत्र की उम्मीद में शिविरों में पहुंचने वाले इन दिव्यांगों को गाइड लाइन नहीं आने का टका सा जवाब देकर टरकाया जा रहा है।सरकार की ओर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय दिव्यांग योजना के तहत प्रदेशभर में शिविर लगाकर दिव्यांगों का चिह्नीकरण व प्रमाणीकरण किया जा रहा है। सरकार ने पहले 7 तरह के दिव्यांगों का ही चिन्हीकरण कर प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। बाद में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर 21 कर दी गई, लेकिन नई श्रेणी के 14 प्रकार के दिव्यांगों के संबंध में कोई गाइड लाइन जारी नहीं करने से शिविरों में इनके प्रमाण पत्र नहीं बनाए जा रहे हैं। इससे नई श्रेणी के दिव्यांग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

यह भी पढ़े: एसडीएम कोर्ट में नई व्यवस्था लागू,अब हर मामले की सुनवाई हर माह
http://bit.ly/2BpxKC1

14 प्रकार की नई श्रेणी में चिहिृन्त दिव्यांग-
1122 शाहपुरा ब्लॉक
800 कोटपूतली ब्लॉक
932 विराटनगर ब्लॉक

यह भी पढ़े: नि:शुल्क दवा योजना: दवाओं का नाम मालूम है, कंटेट नहीं, मरीज छोड़ दवा बांट रहे नर्सिंगकर्मी

2854 दिव्यांग को प्रमाण पत्र का इंतजार
हाल ही आयोजित शिविरों में शाहपुरा, कोटपूतली व विराटनगर ब्लॉक में नई श्रेणी के कुल 2854 दिव्यांग चिह्नित किए गए हैं। इनको प्रमाणीकरण के साथ प्रमाणपत्र का इंतजार है। शाहपुरा ब्लॉक में शिविर के दौरान कुल 4116 दिव्यांगों का रजिस्ट्रेशन किया गया था। पहले चरण में सभी दिव्यांगों का चिह्नीकरण किया। दूसरे चरण में प्रमाणीकरण और सर्टिफिकेट देने का कार्य जारी है। इनमें शामिल नई श्रेणी के 01 हजार 122 दिव्यांगों को दूसरे चरण में शामिल नहीं किया गया।

यह भी पढ़े:गरीबों के गेहूं पर डीलर की कुंडली, एक माह से 60 परिवारों को नहीं दिया गेहूं

इनके नहीं बन रहे प्रमाण पत्र-
थैलेसीमिया : खून में हीमोग्लोबीन की विकृति होना। खून व मीमोग्लोबीन की कमी।
सिकिल सेल डिजिज : शरीर में खून की अधिक कमी होना। खून की कमी से शरीर के अंग खराब होना।
मल्टीपल स्कलेरोसिस : यह बीमारी मस्तिष्क और मेरुरज्जु की विकृति है। बहुत से मरीजों में लकवा के विभिन्न चरणों के लक्षण दिखाई देते है। इसमें एक या एक से अधिक अंगों हाथ, पैरों की दुर्बलता।
पार्किसंस रोग : हाथ-पांव मांसपेशियों में जकडऩ, तंत्रिका तंत्र प्रणाली संबंधी कठिनाई। इसमें व्यक्ति की कमर झुक जाती है और हाथ लटके हुए रहते हैं। छोटे-छोटे कदम भरकर पीडि़त चलता है।
बौद्धिक नि:शक्तता : अधिक मानसिक विकलांग व्यक्ति को तो सरकार कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देती है, लेकिन देश में लाखों ऐसे लोग है जो कम मानसिक विकलांगता रोग के शिकार है।

यह भी पढ़े:अस्पतालों की एक्स-रे मशीनें कर रही रेडियोग्राफरों का इंतजार

हीमोफिलिया : चोट लगने पर अधिक खून बहना। जिससे मौत होने का भी खतरा रहता है। महिला से पुरुष में यह बीमारी आती है।
कुष्ठ रोग : हाथ, पैर या अंगुलियों में विकृति, शरीर की त्वचा पर रंगहीन धब्बे। हाथ, पैर या अंगुलियों का सुन्न होना।
बौनापन : चार फीट 10 इंच (147 सेंटीमीटर) तक की हाइट से कम होना।
सेरेब्रल पाल्सी : गोद में लेते समय, कपड़े पहनाते समय, नहलाते समय बच्चे का शरीर अकड़ जाना। बालक में एकाग्रता की कमी। मुंह खुला रहना व लार गिरना आदि।

यह भी पढ़े:ऐसा क्या हुआ की पिता ने बेटी को जंजीर से बांध दिया

मांशपेशी दुर्विकार : मांशपेशियों का कमजोर होना, विकृत होना, पंजों के बल चलना, दौडऩे-कूदने में परेशानी होना।
क्रोनिक न्यूरोलोजिकल कंडीशंस : मस्तिष्क और स्पाइनल कोड में असंतुलन होना।
स्पेसिफिक लर्निंग डिसएबिलिटी : बोलने, समझने, श्रुत लेखन, वर्तनी, लेखन, पढऩे में समस्या होना। साधारण जोड़, बाकी, गुणा व भाग करने में भी कठिनाई होना।
मल्टीपल स्कलेरोसिस : व्यक्ति के दिमाग एवं रीढ़ की हड्डी के समन्वय में परेशानी, बे्रन और रीढ़ की हड्डी में क्षति होना।
तेजाब हमला पीडि़त : तेजाब हमले से पीडि़त को भी निशक्तता में शामिल किया गया है।

यह भी पढ़े:नेशनल हाइवे 11 पर कार डिवाइडर कूदकर दूसरी कार से टकराई, महिला सहित दो की मौत, दो घायल

सर्टिफिकेट बने तो मिले लाभ-
सुखद दाम्पत्य विवाह अनुदान योजना : विवाह करने पर 25 हजार का अनुदान। पति-पत्नी दोनों नि:शक्त होने पर अनुदान 50 हजार।
नि:शक्त पेंशन योजना : नि:शक्त को 500 रुपए मासिक पेंशन।
आस्था योजना : एक परिवार में दो या दो से अधिक व्यक्तियों में 40 प्रतिशत से अधिक विकलांगता होने पर बीपीएल के समकक्ष सुविधा।
विश्वास योजना : व्यवसाय के लिए एक लाख रुपए तक का बैंक ऋण स्वीकृत होने पर 30 प्रतिशत अनुदान।

यह भी पढ़े:रामगढ़ बांध ने पानी के बिना खोया वैभव, अब मगरमच्छों और आमजन को खतरा

पालनहार योजना : दम्पती में से किसी एक के नि:शक्त होने पर बच्चों की पढ़ाई के लिए अधिकतम तीन बच्चों तक प्रति बालक प्रतिमाह एक हजार रुपए।
छात्रवृत्ति योजना : नि:शक्तजनों को पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति।
विशेष योग्यजन स्वरोजगार योजना : स्वरोजगार के लिए 5 लाख रुपए तक के ऋण पर 50 प्रतिशत तक अनुदान (अधिकतम 50 हजार।
कृत्रिम अंग उपकरण अनुदान योजना : स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता व अंग उपकरण खरीदने के लिए 10 हजार रुपए का अनुदान।