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बोर्ड परीक्षा में माइक्रो ऑब्जर्वर का काम करेंगे पटवारी और ग्राम सेवक

अब तक तो देखने में आया था कि प्रदेश के शिक्षक स्कूल में पढ़ाने के अतिरिक्त बतौर बीएलओ जनगणना, चुनाव के दौरान ड्यूटी सहित कई अन्य काम करते आए हैं लेकिन एेसा पहली बार होगा कि पटवारी और ग्राम सेवक बोर्ड परीक्षा में बतौर माइक्रो ऑब्जर्वर परीक्षा केंद्र की जिम्मेदारी संभालेंगे।

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बस्सी

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Rakhi Hajela

Mar 28, 2022

बोर्ड परीक्षा में माइक्रो ऑब्जर्वर का काम करेंगे पटवारी और ग्राम सेवक

बोर्ड परीक्षा में माइक्रो ऑब्जर्वर का काम करेंगे पटवारी और ग्राम सेवक


भीलवाड़ा जिला कलेक्टर के मनमाने आदेश
शिक्षकों में आक्रोश, आदेश वापस लिए जाने की मांग
जयपुर।
अब तक तो देखने में आया था कि प्रदेश के शिक्षक स्कूल में पढ़ाने के अतिरिक्त बतौर बीएलओ जनगणना, चुनाव के दौरान ड्यूटी सहित कई अन्य काम करते आए हैं लेकिन एेसा पहली बार होगा कि पटवारी और ग्राम सेवक बोर्ड परीक्षा में बतौर माइक्रो ऑब्जर्वर परीक्षा केंद्र की जिम्मेदारी संभालेंगे। जी हां, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित करवाई जा रही बोर्ड परीक्षा में माइक्रो ऑब्जर्वर का काम अब पटवारी और ग्राम सेवक करेंगे। यह आदेश जारी किए हैं भीलवाड़ा जिला कलेक्टर ने। आदेशों में तकरीबन १५० से अधिक पटवारी और ग्राम सेवकों की ड्यूटी वर्तमान में चल रही बोर्ड परीक्षा में माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में लगा दी गई है। जिसका अब शिक्षक संगठन विरोध कर रहे हैं।
जूनियर करेगा सीनियर की निगरानी
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सालों से बोर्ड परीक्षा का काम शिक्षकों के ही जिम्मे रहा है। विभाग में शिक्षकों की कमी भी नहीं है फिर भी जिला कलेक्टर ने एेसे आदेश जारी करते एक ग्राम सेवक को माइक्रो ऑब्र्जवर की जिम्मेदारी दी है। यानी उनके पास परीक्षा केंद्र की पूरी जिम्मेदारी होगी एेसे में संस्था प्रधान स्वत। इस दौरान उनके मातहत काम करेंगे। वह भी तब जबकि ग्राम सेवक प्रशासनिक अधिकारी नहीं है जबकि स्कूल के संस्था प्रधान का पद प्रशासनिक अधिकारी के समकक्ष होता है। इतना ही नहीं संस्था प्रधान ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष भी होते हैं जिसमें ग्राम सेवक व पटवारी बतौर सदस्य शामिल होते हैं। संस्था प्रधान और ग्राम सेवकों की ग्रेड पे में भी काफी अंतर है लेकिन भीलवाड़ा जिला कलेक्टर ने मनमाने आदेश जारी करते हुए ग्राम सेवकों को परीक्षा केंद्र पर माइक्रो ऑब्र्जवर का काम दिया है। इससे लगता है कि अब शिक्षकों की क्षमता पर उन्हें भरोसा नहीं रहा है। जबकि शिक्षक ना केवल स्कूल में पढ़ाने के साथ साथ अन्य जिम्मेदारियों का भी निर्वहन कर रहे हैं।
आदेश निरस्त किए जाने की मांग
राजस्थान प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष विपिन शर्मा ने मांग की है कि जिला कलेक्टर के इन मनमाने आदेशों को वापस लिया जाए और शिक्षकों को उनका कार्य करने दिया जाए।