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सरकारी नर्सरी में पौधों का टोटा, बाहर तीन गुना महंगे

...प्रकृति प्रेमियों पर मार : बस्सी रेंज की नर्सरी में मानसून के पहले माह में नहीं मिल रहे पौधे. - मजबूरी में निजी नर्सरियों का रुख कर रहे प्रकृति प्रेमी  

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बस्सी

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Arun Sharma

Jul 23, 2018

Plant News

सरकारी नर्सरी में पौधों का टोटा, बाहर तीन गुना महंगे

बस्सी जयपुर जिले सहित आसपास के इलाकों में मानसून सक्रिय होने लगा है। बारिश के मौसम में संस्थाओं, समूहों व आमजन सहित सभी में पौधे लगाने की चाह रहती है, लेकिन सरकारी नर्सरियों में मांग और पसंद के अनुरूप पेड़-पौधे उपलब्ध नहीं होने से प्रकृति प्रेमियों की जेब कटना शुरू हो गई है। अपनी पंसद के पौधों के लिए लोग निजी नर्सरियों की ओर रुख करने को मजबूर है। ऐसे में 2 से 4 फीट वाले जिन पौधों का मूल्य सरकारी नर्सरियों में 8 से 20 रुपए है, वहीं निजी नर्सरियां इनके 80 से 100 रुपए तक ले रही हैं। ऐसे में निजी नर्सरियां में पौधे तीन गुना महंगे होने से लोगों को निराशा हाथ लग रही है। सरकारी नर्सरियों में जरूरत के अनुसार पौधे तैयार नहीं हो पाने से प्रति वर्ष ऐसी ही स्थिति सामने आती है।

लक्ष्य पूरा, लेकिन मांग अधूरी

क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय, रेंज बस्सी की कानोता स्थित नर्सरी में मानसून में १ लाख ४० हजार पौधे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया। मुख्यमंत्री जल स्वाबलम्बन, कैम्पा, जैविक परियोजना आदि के तहत ये पौधे तैयार किए गए। लक्ष्य के अनुसार पौधे तैयार होने पर भी मांग पूरी नहीं हो पाई। हालात ये हैं कि अभी मानसून शुरू हुए एक माह भी पूरा नहीं हुआ है और यहां पौधों की बिक्री का कोटा पूरा हो गया। नर्सरी के बागवान छीतरमल शर्मा के अनुसार अब यहां अमरूद, जामुन, अनार आदि के ४० से ५० पौधे बचे हैं। फूलों के पौधों में भी स्थिति अच्छी नहीं है। गुलमोहर, कंडेर, बिगुन बेल, गुडेल आदि के पौधे नहीं मिल रहे हैं, जो हैं वे एक से डेढ़ फीट के हैं। इतने छोटे पौधों को लोग खरीद भी नहीं रहे।

बड़े पौधे नहीं होते तैयार

सरकारी नर्सरियों में बड़े पौधे तैयार नहीं हो पाते। चाहे पानी की कमी कहें या खाद-बीज की गुणवत्ता, यहां दो से पांच फीट के ही पौधे तैयार हो पाते हैं, जबकि निजी नर्सरियों में 8 से 10 फीट तक के पौधे आसानी से मिल जाते हैं। प्रशासन और वन विभाग लगातार पौधरोपण पर जोर दे रहा है, लेकिन मांग के अनुरूप पौधे उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है। कानोता नर्सरी की ही बात करें, तो यहां प्रतिदिन लोग आते हैं, लेकिन इनमें से आधे खाली हाथ लौट जाते हैं।

फलों की दरों में तीन गुना तक अंतर

पौधे लम्बाई(फीट) सरकारी नर्सरी(रु.) निजी
अमरूद 5 15—20 80—100
जामुन 4 15—20 50—80
अनार 2 5 50—60
नीबू 4 20 60—80

फूलों की दरों में भी मनमाना मोल
पौधे लम्बाई (फीट) सरकारी नर्सरी निजी
गुलमोहर 1—15 5 20—30
गुडेल 1—15 5 25—30
बिगुन बेल 4—6 15 50
कंडेर 2 5 25—30

नोट : गुलाब, रात की रानी, मोगरा, चम्पा जैसी फूलों के कई किस्म के पौधे सरकारी नर्सरियों में नहीं मिल रहे हैं। इसलिए निजी नर्सरियों पर ये मनमाने दाम में बेचे जा रहे हैं।

किस योजना में कितने पौधे (कानोता नर्सरी)

140000 कुल पौधे तैयार
35000 मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना
30000 कैम्पा योजना के तहत
150—200 फलदार बचे
200—250 फूलदार बचे

इनका कहना है

इस बार विभिन्न योजनाओं के तहत 1 लाख 40 हजार पौधे तैयार करते का लक्ष्य मिला। लक्ष्य के अनुसार पौधे तैयार कर बांटना शुरू किया। अब यहां कुछेक फलों के 50 से 60 पौधे ही शेष हैं। यहां ज्यादा लम्बाई वाले पौधे तैयार नहीं हो पाते, इसलिए बड़े पौधे बाहर महंगे मिलते हैं।
- सीताराम मीणा, रेंजर, क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय, रेंज बस्सी