
राम मंदिर: 31 साल पहले 101 कार्यकर्ता 124 किमी पैदल चलकर पहुंचे थे अयोध्या
अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर पूरे देश में उत्साह है। 500 साल के इंतजार के बाद 22 जनवरी को रामलला राम मंदिर में विराजेंगे। वहीं वर्ष 1992 में 6 दिसंबर के दिन अयोध्या पहुंचे कार्यकर्ताओं की घटना के 31 साल बाद भी यादें ताजा हैं। उस समय चंदलाई व उसके आसपास गांवों से 101 कार्यकर्ता अयोध्या पहुंचे थे। ग्राम पंचायत चंदलाई निवासी लल्लूराम पंचोली पुरानी यादें ताजा करते हुए बताते हैं कि 6 दिसंबर का दिन उनके जहन में आज भी ताजा है। जैसे ही दिसंबर आता है अयोध्या जाने व उस दौरान हुए घटनाक्रम की स्मृतियां पुनर्जीवित हो जाती हैं। चंदलाई व उसके आसपास के क्षेत्र से अयोध्या गए लल्लूराम पंचोली, हेमसिंह राठौड़ ने बताया कि 101 कार्यकर्ताओं के साथ उत्तरप्रदेश के गोंडा स्टेशन से पैदल 124 किमी चलकर अयोध्या पहुंचे थे।
10 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने दी थी गिरफ्तारी...
10 हजार कार्यकर्ताओं के साथ यहां से गए कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। उस समय अयोध्या का नजारा ही कुछ और था। पूरे भारतवर्ष से आए कार्यकर्ताओं ने अयोध्या व आस-पास का क्षेत्र अटा पड़ा था। अयोध्या में ये लोग धर्मशाला में ठहरे थे। वहां से वापस आने पर कई मंत्रियों व संघ पदाधिकारियों ने उनका गांधीनगर रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत किया था। कार्यकर्ताओं ने बताया कि उस समय रामलला के लिए लोगों का उत्साह इस कदर था कि काम धंधे छोड़कर अयोध्या पहुंचे थे।
उत्साह का माहौल था...
पंचोली ने बताया कि अयोध्या में अत्यधिक उत्साह का माहौल था। अनुमानित संख्या से कई गुना अधिक लोग पहुंचे थे। 6 दिसंबर को भीड़ अनियंत्रित हो गई थी। वे बताते हैं कि उन्हें रामलला व उनके सिंहासन की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दौरान गुम्बद के टूटने के दौरान जब ईंटें नीचे गिरने लगी तब रामलला के सिंहासन को उठाकर कथा कुंज ले गए थे। 4:10 मिनट पर घटनाक्रम हुआ। उसके बाद उसी दिन कथा कुंज से रामलला और सिंहासन को वापस उठाकर उन्हें इस स्थान पर स्थापित कर दिया गया।
अब मंदिर निर्माण से मन प्रसन्न...
गुमानमल लोढ़ा ने बताया कि उस समय कई बड़े नेता माइक से शांति बनाए रखने का अनाउंस कर रहे थे, लेकिन कार्यकर्ता नहीं माने। अब मंदिर निर्माण से मन प्रसन्न है, लेकिन जो साथी जीवित नहीं हैं वे यह दृश्य नहीं देख पाएंगे, इसका दुखः भी है।
राम मंदिर में होंगे 44 द्वार, 14 दरवाजों में जड़ा होगा सोना...
राम मंदिर 70.5 एकड़ में फैला है। इस मंदिर में 44 द्वार होंगे। इनमें 18 द्वार दरवाजों से युक्त होंगे। इनमें 14 दरवाजे स्वर्णजड़ित होंगे। 4 दरवाजे स्टोर के हैं, जिन्हें वार्निश करके आकर्षक बनाया गया है। मंदिर के डिजाइन और निर्माण से जुड़े इंजीनियरों के अनुसार भूतल पर लगे दरवाजे लकड़ी के बने हैं, जिसे हैदराबाद की कंपनी ने तैयार किया है। राममंदिर तक पहुंचने के लिए 3 पथ बनाए जा रहे हैं। जिसका नाम राजजन्मभूमि पथ, भक्ति पथ और राम पथ है।
16 काउंटर के साथ बैग स्कैनर बन रहे हैं...
कैनोपी के बाद बाएं हाथ पर 16 काउंटर के साथ बैग स्कैनर बन रहे हैं। यहां से सुविधा केंद्र के सामने पहुंचेंगे। यहां बैगेज काउंटर के बगल से दोबारा इसी पथ पर आ जाएंगे। अमावा मंदिर के पीछे पहुंच जांएगे। यहां से निकलने के बाद मंदिर का दर्शन कर सकेंगे।
मंदिर में एक ही दरवाजे से मिलेगा प्रवेश...
सभी श्रद्धालुओं को एक ही द्वार से प्रेवश मिलेगा। मंदिर जितना भव्य तैयार किया जा रहा है, श्रद्धालुओं की सहूलियत का भी उतना ही ध्यान रखा जा रहा है। उनकी सहूलियत के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट सुग्रीव किला गेटवे 2 के बगल में एक सुविधा केंद्र बना रहा है।
Published on:
02 Jan 2024 11:33 pm
बड़ी खबरें
View Allबस्सी
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
