
एक माह की नवजात की खरीद-फरोख्त में दोषी मां खुशी पांच माह से अपने लाल की एक झलक पाने के लिए तरस गई। कानूनी पचड़े में फंसा उसका मासूम डीएनए रिपोर्ट के कारण अभी तक आजाद नहीं हो पाया। मासूम अभी राजकीय शिशुगृह में परायों के हाथों में पल बढ़ रहा है।
गरीब मां 900 किलोमीटर दूर मुंबई से ही अपने अधिवक्ता के समक्ष दुखड़े रोककर मासूम को दिलाने की गुहार कर रही है। वह बार-बार यही कह रही है 'या खुदा गलती हुई मुझे माफ कर, मेरा लाल मुझे दिला देÓ। इधर, पुलिस व संबंधित एजेन्सियां मासूम व उसकी मां की डीएएनए रिपोर्ट के लिए चार माह से लगातार जयपुर स्थित एफएसएल जयपुर को पत्र व्यवहार कर रिपोर्ट मांग रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। रिपोर्ट आए तो दोषी मां व बच्चे के संबंध के बारे में पता किया
जा सके।
गौरतलब है कि गत दिनों मुंबई निवासी खुर्शीद बानू उर्फ खुशी पत्नी शमीम अहमद ने तीसरी संतान पुत्र ही होने पर मजबूरी में अहमदाबाद निवासी धवल त्रिवेदी व उसकी पत्नी अंजना बेन के मार्फत वहीं के अरविन्द भाई मकवाना को 2.35 लाख रुपए में बच्चा बेच दिया था।
बच्चा काला होने से उन्होंने वापस लौटा दिया था। गत मई में हुए इस घटनाक्रम का प्रतापनगर थाना पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए सभी आरोपितों के साथ ही उदयपुर के मेडिकल व्यवसायी राजेन्द्र उर्फ राजू विजयवर्गीय व अहमदाबाद की ज्योतिबेन मकवाना को गिरफ्तार कर बच्चा बरामद किया था।
वर्तमान में सभी आरोपित जमानत पर हैं तथा बच्चा राजकीय शिशुगृह में पल रहा है। खुशी ने अपने बच्चे को वापस लेने के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष गुहार की, लेकिन बच्चा उसका है या नहीं इसकी जांच के लिए समित ने उसका डीएनए टेस्ट करवाया था।
Published on:
16 Aug 2016 04:16 pm
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