
झील सूखी...कभी चीतल और बतखों से था आबाद था, अब तो सिर्फ शेष रह गई यादें
शाहपुरा (जयपुर)। चहुंओर हरियाली से आच्छादित और चीतल व बतखों से आबाद रहने वाला क्षेत्र का एकमात्र पर्यटक स्थल संजय वन सरकारी उपेक्षा के चलते उजड़ गया है। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से करीब 38 साल पहले विकसित किया संजय स्मृति वन सूखे जंगल में तब्दील हो गया है। अब ना हरियाली बची है और ना ही पक्षियों व वन्यजीवों की आवाज सुनाई देती है। बतखों को जयपुर चिडिय़ाघर और चीतलों को कोटा के मुकंदरा वन अभ्यारण शिफ्ट कर दिया। बजट के अभाव में पर्यटकों के लिए बनाए गए गेस्ट हाउस भी खस्ताहाल हो गए। रेस्टोरेंट और गेस्ट हाउस की छत की टाइल्स जीर्ण-शीर्ण पड़ी हैं। बारिश में छत से पानी टपकता है। गेस्ट हाउस की दीवारों में दरारें व नींव में मिट्टी का कटाव होने से गिरने के कगार पर है। अलवर तिराहे पर हाइवे के पास 40 हैक्टेयर में फैले संजय वन को सरकार की मेहरबानी का इंतजार है।
हाइवे पर वर्ष 1980 में ग्राम्य वन योजना के तहत संजय गांधी की स्मृति में करीब एक करोड़ रुपए की लागत से पर्यटक स्थल के रूप में संजय वन विकसित किया था। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट व झोंपड़े बनाए तथा कई तरह के वन्य जीव भी लाए गए। इनमें चीतल व बतख भी शामिल थी। हरियाली के लिए दर्जनों किस्मों के पेड़-पौधे लगाए गए। हाइवे से गुजरने वाले पर्यटक कुछ समय ठहरकर आनंदित हो जाते थे, लेकिन सरकारी उपेक्षा के चलते आज वीरान पड़ा है।
बतखों को जयपुर और चीतलों को कोटा भेजा
संजय वन कभी चीतल और बतखों से आबाद था, लेकिन विभागीय अनदेखी से बदहाल हो गया। बतखों के लिए बनाई गई झील कई साल से सूखी पड़ी है। चीतलों के अस्थाई ठिकाने भी टूट-फूट गए। कई साल पहले बतखों को जयपुर चिडिय़ाघर एवं कुछ दिन पहले 52 चीतलों को कोटा के मुकंदरा वन अभ्यारण्य भेज दिया। वर्तमान में यहां मात्र 6 चीतल हैं।
गिर सकता है गेस्ट हाउस
गेस्ट हाउस व रेस्टोरेंट भवन जर्जर हैं। निर्माण के बाद विभाग ने एक बार भी मरम्मत नहीं करवाई। ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी गेस्ट हाउस भवन गिर सकता है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री पहाडिय़ा ने किया था उद्घाटन
नेशनल हाइवे से सटे संजय वन शाहपुरा व विराटनगर क्षेत्र का एकमात्र पर्यटक स्थल है। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री डॉ. कमला के प्रयासों से ग्राम्य वन योजना के तहत ग्राम जाजैकला व सूरपुरा की भूमि अवाप्त कर सरकार ने करीब 40 हैक्टेयर भूमि पर संजय वन विकसित किया था। इसका उद्घाटन 2 अक्टूबर 1980 को तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाडिय़ा ने किया था।
सूखे की चपेट में वन क्षेत्र
वन को विकसित करने के दौरान यहां चार कुओं का निर्माण कराया गया था। जलस्तर गिरने से कुएं सूख गए। बोरिंग का निर्माण कराया, लेकिन उसमें पर्याप्त जल प्राप्त नहीं हुआ और खारा है। सिंचाई नहीं होने से पेड़-पौधे सूख गए।
इनका कहना है....
वन क्षेत्र की चारदीवारी की मरम्मत करवाई है। इसकी ऊंचाई भी बढ़ाई है। अन्य विकास के लिए विभाग को पत्र लिखा है।
रघुवीर मीना, क्षेत्रीय वन अधिकारी, शाहपुरा
Published on:
23 Jun 2018 05:22 pm
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