
सरपंची का मोह,महिला सीट आई तो मलमास में कराई बेटे की शादी
जमवारामगढ़(जयपुर). राजनीति भी बड़ी अजीब चीज है। राजनीति करने का 'रंग' एक बार लग जाए तो छूटता नहीं है। यह एक नशा सा बन गया है। जैसे कई प्रकार के नशे होते है, वैसे राजनीति भी एक नशा है। राजनीति के रंग का एक ऐसा ही रोचक मामला सामने आया है। हुआं यूं कि पंचायत समिति जमवारामगढ़ की एक ग्राम पंचायत के सरपंच पद की 19 दिसम्बर 2019 को निकाली गई लॉटरी में एसटी महिला के लिए आरक्षित हुई। इस ग्राम पंचायत में एसटी वर्ग के मतदाताओं का प्रतिशत करीब 7 से 8 प्रतिशत है।
गांवों में मजबूत पहचान बनाई....
एसटी वर्ग के पूर्व सरपंच ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे। ऐसे में सरपंच का अधिकांश कामकाज पढ़ा लिखा बेटा करता था। सरपंच का कामकाज करते करते बेटे के राजनीति से सेवा में मन लग गया। धीरे-धीरे एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल का सदस्य बन गया। गांव व आसपास के गांवों में अपनी मजबूत पहचान बना ली। फिर ग्राम पंचायत की सीट एसटी महिला के लिए आरक्षित हो गई। जिस पर पूर्व सरपंच पुत्र ने परिवार की महिला को सरपंच का चुनाव लड़ाने की सोची। लेकिन खुद के व छोटे भाई के तीन संतान होने से दोनों की पत्नियां भी चुनाव नहीं लड़ सकती थी।
बहू का मतदाता सूची में जुड़वाया नाम....
ऐसे में राजनीतिक पूष्ठभूमि वाले परिवार पर चुनाव कौन लडे,यह प्रश्न खड़ा हो गया। ऐसे में उसने एमटेक तक पढ़े लिखे बेटे की मात्र 10 दिन में सगाई करने के साथ मलमास में ही एमए पढ़ी लिखी युवती से 29 दिसम्बर 2019 को आर्य समाज में शादी कर शादी का पंजीयन करवाया और बेटे की बहू का नाम मतदाता सूची में जुड़वा लिया। इसके बाद समर्थकों ने सोशल मीडिया पर सरपंच पद के लिए बेटे क ी बहू को उम्मीदवार घोषित कर प्रचार प्रसार व मतदाताओं के बीच जाकर जनसम्पर्क भी चालू कर दिया।
दुबारा लॉटरी में बदली सीट....
इसी बीच उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद 1 फ रवरी 2020 को सरपंच पदों की दुबारा लॉटरी निकाली तो ग्राम पंचायत के सरपंच पद क ी सीट एसटी महिला से बदल कर सामान्य महिला में तब्दील हो गई। ऐसे में पुत्रवधु को सरपंच बनाने के अरमानों पर पानी फि र गया। ऐसे में ये घटना लोगों में चर्चा बनी हुई है।
Published on:
07 Feb 2020 11:29 pm
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