बस्सी @ पत्रिका. अक्टूबर के महीने में वैसे तेजधूप व भीषण गर्मी पड़ती है, लेकिन प्रकृति की लीला अपार है, जिसका किसी ने भेद नहीं पाया है, यही कारण है कि पश्चिमी विझौभों की हवाएं सक्रिय होने से आश्विन यानि आसोज के महीने में शुक्रवार रात से शनिवार शाम तक बरसात की चहुंओर झड़ी लगी हुई है। रविवार सुबह 8 बजे तक पिछले 24 घ्ंटे में बस्सी में 100 एमएम यानि 4 इंच बरसात हो गई है। जबकि विराटनगर में 155 एमएम बारिश हुई है।
बरसात से किसानों को नुकसान कम फायदा अधिक है। रबी की सरसों एवं चने की बुवाई से पहले यह बरसात किसानों के लिए सौगात है। अब इस बरसात से किसानों के खेतों में चहुंओर रबी की बुवाई हो जाएगी। हालांकि खरीफ की बाजरा की फसलों की कटाई के वक्त भी जयपुर ग्रामीण व आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश हुई थी, जिससे खेतों में पर्याप्त नहीं हो गई थी, लेकिन जो किसान बाजरे की फसलों को काटने में देरी कर चुके थे, उनके खेतों में तेजधूप व भीषण गर्मी से नमी कम पड़ गई थी। अब अच्छी बारिश होने से खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है। अब किसान अपने खेतों में चना व सरसों की आराम से बुवाई कर सकेंगे। वहीं जो किसान गेहूं व जौ की फसलों की बुवाई करना चाहते हैं वे भीआराम से बुवाई कर सकेंगे।
बिजली की बचत , नहीं करनी पड़ेगी पलेवा
किसानों को अक्सर सरसाें , चना, तारामीरा, गेहूं व जौ की बुवाई से पहले अपने खेतों में पलेवा यानि जुताई कराने से पहले जुताई करानी पड़ती है। जब बरसात नहीं होती है तो खेतों में पलेवा कर यानि पानी भरा कर उसमें नमी बढ़ा कर जुताई करानी पड़ती है। लेकिन इस बार इन्द्र भगवान की महरबानी ऐसी हुई कि पलेवा की जगह बरसात हो गई है।
अधिकांश वे किसान जिन्जोंने बाजरे की फसलों को कटते ही नमी रहने के कारण अपने खेतों की जुताई करा दी, लेकिन जो किसान खरीफ की फसलों की कटाई देर से कर पाए अब उन किसानों के खेतों में आराम से जुताई हो जाएगी और रबी की चना, सरसों एवं अन्य फसलों की भी बिना पानी बुवाई भी हो जाएगी। इससे बिजली की भी बचत होगी। हालांकि पिछले सीजन में भी बाजरे की फसलों की कटाई के वक्त बारिश होने से किसानों ने अपने खेतों मे चना व सरसों की बम्पर पैदावार हुई थी। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी बरसात अच्छी हुई थी और चना व सरसों की बम्पर पैदावार हुई थी।
किसानों को नुकसान भी हो रहा है
जिन किसानों ने बाजरा काटने में देरी कर दी उन किसानों के खेतों में कड़बी भीग रही है। वहीं जिन किसानों के खेतों में मूंगफली की फसल है, उन किसानों को मूंगफली की खुदाई में देरीहो रही है । जिन किसानों ने मूंगफली की खुदाई करवा दी है, उन किसानों की मूंगफली का रंग काला पड़ने एवं चारा खराब होने की भी सम्भावन बढ़ गई है।
तापमान में भी आई गिरावट
पिछले दिनों तेजधूप व भीषण गर्मी ने लोगों को पसीज कर रख दिया था, लेकिन दो दिन से आकाश में बादल छाने एवं बरसात होने से तापमान में गिरावट आने से लोगों ने रात के समय पंखे व कूलर चलाना बंद कर दिया है । लोगों को गुलाबी सर्दी का अहसास होने लग गया है। कासं