
दिल्ली तक मशहूर था शाहपुरा का टिण्डा, अब नाम की रह गई टिण्डा मण्डी
शाहपुरा। कुछ साल पहले तक प्रदेश से लेकर दिल्ली तक मशहूर शाहपुरा के मीठे टिण्डे का स्वाद अब फीका हो गया है। जयपुर जिले के शाहपुरा उपखण्ड व आसपास के इलाके में पानी की कमी के चलते टिण्डा की पैदावार घिट गई है। जिससे कस्बे में करीब 1२ वर्ष पहले सरकार की ओर से स्थापित की गई टिण्डा मण्डी भी वर्तमान में नाम की रह गई है। अब मंडी में पहले के मुकाबले नाम मात्र का टिण्डा भी नहीं आ रहा। ऐसे में सब्जी मंडी का नाम जरूर टिण्डा मंडी है, लेकिन मंडी में टिण्डा कम नजर नहीं आता। वर्तमान में टिण्डा से अधिक तो मिर्च नजर आती है।
व्यापारियों के मुताबिक इलाके में करीब ७-८ वर्ष पहले की भी स्थिति देखें तो वर्तमान में करीब 10 फीसदी टिण्डा भी मण्डी में नहीं आ रहा। इससे टिण्डा मण्डी नाम की रह गई।
बम्पर पैदावार से मिला था टिण्डा मंडी का दर्जा
पैदावार उल्लेखनीय है कि करीब 10 वर्ष पहले तक शाहपुरा तहसील क्षेत्र में टिण्डे की बम्पर पैदावार होती थी। उस दौरान सीजन में शाहपुरा की सब्जी मण्डी में प्रतिदिन करीब 150 से अधिक गाडियों में 500 से 1 हजार टन तक टिण्डा प्रतिदिन मण्डी में बिकने आता था। यहां होने वाली टिण्डे की बम्पर पैदावार को देखते हुए प्रदेश सरकार ने 2007-08 में शाहपुरा की सब्जी मण्डी को टिण्डा मण्डी का विशिष्ट दर्जा दिया था।
मंडी के व्यापारी गुडडू सैनी बताते हैं कि वर्ष 1995-96 के आसपास इलाके में टिण्डे की इतनी पैदावार होती थी कि सब्जी मण्डी में महज 10 रुपए में 10 किलो का टोकरा यानी एक रुपया किलो में टिण्डा बिकता था। इसके बाद धीरे -धीरे इलाका डार्क जोन में चला गया। पानी की कमी के चलते क्षेत्र में टिण्डे की पैदावार घटती गई।
अब सीजन में भी महज 20 से 25 टन की आवक
अब इलाके में पानी की कमी से कई गांवों में तो किसानों ने टिण्डा व अन्य सब्जियों का उत्पादन ही बंद कर दिया। जिससे वर्तमान में शाहपुरा की टिण्डा मण्डी में सीजन में भी प्रतिदिन मात्र 20 से 25 टन तक ही टिण्डा आता है। जिसमें से कुछ टन यहां स्थानीय स्तर पर बिक जाता है और बाकी 10-15 टन टिण्डा प्रदेश से बाहर सप्लाई होता है। टिण्डे का उत्पादन कम होने से मण्डी में टिण्डा नहीं आ रहा। अब सीजन खत्म होने से मंडी के व्यापारियों को फागी और जयपुर से टिण्डा मंगवान पड़ रहा है। जो वर्तमान में सब्जी मण्डी में ५५ रुपए किलो भाव में बिक रहा है।
दिल्ली सहित कई प्रदेशों में जाता है टिण्डा
सब्जी मण्डी के अध्यक्ष सुल्तान कुम्हार, व्यापारी गुडडू सैनी, बाबूलाल सैनी, मुकेश सैनी के मुताबिक शाहपुरा के टिण्डे की दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, फरीदाबाद, गुडग़ांव, अलीगढ़, गुजरात, भरतपुर, हिण्डौन, करौली, आगरा, सहित कई प्रदेशों व राजस्थान के विभिन्न जिलों में अधिक मांग है। फिलहाल पैदावार कम होने से
मात्र सीजन के दौरान ही बाहर भेजा जाता है। वह भी बहुत कम मात्रा में जाता है।
इसलिए मशहूर था शाहपुरा का टिण्डा
व्यापारियों ने बताया कि शाहपुरा तहसील के आसपास के गांवों में पैदा होने वाला टिण्डा प्रदेश से लेकर दिल्ली समेत कई राज्यों तक मशहूर है। इसकी किस्म बहुत बेहतरीन मानी जाती है। यहां पैदा होने वाला टिण्डा कच्चा, रोएदार व मिठासवाला होता है। इसलिए इसकी मांग अधिक है। इस टिण्डे को सब्जी के काम लिया जाता है।
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शाहपुरा में टिण्डा मंडी नाम की रह गई है। 10 -15 साल पहले तक इलाके में टिण्डा की बम्पर पैदावार होती थी, इसलिए यहां टिण्डा मंडी का दर्जा दिया था, लेकिन अब पानी की कमी से टिण्डा की पैदावार नहीं होती। अब सीजन में भी अधिकतम मात्र 20 से 25 टन टिण्डा आता है। ------ सुल्तान कुम्हार, अध्यक्ष सब्जी मंडी शाहपुरा
Published on:
01 Sept 2020 09:52 pm
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