
रंग-गुलाल से महका बाजार, बच्चों को लुभा रहीं अत्याधुनिक पिचकारियां
रंगों के पर्व होली में अभी पांच दिन का समय है, लेकिन बाजार पर त्योहार का रंग चढ़ने लगा है। शहर के प्रमुख बाजार में पिचकारी व रंग-गुलाल की दुकानें सज गईं हैं। होली 13 को तथा धुलंडी 14 मार्च को मनाई जाएगी। रंगों के त्योहार में चार चांद लगाने के लिए अत्याधुनिक पिचकारियों के साथ तरह-तरह की गुलाल व रंग बाजार में आ रहे है। होली पर शहर में अलग-अलग स्थानों पर रात को भद्रा समाप्त होने पर होलिका का दहन किया जाएगा। बाजार में कई तरह की पिचकारियां बिक्री के लिए आ गई हैं। बाजार में 20 से ज्यादा वैरायटी में पिचकारियां बिक रही हैं। व्यापारी कमलेश अग्रवाल ने बताया कि बाजार में अम्ब्रेला, डबल इंजिन, मैजिक गन सहित, चश्मे वाली, हथौड़ा व फावडा जैसी आकृतियों की पिचकारी बिक रही है। इसके अलावा वाटर बैलून और मिक्की माउस, डारेमोन, लॉयन जैसे मुखौटे भी बाजार में उपलब्ध है। इनकी कीमत 20 रुपए से 400 रुपए तक रुपए तक है। पारंपरिक प्रेशर वाली पिचकारियों के संग इलेक्ट्रॉनिक पिचकारी भी पहुंची हैं। यह गन जैसी होती है। यह पानी को प्रेशर से दूर तक फेंकती हैं। इसकी कीमत 300 रुपए से 400 रुपए तक है। व्यापारियों ने गुलाल, रंग, पिचकारी का स्टॉक अलग अलग शहरों से मंगवाया है।
प्राकृतिक रंगों की मांग अधिक
होली पर अरारोट के रंग और गुलाल की मांग ज्यादा है। यह रंग हल्के और प्राकृतिक होने से त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। यह रंग पानी में आसानी से घुल जाते हैं। सफाई में भी ज्यादा परेशानी नहीं होती है। गुलाबी, पीला, नीला, हरा और लाल रंग उपलब्ध हैं। कई कंपनियों ने हर्बल गुलाल में कई वैरायटियां लॉन्च की हैं। अरारोट से बने रंग-गुलाल की संभावित मांग को देखते हुए खुदरा कारोबारी महंगे होने के बावजूद इनकी खरीद में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। रंगों से चेहरे को बचाने के लिए कई तरह के मुखौटे भी बिक्री के लिए सजे हैं।
खाद्य सामग्री की खरीद शुरू
होली पर घरों में विविध प्रकार के व्यंजन बनेंगे। इसको लेकर किराणा के सामान समेत घर पर बनाए जाने वाले व्यंजनों को लेकर खरीदारी शुरू हो गई है। इसको लेकर व्यापारियों ने विविध प्रकार की वैरायटी खाद्य सामग्री का स्टॉक सजा लिया है। किराना दुकानों पर तरह-तरह के पापड़ एवं चिप्स भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। होली पर मिठाइयों की मांग भी अधिक रहती है। इसके लिए मिठाई व्यापारियों ने अभी से ही इसकी तैयारी शुरू कर दी है। कई लोग रंग गुलाल से बचने के लिए शहर से दूर पर्यटक स्थलों सहित शांत इलाकों में होली का पर्व मनाते है।
Updated on:
11 Mar 2025 05:33 pm
Published on:
11 Mar 2025 05:31 pm
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