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दिल्ली को दहलाने वाली 1013 गांवों की जीवन रेखा साबी नदी फिर संकट में

सीकर जिले के अजीतगढ़ व जयपुर जिले के साईवाड़ से निकल कर हरियाणा तक जाने वाली साबी नदी संकट में है। बरसात के बदलते पैटर्न और सूखी नदी पर अवैध खेती के चलते कभी विकराल रूप में बहने वाली और दिल्ली को अपनी बाढ़ से डराने वाली नदी का पाट दिनों सिकुड़ता जा रहा है।

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दिल्ली को दहलाने वाली 1013 गांवों की जीवन रेखा साबी नदी फिर संकट में

दिल्ली को दहलाने वाली 1013 गांवों की जीवन रेखा साबी नदी फिर संकट में

सब सरफेस बैरियर बने तो बन सकती है भागीरथी

जयपुर। सीकर जिले के अजीतगढ़ व जयपुर जिले के साईवाड़ से निकल कर हरियाणा तक जाने वाली साबी नदी संकट में है। बरसात के बदलते पैटर्न और सूखी नदी पर अवैध खेती के चलते कभी विकराल रूप में बहने वाली और दिल्ली को अपनी बाढ़ से डराने वाली नदी का पाट दिनों सिकुड़ता जा रहा है। चार दशक के अन्तर के सेटेलाइट फोटो नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को स्पष्ट कर रहे हैं। दिसम्बर 1984 के फोटो और दिसम्बर 2020 के फोटो को देखें तो नदी कई जगह पर सिकुड़ती नजर आ रही है। साथ ही नदी के बहाव पर भी खासा असर आया है। राजस्थान में 157 किलोमीटर में बहने वाली इस नदी में जगह जगह खेती होने लगी है जिससे कई जगह पर यह केवल नाले समान ही रह गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक सूखने के बावजूद ये नदी भागीरथी बन सकती है और अपने आस पास की पानी की जरूरतें पूरी सकती है।

बरसों से पानी नहीं आने के चलते बढ़ा अतिक्रमण
यह अभी आंतेला, पावटा, कोटपूतली के चतुर्भुज, नांगडीवास, हांसियावास, बामनवास, चतुर्भुज व टापरी होते हुए अलवर जिले से आगे हरियाणा तक जाती है। नदी में पिछले कई सालों से पानी का बहाव धीरे धीरे कम हो रहा है। नतीजतन साल के अधिकांश समय नदी सूखी रहती है जिसके चलते नदी के बहाव क्षेत्र में लोग अतिक्रमण कर खेती और मिट्टी का अवैध दोहन कर रहे है। नदी के बहाव क्षेत्र में लोग ट्रैक्टर ट्रॉलियों से मिट्टी भर कर ले जा रहे है।

अब भी ला सकती है खुशहाली
विशेषज्ञों के अनुसार सब सरफेस बैरियर बना कर कम दूरी तक बहने वाली नदी के पानी का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है। नदी में दो से तीन मीटर गहरी खाई खोद कर उसमें चिकनी मिट्टी भर कर शृंखलाबद्ध सब बैरियर बनाए जा कर नदी में बहकर आने वाले बरसाती पानी को गहराई तक पहुंचाया जा सकता है। जिससे आसपास के जलस्रोतों का जल स्तर ऊंचा उठ सकता है। नदी कई औद्योगिक क्षेत्रों के निकट से गुजरती है। ऐसे में उद्योगों और जनता के लिए पानी के संकट का इस नदी के सूखे पाट से भी समाधान हो सकता है।

निर्भर हैं एक हजार से अधिक गांव
जल संसाधन विभाग की ओर से यूरोपियन यूनियन के सहयोग से तैयार हाइड्रोलोजिकल एटलस ऑफ राजस्थान के अनुसार साबी नदी बेसिन पर जयपुर जिले के 225, अलवर जिले के 745 व सीकर जिले के 43 गांव निर्भर हैं।

नदी व सोता नाला में पानी का बहाव रूकने से नदी व नालों का अस्तित्व ही समाप्त हो रहा है। तेज व जरूरत से अधिक बारिश होने पर ही नदी नालों में पानी का बहाव पुन: शुरू हो सकता है।
- राजेन्द्र यादव, कोटपूतली विधायक व राज्य मंत्री

इनका कहना है
वर्षों से साबी नदी में पानी आता नहीं देखा। इसका मुख्य कारण बारिश की कमी है। दूसरा कई जगह साबी के पेटे में फसलें बोई जा रही है तो कई जगह नदी के बहाव में अतिक्रमण हो रहा है। इससे साबी नदी विलुप्त सी होती जा रही है।
कजोड़मल चौधरी, निवासी आंतेला

बारिश की कमी से पानी का बहाव नहीं बन पा रहा, जिससे चलते लम्बे समय से साबी नदी में पानी नहीं आया। इसलिए नदी सूखी पड़ी है। नदी में पानी नहीं आने के कारण जमीन खाली पड़ी देखकर आसपास के किसान खेती कर लेते हैं। इलाके में एक साथ तेज बारिश हो तो नदी फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट सकती है।
------यशवीर सिंह, एईएन, सिंचाई विभाग, शाहपुरा
एक्सपर्ट कमेंट

बरसात के बदलते पैटर्न के कारण नदियों में पानी कम हुआ है। ऐसे में नदी के बहाव व ढलान के अनुसार तीन- चार किलोमीटर की दूरी में चिकनी मिट्टी के सब सरफेस बैरियर बनाए जाने से पानी गहराई तक जाएगा और आस पास का जलस्तर ऊंचा उठेगा। यह एक सस्ती तकनीक है जिससे नदी के बहते पानी का संग्रहण किया जा सकता है।
- भरत सिंघल, सेवानिवृत चीफ इंजीनियर, जल संसाधन विभाग
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