
साईवाड़ (जयपुर)।जयपुर जिले के शाहपुरा के समीप स्थित त्रिवेणी धाम के संत नारायणदास महाराज को अध्यात्म के क्षेत्र में मंगलवार को दिल्ली राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री से नवाजा जाएगा। इससे क्षेत्र में खुशी की लहर है। पद्मश्री पाने के लिए त्रिवेणी धाम के संत नारायणदास महाराज, पुजारी रामरिछपाल दास, रामरतनदास सोमवार प्रात: सवा 5 बजे दिल्ली रवाना होंगे। मंगलवार शाम 5 बजे महाराज को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।
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त्रिवेणी धाम केशव दास, रामचरण दास, पूरणमल शर्मा, त्रिवेणी धाम पुस्तकालय के महेश शर्मा, उपेन्द्र गंगावत ने बताया कि सम्मान से संत समाज में अच्छा संदेश जाएगा। डिप्टी स्पीकर व शाहपुरा विधायक राव राजेंद्र सिंह ने कहा कि संत नारायणदास महाराज का कद इतना बड़ा है कि वे किसी पुरस्कार के मोहताज नहीं हैं, लेकिन संपूर्ण राष्ट्र व सरकार ने आध्यात्मिक जगत में इस विभूति को अलंकरण किया यह है, यह गौरव की बात है।
बत्तीसा मण्डल अध्यक्ष कालाकोटा स्थित दाउ धाम के बलदेव दास महाराज ने कहा कि संत नारायण दास को भक्त ही नहीं, सम्पूर्ण भारतवर्ष में संत समाज भी पूजता है। ऐसे तपस्वी संतों से ही देश की भूमि पवित्र हुई है। सत्ताईसा मण्डल अध्यक्ष खेड़की धाम के महन्त मानदास महाराज ने कहा कि तपोभूमि त्रिवेणी धाम के संत नारायण दास महाराज ने संत समाज का भी नाम ऊंचा किया है।
जिन्हें बचपन में परिवार ने बीमार हो जाने के बाद गुरु शरण में छोड़ दिया, वे अब वैराग्य धारण कर लाखों लोगों के पथ प्रदर्शक है। बाल्यावस्था में ही उन्होंने संन्यास ले लिया था। संभवत: पूरे सिंहस्थ में बाल ब्रह्मचारी महाराज नारायणदास सबसे ज्यादा उम्र के वैरागी हैं। उनके शिष्य उन्हें 92 वर्ष का बताते हैं, लेकिन उन्हें देख लगता है कि वे शतायु हो चुके हैं। मंगलनाथ मंदिर के सामने पुराने पुल के पास उनके आश्रम में रोजाना हजारों लोग आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। वे श्रद्धालुओं को गौ रक्षा का संदेश देते हैं और भूखे का पेट भरना ही जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य समझते हैं।
शिक्षित-स्वस्थ हों
महाराज नारायणदास चाहते हैं कि लोग शिक्षित और स्वस्थ हों, इसलिए वे जयपुर स्थित अजमेर रोड पर महाराज रामानंदाचार्य संस्कृत विश्वविधालय और बाबा भगवानदास बीबीडी पीजी कॉलेज, कृषि कॉलेज और गल्र्स कॉलेज संचालित करते हैं। इनमें देशभर के छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसी तरह जयपुर व आसपास के जिलों में अस्पताल भी संचालित कर रहे हैं।
रात-दिन गुरु सेवा
महाराज नारायणदास चिमनपुरा गांव के रहने वाले हैं। यह गांव त्रिवेणी धाम से लगभग दो किलो मीटर दूर है। शिष्यों के मुताबिक नारायणदास महाराज को माता-पिता छह वर्ष की उम्र में भगवानदास महाराज के पास छोड़ गए थे। नारायणदास गुरुजी की रात-दिन सेवा करते। उनसे शिक्षा-दीक्षा ली और समाज सेवा में लग गए। नारायणदासजी हमेशा सीता-राम जपते रहते हैं।
सरहद पार नहीं जाना
नारायणदास महाराज के विदेशी भक्त भी हैं, जो उनसे आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं। उनके कई बार आग्रह के बाद भी महाराज अपने देश की सीमाएं पार करना नहीं चाहते हैं। यही उनका प्रण भी है। देश के सभी प्रमुख स्थलों पर बाबा का आश्रम है और वे सभी को देश प्रेम का संदेश भी देते हैं।
जनता का पैसा जनता को अर्पित
नारायणदास महाराज कहते हैं कि जनता का पैसा जनता की सेवा में लगाना ही हमारा उद्देश्य है। इसी उद्देश्य के साथ सिंहस्थ में आने वालों के लिए दोनों समय भोजन की व्यवस्था की गई है। यहां रोज 15 हजार से भी ज्यादा लोग भोजन प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं। बाबा के शिष्य बगैर किसी भेदभाव के लोगों को प्रेम से भोजन करवाते हैं।
Published on:
18 Mar 2018 10:46 pm

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