13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ईयरफोन नहीं, अब चेतावनी सुनिए! तेज आवाज, कमजोर सुनवाई, ईयरफोन से बढ़ रही परेशानी

ईएनटी चिकित्सकों के पास प्रतिदिन ईयरफोन के अत्यधिक प्रयोग से मरीजों की बढ़ रही संख्या

2 min read
Google source verification

बस्सी

image

Vinod Sharma

May 02, 2025

Earphone noise is making deaf

ईयरफोन का शोर बना रहा बहरा, कान धीरे-धीरे हो रहे बंद

आजकल खासतौर पर युवा पीढ़ी का ज्यादातर समय मोबाइल में तेज आवाज में संगीत सुनने के साथ, ऑनलाइन गेम खेलने में बीत रहा है। कुछ युवा काल सेंटर और वर्क फ्रॉम होम के चलते आनलाइन मीटिंग करते हैं, जिससे उनके कान में सन्न की आवाज और सीटी बजने जैसी परेशानी हो रही है। ईयरफोन का उपयोग केवल सुगमता और सुविधा का साधन नहीं,बल्कि लम्बे समय तक इसके उपयोग से यह सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। यहां ईएनटी चिकित्सकों के पास प्रतिदिन ईयरफोन के अत्यधिक प्रयोग से प्रभावित कई मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि तेज आवाज में संगीत सुनना और वर्क फ्रॉम होम के दौरान ईयरफोन का लगातार उपयोग समस्याओं को बढ़ा रहा है। ईएनटी विशेषज्ञों के मुताबिक, कानों के लिए सुरक्षित आवाज का स्तर 40 से 60 डेसिबल है। हालांकि युवा लोग सामान्यत: 85 से 100 डेसिबल तक सुनने का जोखिम उठा रहे हैं,जो अत्यंत खतरनाक है। इस उच्च डेसिबल स्तर के संपर्क में आने से कई लोग कानों में झनझनाहट, दर्द और सुनने की शक्ति में कमी का सामना कर रहे हैं। आंकलन के अनुसार लगातार उच्च आवाज में सुनने से खतरा काफी बढ़ा है।

कानों की सेहत पर विपरीत प्रभाव
सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखने के लिए चिकित्सकों ने कुछ सुरक्षा सुझाव दिए हैं। पहला, ईयरफोन का वॉल्यूम 40 प्रतिशत से ज्यादा न रखें। दूसरा यदि आपको घंटों काम करना पड़ता है, तो हर घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक जरूर लें। तीसरा सोते समय ईयरफोन का उपयोग ना करें, क्योंकि यह कानों की सेहत पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।

ये हैं लक्षण
– बातचीत करने के दौरान सुनने या समझने में परेशानी होना।
– कानों में सीटी बजना।
– ऊंची आवाज सुनने में परेशानी।
– बैकग्राउंड शोर होने पर आवाज सुनने में परेशानी होना।
– चक्कर आना या संतुलन संबंधी समस्याएं।
– आसपास शोर होने पर सुनने में परेशानी होना।

कैसे करें बचाव
– तेज आवाज के आसपास होने पर इयरप्लग पहलनें।
– लाउड म्यूजिक सुनना बंद करें।
– ईयरबड, हेडफोन, ब्लूटूथ की आवाज 60% से कम रखें और लगातार इस्तेमाल करने से बचें।
– अपनी सुनने की क्षमता की नियमित जांच करवाएं।
– कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

इनका कहना है…
ईयरफोन का उपयोग तभी करें जब जरूरी हो और आवाज को 40 प्रतिशत से कम रखें। अत्यधिक उपयोग से कानों के साथ-साथ स्वास्थ्य पर विपरित असर होता है। युवा सही तरीके से ईयरफोन का उपयोग कर सुनने की शक्ति को प्रभावित होने से बचा सकते है।
-डॉ.सुरेन्द्र कुमार मीणा, पूर्व प्रभारी ईएनटी बीडीएम अस्पताल कोटपूतली