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ब्लड के लिए भागते रहे परिजन, इधर इंतजार में महिला की थमी सांसें

संभाग मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच फिर एक गर्भवती महिला ने ब्लड के इंतजार में दम तोड़ दिया।

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Ajay Shrivastava

Feb 02, 2016

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जगदलपुर. संभाग मुख्यालय के सबसे बड़े अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच सोमवार को फिर एक गर्भवती महिला ने ब्लड के इंतजार में दम तोड़ दिया।

खून के बदले खून जमा करने की नीति पर काम कर रहा ब्लड बैंक में महिला के पति और मासूम बेटा चक्कर लगाते रहे, लेकिन किसी को भी इनकी पीड़ा सुनाई नहीं दी।

बीजापुर जिले के भैरमगढ़ की गर्भवती महिला जूली बघेल को पेट में असहनीय दर्द होने पर उसके पति सुझू बघेल और बेटा बाबूराम ने शनिवार शाम महतारी वाहन से महारानी अस्पताल में भर्ती कराया था।

जांच के बाद डॉक्टर ने महिला को खून की कमी बताया। जूली को बी पॉजीटिव ब्लड की जरूरत थी। जूली की हालत देखकर सुझू और बाबूराम सीधे ब्लड बैंक पहुंचे और उन्हें पीड़ा बताई, लेकिन मौजूद कर्मचारी ने ब्लड के लिए उतना ही ब्लड कहीं से भी लाने की बात कही। अनजान लोगों के शहर में उनके सामने विचित्र स्थिति पैदा हो गई।

वे ब्लड बैंक में ही किसी भी तरह से खून देने के लिए मिन्नतें करते रहें, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस बीच बेटा बाबूराम को बिस्तर पर तड़प रही मां का ख्याल आते ही वह मेडिसिन वार्ड की ओर दौड़ पड़ा, लेकिन तब तक जूली की सासें थम चुकी थीं।

इस बीच सुझू बघेल भी वहां पहुंचा और दोनों नम आंखों से अस्पताल की व्यवस्था तो कभी किस्मत को कोसने लगे।


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