संभाग मुख्यालय से 5 किमी दूर घाटपदमूर में रहने वाले रूपा धुरवा और लखु आर्थिक रूप से कमजोर है, जो पीढिय़ों से इस परम्परा को शिद्दत से निभा रहे हैं। वे सब्जी, भाजी भी खाते हैं लेकिन चूहे का शिकार आज भी इनका मन बहलाने के लिए और प्रिय भोजन भी है। रूपा धुरवा ने बताया कि वे 20 साल पहले ओडिशा के भोड़ीनाल से माता-पिता के साथ घाटपदमूर में बस गए।