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नक्सलियों के नोट बदलवाने कर रहे थे यह काम, अधिवक्ता-पत्रकार हुए गिरफ्तार

नक्सलियों के नोट बदलने ग्रामीणों पर दबाव बनाने के आरोप में सुकमा पुलिस ने किस्टाराम थाने के धर्मापेंटा से अधिवक्ता, पत्रकार, छात्रों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

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Ajay Shrivastava

Dec 26, 2016

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जगदलपुर.
नक्सलियों के नोट बदलने ग्रामीणों पर दबाव बनाने के आरोप में सुकमा पुलिस ने किस्टाराम थाने के धर्मापेंटा से अधिवक्ता, पत्रकार, छात्रों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। सुकमा एएसपी जितेन्द्र शुक्ला ने बताया, तेलांगाना राज्य के यह लोग लगातार छत्तीसगढ़ में घुसकर ग्रामीणों पर नोट बदली का दबाव बना रहे थे। ग्रामीणों से मिली शिकायत के बाद तेलांगाना पुलिस की मदद से घेराबंदी कर इन्हें गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से एक लाख रुपए के 500 व हजार रुपए के पुराने नोट मिले है। साथ ही नक्सली साहित्य भी बरामद किया गया है।


गिरफ्तार सभी सात लोग में हाईकोर्ट अधिवक्ता आंध्र व तेलंगाना के बाला रविन्द्रनाथ पिता बी सोमैय्या, अधिवक्ता सीएच प्रभाकर पिता रामैया, डी प्रभाकर पिता त्रिपालु, हैदराबाद के पत्रकार बी दुर्गाप्रसाद पिता एल्लैयाह, तेलंगाना विद्यार्थी वेदिका संस्था से जुड़े राजेंद्र प्रसाद पिता के.य्या, नजीर पिता मो.याकुब और रामानंदा लक्ष्मय पिता आर सितैय्या शामिल हैं। पुलिस ने इन पर राज्य जनसुरक्षा अधिनियम के उल्लंघन का मामला दर्ज कर सोमवार को सुकमा कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।


आईजी ने कहा सफेदपोश नक्सली

दिल के ऑपरेशन के बाद बस्तर पहुंचे आईजी एसआरपी कल्लूरी ने इस गिरफ्तारी के बाद सभी को सफेदपोश नक्सली बताया है। उन्होंने कहा, ये लोग नक्सलियों के नोट बदलवाने लंबे समय से ग्रामीणों पर दबाव बना रहे थे। तेलांगाना पुलिस से मिली पुख्ता सूचना के बाद इन्हें गिरफ्तार किया गया है।


गिफ्तारी के विरोध में स्वर हुए तेज

इधर गिरफ्तारी को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। कम्युनिस्ट नेता संजय पराते ने जारी बयान में कहा, ये सातों तेलंगाना डेमोके्रटिक फोरम(टीडीएफ) से जुड़े हुए हैं। ये राज्य में हो रहे फर्जी मुठभेड़ों की फैक्ट फाइंडिंग करने यहां पहुंचे थे। ये लोग काले कानून की भेंट चढ़ा दिए गए हैं। इससे पहले विनायक सेन की गिरफ्तारी हुई भी इसी अधिनियम के तहत की गई थी। लंबे समय के बाद यह दूसरा मामला बताया जा रहा है।


पीयूसीएल प्रदेश इकाई के अध्यक्ष लाखन सिंह ने घटना को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने आरोप लगाया, बस्तर में लगातार हो रहे फर्जी मुठभेड़ की जांच करने आ रहे दल को खम्मम में गिरफ्तार कर छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंपा गया। इन सभी को तुरंत रिहा किया जाए।

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