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कलाम को सलाम: जिंदगी में कुछ नहीं छोड़ा अधूरा पर पूरा नहीं कर सके मिसाइलमैन यह काम

मिसाइलमैन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की आज दूसरी पुण्यतिथि है। 13 साल पहले बस्तर आए तो उन्होंने रानसरगीपाल के ग्रामीणों से एक वादा किया जो वे जीते जी नहीं निभा सके। चंद मिनटों के प्रवास में उन्होंने ग्रामीणों के दिलों को छू लिया था। उनकी याद में ग्रामीणों ने राष्ट्रपति का मोहल्ला ही बसा लिया।

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ajay shrivastav

Jul 27, 2017

APJ abdul kalam in bastar

APJ abdul kalam in bastar

अनिमेष पाल/ जगदलपुर. मिसाइलमैन एपीजे अब्दुल कलाम ने भले ही देश को कई सौगातें दी हो और गौरवान्वित भी कराया पर बस्तर के रानसरगीपाल में गांव वालों से किया एक छोटा सा वादा वे निभा नहीं सके। 2004 में अपने प्रवास के दौरान रानसरगीपाल पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति ने गांव वालों से दोबारा उनके बीच आने का वादा किया था। वे लौट कर फिर कभी नहीं आए।

गांव वालों को भी अब इस बात का मलाल है, वे अपने प्रिय कलाम को दोबारा कभी नहीं देख सकेंगे। अपने 45 मिनट के प्रवास में ही देश के सर्वोच्च नागरिक ने बस्तर के भोले-भाले आदिवासियों के दिलों में हमेशा के लिए ऐसी छाप छोड़ दी, आज दशक बाद भी गांव के लोगों को अपने प्रिय कलाम की हर एक बात याद है। गांव के बड़े-बुजुर्ग यह नहीं जानते कि राष्ट्रपति का क्या मतलब होता है पर उन्हें लगता है कि वह कोई बड़ा आदमी था जो बिल्कुल उनके जैसा ही था।

मंच से उतरकर की बात, अपना सा था वह आदमी

APJ abdul kalam in bastarगांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग हांदो बघेल की स्मृतियां भले ही कमजोर हो चुकी हो पर उन्हें यह बात अच्छी तरह से याद है कि किस तरह से राष्ट्रपति मंच से उतरकर उनके पास पहुंचे थे और उनसे उसकी समस्याओं के बारे में पूछा था। वे बताते हैं कि राष्ट्रपति किसी दूसरी भाषा (अंग्रेजी) में बात कर रहे थे पर पास खड़ा एक अन्य व्यक्ति उन्हें उनकी बातों का मतलब समझा रहा था। हांदो कहते हैं, भले ही वे उनकी बातों को नहीं समझ पाए पर वह व्यक्ति उन्हें अपना सा लगा।

हांदों की बूढ़ी आंखों में यह सब कुछ बताते एक चमक थी। वह उत्साहित होकर मुझे राष्ट्रपतिपारा में खेतों के बीच मंच तक ले गए। यह वहीं मंच है जहां से कलाम ने ग्रामीणों को संबोधित किया था। मंच आज तक सुरक्षित है। इसके पीछे खेतों के बीच से पक्की डामरीकृत सड़क आज भी देखी जा सकती है जो खासतौर पर उनके प्रवास के लिए बनाई गई थी। मंच के सामने ही तिरंगे झण्डे का स्तंभ भी बना हुआ है।



पूर्व राष्ट्रपति कलाम के प्रवास के बारे में गांव की पूर्व सरपंच बुद्दो कश्यप अपनी बोली(हल्बी) में बताती है कि राष्ट्रपति कलाम ने उनसे बात की थी। गांव के हालात के बारे में पूछा था। उन्होंने कलाम को बताया, जंगल से घिरे इस गांव में पानी, बिजली और सड़क की समस्या है। अस्पताल के लिए लोहण्डीगुड़ा जाना पड़ता है। स्कूल के लिए करंजी तक जाते हैं। इस पर कलाम ने वादा किया था कि वे गांव में सारी व्यवस्था कर के देंगे।


लौटते समय उन्होंने कलाम से गांव वापस आने को कहा था। इस पर कलाम ने मुस्कुरा कर फिर वापस आने का वादा किया था पर वे दोबारा नहीं आए। बुद्दो बताती है कि कलाम इसके चार साल बाद 2007 में मारडूम आए थे पर उनसे दोबारा मुलाकात की हसरत कभी पूरी नहीं हो सकी।

बुद्दो के पास राष्ट्रपति के प्रवास की कोई तस्वीर तो नहीं है पर कार्यक्रम स्थल के लिए जारी किए गए पास को वह अब भी स्मृति के तौर पर संभाल कर रखे हुए है। इस पास को उन्होंने कांच के फ्रेम में अपने बैठक कक्ष में टांग कर रखा है। जब भी कोई आता है तो उन्हें यह पास दिखाकर राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान उनसे हुई मुलाकात के बारे में बताना नहीं भूलती।


कलाम भले ही गांव लौटकर आने का वादा नहीं निभा सके हो पर अपने प्रवास के दौरान गांव के विकास के जो वादे उन्होंने किए थे, वे सारे पूरे हो चुके हैं। गांव के सुदरू कश्यप बताते हैं, उनका गांव अब पहले जैसा पिछड़ा नहीं रहा है। आज गांव में उपस्वास्थ्य केन्द्र, कन्या आश्रम, माध्यमिक स्कूल, हाईस्कूल, सड़क, बिजली व पानी की सुविधा है।

पहले गांव तक कोई पक्की सड़क नहीं थी। 2014 में जब राष्ट्रपति आए तो इसके ठीक पहले सरकार ने गांव तक पक्की सड़क बनाकर दी। आज भी यह गांव की मुख्य सड़क है। सुदरू मानते हैं कि उनके गांव की तस्वीर कलाम के प्रवास के साथ ही बदलनी शुरू हो गई थी।



रानसरगीपाल में राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान दुभाषिए बने मैथ्यु थॉमस बताते हैं, कलाम नए-नए राष्ट्रपति बने थे। दूसरे लोगों की तरह वे भी कलाम के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते थे। रानसरगीपाल के हैलीपेड पर राष्ट्रपति के कदम रखते ही वे हैरान हो गए, जब मुलाकात 70 साल के सबसे युवा ऊर्जावान शख्स से हुई। इतनी उम्र के बावजूद भीड़ में राष्ट्रपति कलाम का आभामण्डल अलग ही नजर आ रहा था। वे हेलीपेड से सीधे मंच पर आए। अपने भाषण में उन्होंने देश प्रेम और शिक्षा के महत्व की बातें की।


मंच से उतरकर ग्रामीणों के बीच पहुंच गए। व्यस्तता के बावजूद सबकी बातों को ध्यान से सुना। सुरक्षाकर्मी सुरक्षा का हवाला देते रहे पर इसे उन्होंने नजरंदाज कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। जब वे वापस लौट रहे थे, भीड़ में एक आदमी बच्चे को लेकर दौड़ता हुआ आया। कलाम को जब यह बात पता चली तो वे वापस मुड़े और उस व्यक्ति से बात की। कांकेर से आए उस व्यक्ति के बच्चे को आंख की बीमारी थी। कलाम ने वहां मौजूद डॉक्टर को जांच करने कहा। डॉक्टर ने बताया, इलाज से बीमारी ठीक हो सकती है। उन्होंने बच्चे का नाम-पता लिख कर देने को कहा। कलाम ने अपनी तनख्वाह से बच्चे का इलाज कराने की बात कही।

कलाम की मोहब्बत पर सरकारी मुहर

APJ abdul kalam in bastarभले ही देश के किसी राष्ट्रपति का बस्तर से नाता न हो पर बस्तर के रानसरगीपाल में राष्ट्रपति का मोहल्ला बसा हुआ है। पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने रानसरगीपाल में चंद मिनटों के प्रवास के दौरान गांव वालों से जो बातें कि वो उनके दिल में उतर गई।

गांव वालों को कलाम इतने भाए कि, जिस मोहल्ले नुआगुड़ा में उनका कार्यक्रम था गांव वालों ने उसे बदलकर राष्ट्रपतिपारा नाम रख दिया। पूर्व राष्ट्रपति के लिए गांव वालों के प्यार और सम्मान पर सरकार ने भी मुहर लगा दी। सरकारी दस्तावेजों में स्कूल, आश्रम व अस्पताल का पता राष्ट्रपतिपारा के नाम से उल्लेखित है।