
पचवस गांव
बस्ती. यूपी में एक ऐसा गांव भी है, जहां हर घर से एक शख्स सेना में भर्ती होकर देश सेवा में अपना योगदान दे रहा है । इस गांव के बारे में कहा जाता है कि हर घर में फौजी पैदा होते हैं। 795 घर की आबादी वाले पचवस गांव में सिपाही से लेकर एडमिरल रैंक तक के अफसर शामिल हैं। गांव में 85 अफसर, 56 जेसीओ और करीब 1600 सिपाही थल सेना और वायुसेना में भर्ती होकर देश की हिफाजत कर रहे हैं।
बस्ती जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर स्थित पचवश गांव फौजियो का गांव है । द्वितीय विश्वयुद्ध से लेकर करगिल युद्ध तक में दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले इस गांव के कई जवान लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत भी हैं । पचवस इंटर कॉलेज के प्रिसिंपल राजीव सिंह के अनुसार बेटा पैदा होने के बाद मां-बाप उसे फौजी बनाने का ही सपना बुनते हैं, जबकि बच्चे भी किसी और क्षेत्र में जाने की जगह फौज को ही पहली पसंद मानते हैं ।
1971 में भारत-पाक लड़ाई में पंजाब के हाजीपुर में बतौर कमांडिंग ऑफिसर कर्नल केसरी सिंह के बहादुरी के किस्से काफी मशहूर हैं। केसरी सिंह ने पाकिस्तानी सेना को पीछे ढ़केल दिया था । केसरी सिंह जब रिटायर हुए तो उन्होंने गांव के बच्चों को सेना में भेजने का जज्बा पैदा किया, उसके बाद यह सिलसिला जारी है ।
अभी हाल ही में बरेली में हुई सेना भर्ती में पचवस के 8 बच्चों ने पास आउट किया । इसी गांव के केसरी सिंह के बेटे मेजर एके सिंह का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज है । एनडीए कैडेट्स को ग्लाइडिंग सिखाते समय हादसे में मेजर का एक पैर खराब हो गया था। इसके बावजूद मेजर एके सिंह ने 1980 में मुंबई से पालनौका में वर्ल्ड टूर करके रिकॉर्ड कायम किया था। द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए सिपाही इसी गांव के तालुकेदार सिंह का नाम इंडिया गेट पर शहीदों के नाम के साथ दर्ज है। 1971 के युद्ध में पंजाब के आदमपुर में एयरफोर्स के फ्रंट बेस पर बमबारी के बीच एयरक्राफ्ट ठीक करने के लिए विंग कमांडर अमरनाथ सिंह को विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा गया है। इसके अलावा दर्जनों गैलेंट्री अवार्डस इस गांव की शान बढ़ा रहे हैं।
Published on:
05 Sept 2017 08:56 pm
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