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समाज कल्याण विभाग में बड़ा घोटाला, ब्लैक लिस्टेड कंपनी को सौंपा करोड़ों का काम

विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का खुलासा बीजेपी युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रिंकू दूबे ने किया, सीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग

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Social Welfare Department

समाज कल्याण विभाग

सतीश श्रीवास्तव

बस्ती. यूपी में योगी सरकार के गठन के बाद जिले में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। मामला समाज कल्याण विभाग से जुड़ा है, जहां विभाग ने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिये करोड़ों का काम ब्लैक लिस्टेड कंपनी लैकपेड को दे दिया। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का खुलासा बीजेपी युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रिंकू दूबे ने किया है। मामले की जानकारी बीजेपी विधायक संजय जायसवाल को हुआ तो वे सक्रिय हुए और सीएम योगी को पत्र लिखकर मामले मे कार्रवाई की मांग की है।

संजय जायसवाल ने आरोप लगाया कि जब समाज कल्याण विभाग खुद में कार्यदायी संस्था है तो प्रमुख सचिव मनोज सिंह ने किन परिस्थिति में जिले में 11 करोड़ और पड़ोसी जिले बलरामपुर में 40 करोड़ का बजट यूपी की सबसे बदनाम और ब्लैक लिस्टेड संस्था लैकपेड को दे दिया। संजय जायसवाल ने कहा कि कमीशन लेकर प्रमुख सचिव मनोज सिंह ने सपा सरकार के ठेकेदार अंशुल यादव ग्रुप को ठेका दे दिया।

समाज कल्याण विभाग की यह एकीकृत योजना है जिसमे बस्ती मंडल के 11 गांव चयनित किये गये जो पूरे तरह से अनुसूचित बाहुल्य गांव मे आते हैं, मगर कार्य कराने के लिये समाज कल्याण विभाग ने अपनी सब संस्था समाज कल्याण निर्माण निगम को न देकर लैकपेड को दे दिया जो जाहिर करता है कि प्रमुख सचिव किस तरह से इस सरकार मे भी भ्रष्टाचार कर रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीजेपी सरकार बनने से पहले भी इस योजना के तहत लैकपेड को पैसा दे दिया गया था, मगर तत्कालीन डीएम रमाकांत और बीजेपी नेता रहे जय चौबे ने शासन को पत्र लिखकर धन को वापस करा दिया था और अब फिर से इसी धन को वही प्रमुख सचिव ने साजिश रच कर लैकपेड को दोबारा बजट आवंटित कर दिया। . भाजपा युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रिंकू दुबे ने भी मामले की पड़ताल करने के बाद असलियत सामने लाये और अब वे इस घोटाले की शिकायत भी सीएम से करके कार्रवाई के लिये पत्र भेज दिया है।

बस्ती मंडल ही नहीं यूपी के दूसरे जिलों मे भी इस योजना के तहत करोड़ों का बंदरबाट किया जा चुका है, आनन फानन मे जिस बजट को सपा सरकार में वापस कर दिया गया था उस बजट का आखिर कैसे जल्दबाजी मे शासनादेश जारी कर पैसा रिलीज करने कर दिया गया। पूरे मामले मे प्रमुख सचिव की भूमिका बेहद संदिग्ध है और अब बीजेपी विधायक के इस भ्रष्टाचार के सामने लाने के बाद बेलगाम ब्यूरोक्रैट पर सवाल खड़ा होना लाज़मी है ।

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