शादी के बाद महिलाएं क्यों करती है सोलह श्रृंगार, जानें इसके पीछे के वैज्ञानिक तर्क

हिन्दू धर्म में सुहागन महिलाओं के लिये श्रृंगार का बहुत महत्व है।

By: Pratibha Tripathi

Updated: 05 Dec 2020, 05:29 PM IST

नई दिल्ली। शादी के बाद हर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है हमारे हिन्दू धर्म में भी सुहागन महिलाओं को पूरा श्रृंगार करना काफी जरूरी माना गया है। इसके पीछे कई धार्मिक तर्क बताते है कि श्रृंगार करने से पति स्वस्थ रहता है उम्र लंबी होती है और वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है। लेकिन धार्मिक तथ्यों के साथ साथ कई वैज्ञानिक कारण भी इसमें छिपे हुए हैं जो बताते है कि सुहागन महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार करना क्यो जरूरी है। आइए जाने स्त्रियों के सोलह श्रृंगार कौन कौन से है और उसे धारण करने के क्या लाभ हैं। कुछ श्रृंगार को सिर्फ विवाहित स्त्रियां ही धारण कर सकती हैं। जबकि कुछ को विवाहित स्त्रियां और कुंवारी लडकियों के साथ पुरूष भी धारण कर सकते हैं।

जानिए स्त्रियों के सोलह श्रृंगार के बारे में
बिंदी:
बिंदी धारण करने से चेहरे में तेज आता है। इससे दिमाग शांत रहता है। मुख्य मंडल का यह भाग भगवान शिव से जुड़ा होता है। इस बिंदु पर कुमकुम लगाने से मन को शांति मिलती है सौंदर्य निखर जाता है।

सिंदूर:

सिर के बीचोंबीच लगाया जाने वाला मांग में सिंदूर महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है। सिंदूर लगाने से दिमाग हमेशा सतर्क और सक्रिय रहता है। दरअसल, सिंदूर में पारा का मात्रा अधिक मात्रा मं पाई जाती है जो दिमाग तनावमुक्त रखने में मदद करती है। सिंदूर शादी के बाद लगाया जाता है क्योंकि ये रक्त संचार का बढ़ाने के साथ साथ यौन क्षमताओं को भी बढ़ाने का भी काम करता है।

चूडिय़ां:

सुहागनों के लिये कांच की चूडियां पहनना शुभ माना जाता है। कांच की चूडिय़ों की खनक होती है और चूडिय़ों के आपस में टकराने से जो आवाज होती है। वह नेगेटिव एनर्जी को दूर भगाती है।

मंगलसूत्र:

प्रत्येक विवाहित महिला को मंगलसूत्र अवश्य पहनना चाहिये। बड़े- बुजुर्गों का कहना है कि इसे छुपाकर ररखना चाहिये। इसके पीछे वैज्ञानिकतर्क यह है कि भारतीय हिंदू महिलाएं काफी शारीरिक श्रम करती हैं, इसलिए उनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहना जरूरी है। मंगलसूत्र छिपाकर रखने से ये हमारे शरीर से स्पर्श करेगा और इसका अधिक से अधिक लाभ हमें मिल पाएगा।

बिछुआ:

शादीशुदा महिलाएं के पैरों में बिछुए आपने जरूर देखा होगा। पैर की जिन उंगलियों में बिछुआ पहना जाता है, उनका कनेक्शन सीधे गर्भाशय और दिल से होता है। इन्हें पहनने से महिला को गर्भधारण करने में आसानी होती है और मासिक धर्म भी सही रहता है। चांदी का होने की वजह से जमीन से यह ऊर्जा ग्रहण करती है और पूरे शरीर तक पहुंचाती है।

नाक की लौंग :
नाक में लौंग पहनने से सांस नियंत्रित होती है और श्वांस संबंधी रोगों से बचाव होता है।

पायल:
चांदी की पायल पहनने से की तरह के शारीरिक दर्द दूर होते है। चांदी की पायल हमेशा पैरों से रगड़ती रहती है, जो स्त्रियों की हड्डियों के लिए काफी फायदेमंद होती है। इससे उनके पैरों की हड्डी को मजबूती मिलती है, साथ ही ये शरीर की बनावट को नियंत्रित भी करती है।

इयररिंग्स:

कानों में इयररिंग्स पहनने से यह मासिक धर्म को नियमित करने में मदद करता है। शरीर को ऊर्जावान बनाता है। इसलिए कानों में सोने या चांदी के ईयर रिंग्स पहनने की सलाह दी जाती है।

Pratibha Tripathi
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