
शिव विवाह में झूमे श्रद्धालु /रामद्वारा में शिवपुराण कथा
ब्यावर. रामद्वारा के संत गोपाल राम महाराज ने कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। बिना श्रद्धा और विश्वास के पति-पत्नी का जीवन सुखमय नहीं हो सकता। श्रद्धा के बिना धर्म की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। अजमेरी गेट रामद्वारा में शिव महापुराण सप्ताह कथा के चौथे दिन गोपाल राम महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए कही। शिव जी की समाधि भंग करने जब काम पहुंचा तो भगवान ने तीसरा नेत्र खोला और वह जल कर भस्म हो गया। तीसरा नेत्र ज्ञान चक्षु है। यह खुलता है तो मनुष्य के अंदर से काम जल जाता है। धर्म पर आरूढ़ होकर ही गृहस्थ जीवन को ठीक ढंग से चलाया जा सकता है। जिसके जीवन में डगमगापन खत्म हो जाए, वह कैलाश है। कैलाश में ऊँचाई है। हमारा भवन भले ही ऊंचा न हो, किन्तु भावनाएं ऊंची होनी चाहिए। नंदी पे होके सवार भोले जी चले दूल्हा बनके.. जैसे भजनों पर श्रोता झूम उठे। ब्रह्मा विष्णु महेश, ऋषि मुनि, देवता आदि सजीव झांकियों के साथ भगवान शिव की बारात निकाली गई । श्रावण के एकादशी शिव विवाह के इस अवसर जानकी मंडल की ओर से भजनों की प्रस्तुति दी गई।
Updated on:
11 Aug 2019 05:17 pm
Published on:
11 Aug 2019 05:15 pm
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