
प्रदेश के इस अस्पताल में अजीब हालात : डॉक्टर करता है बाबू का काम, वार्ड बॉय बन जाता है फार्मासिस्ट
सुनिल जैन
टॉडगढ़. उपखंड स्तर पर मरीजों को इलाज की सुविधा देने के लिए सामुदायिक चिकित्सा केन्द्र में संसाधन तो मुहैया करा दिए लेकिन स्टाफ की कमी से उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। एेसे में टॉडगढ़ व आसपास के क्षेत्र की करीब बीस हजार की आबादी प्रभावित हो रही है। टॉडगढ़ चिकित्सालय में मरीजों को चिकित्सा परामर्श के साथ इडोर भर्ती, धर्मशाला व जांच की सुविधा मुहैया कराई गई है। इसके लिए पर्याप्त भवन व उपकरण भी है लेकिन यहां स्टाफ की कमी होने से मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। अस्पताल में एक वरिष्ठ चिकित्सक व एक चिकित्सक है। इनमें एक के अवकाश पर जाने पर अस्पताल के आउटडोर सहित इंडोर का काम भी प्रभावित होता है। इंडोर के साथ १५० का आउटडोरअस्पताल में करीब डेढ़ सौ मरीजों का आउटडोर रोजाना रहता है। इसके साथ ही यहां पर मेल व फिमेल इंडोर वार्ड भी है, जहां मरीज भर्ती किए जाते है। इंडोर वार्ड में महिला की डिलीवरी होने पर उसे ४८ घंटे तो भर्ती रखा ही जाता है। माह में १५ से २० डिलीवरी हो जाती है। स्टाफ की कमी से यह काम भी प्रभावित होता है।
पहले से कम फिर भी डेपुटेशन
अस्पताल में नर्सिंग ग्रेड प्रथम के दो पद स्वीकृत है और दोनों ही पद रिक्त पडे़ है। इसी प्रकार नर्सिंग ग्रेड के छह पद स्वीकृत है और दो ही है। वर्तमान में यहां पर सुशील व्यास ही कार्यरत है और बीना जेकअप को डेपुटेशन जवाजा लगा रखा है। जबकि डेपुटेशन गत दिनों ही कैंसिल कर दिए गए। डॉक्टर करता है बाबू का कामअस्पताल में कोई लिपिक भी नहीं है, एेसे में प्रभारी चिकित्सक को ही तनख्वाह बनाने सहित डाक के आदान प्रदान का काम चिकित्सक को ही करना पड़ता है। मरीजों को इलाज के साथ कार्यालय का कामकाज करना भी चिकित्सक के लिए मजबूरी बना है।
वार्ड बॉय की लेते है सेवाएं
यहां नि:शुल्क दवा वितरण काउन्टर तो है लेकिन फार्मासिस्ट ही नहीं है। अधिकांश समय स्टाफ के व्यक्ति ही दवा वितरण का काम करते है। कई बार तो वार्ड बॉय से भी दवा वितरण कराने को मजबूर होना पड़्ता है। जबकि नियमो के मुताबिक दवा वितरण का काम केवल फार्मासिस्ट ही कर सकता है।
बेकार पड़ी है धर्मशाला
मरीजों के भर्ती होने पर उनके परिजन के रात रूकने के लिए यहां पर धर्मशाला भी बनी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति से ३० रुपए का शुल्क भी निर्धारित है लेकिन न तो इसे सम्भालने के लिए स्टाफ है और न ही यहां कोई रूकना पसन्द करता है। एेसे में यह धर्मशाला बेकार ही पड़ी है।
इन्टरनेट की परेशानी अलग
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों से सम्बन्धित सभी जानकारी ऑनलाइन करने का नियम को लागू कर दिया और डाक का आदान प्रदान भी ऑनलाइन ही किया जाता है। लेकिन यहां इन्टरनेट में आने वाली तकनीकी खामी से परेशानी उठानी पड़ती है। घंटों तक इंतजार के बाद भी काम नहीं होता।
इनका कहना है...
सीनियर चिकित्सक अनुराग शर्मा है, लेकिन चार्ज मेरे पास है। स्टाफ की कमी से काम तो प्रभावित होता ही है, इस सम्बन्ध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
लखेन्द्रसिंह चौहान, प्रभारी चिकित्सक, टॉडगढ़
सभी डेपुटेशन केसिंल कर दिए गए है, अगर कोई है तो पता कर उचित कार्यवाही करेंगे। टॉडगढ़ में जहंा तक स्टाफ की बात है तो जल्द ही पूर्ति कर दी जाएगी।
डॉ.के.के.सोनी, जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अजमेर
'महिला चिकित्सक लगाएंÓ
टॉडगढ़ में हॉस्पिटल है और यहां पर महिलाओं की डिलीवरी भी होती है लेकिन महिला चिकित्सक नहीं है। महिला चिकित्सक लगाई जानी चाहिए।-नर्बदा देवी, ग्रामीण
'स्टाफ तो पूरा लगाया जाएÓ
अस्पताल में स्टाफ ही पूरा नहीं है। यहां पर कहने को तो सब सुविधाएं है लेकिन स्टाफ की कमी के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। स्टाफ पूरा लगाया जाए। -गोदावरी देवी, ग्रामीण
Published on:
31 Aug 2019 08:56 pm
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