नालियों में बह रहा गो मुख से निकला जल

दिन रात नालियों में बहता तालाब का पानी

गो मुख से होती है पानी की आवक

पीने योग्य हो सकता है तालाब का पानी

सरकारी संरक्षण और संर्वधन की जरुरत

अजमेर के ऐतिहासिक डिग्गी तालाब की प्रशासनिक अनदेखी

By: kali charan

Published: 03 Dec 2019, 01:57 PM IST

कालीचरण

ब्यावर. अजमेर के ऐतिहासिक तालाबों में से एक डिग्गी तालाब इन दिनों सरकार और प्रशासन दोनों की अनदेशी का शिकार हो रहा है। लबालब भरा होने के बावजूद तालाब के मीठे पानी का सदुपयोग नहीं किया जा रहा। यहीं वजह है कि बीते दो महीने से तालाब का यह पानी नालियों के रास्ते बह कर गंदा हो रहा है। तालाब के तल में बने गो मुख से निकला पानी व्यर्थ नालियों में बह रहा है। लेकिन इसकी न तो प्रशासन को परवाह है और न ही जलदाय विभाग को फ्रीक। झील सरंक्षण एवं प्रोद्योगिकी प्राधिकरण तो इससे बेखबर है।

चौहानवंश के समय जनता के पीने के पानी के लिए बनाए गए इस डिग्गी तालाब का ऐतिहासिक भी काफी महत्व है। बीते 25 सालों में और यहां तक की भीषण गर्मी एवं सूखे के समय भी तालाब कभी नहीं सूखा। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि बीसलपुर पेयजल योजना से पहले तक तो क्षेत्रीय लोग इसी तालाब का पानी इस्तेमाल में किया करते थे, लेकिन जब बीसलपुर योजना में घर घर पानी के कनेक्शन हो गए और पानी पहुंचने लगा तो लोगों ने तालाब से किनारा कर लिया। बस क्या इसके बाद से ही डिग्गी तालाब के बुरे दिन शुरू हो गए जो आज दिन तक बने हुए है।

तालाब के किनारे महादेव भी

डिग्गी तालाब के किनारे ही प्राचीन शिव मंदिर भी है। यहां आस पास के दुकानदार और क्षेत्रीय शिवभक्तों आते है और पूजा अर्चना करते है। तालाब के नाम से ही बाजार का भी नाम डिग्गी बाजार रखा गया।

गो मुख से होती है पानी की निकासी

क्षेत्र के राजेश सोनी बताया कि लम्बे समय की बात है, तालाब का जल स्तर कम हो गया था। उस वक्त परिषद की ओर से तालाब का सफाई कार्य किया गया था। सफाई के दौरान तालाब में भूमिगत (एक किनारे की तरफ) सफेद पत्थर का बना गो मुख नजर आया और इसी गो मुख से पानी निकलता दिखाई दिया। गौरतलब है कि यह तालाब घरों और मुख्य बाजार के बीचों बीच बना हुआ है। तालाब का आस-पास का क्षेत्र भी पत्थरिली पहाडिय़ों का है। बारिश के पानी का भी तालाब में आने का कोई स्त्रोत भी नहीं है।

फिर कैसे बचेगा जल

कभी केंद्र तो कभी राज्य सरकार आए दिन पानी बचाने को लेकर नई योजनाएं लागू करती है। कभी जल स्वालम्बन तो कभी झील संरक्षण तो कभी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करने के उपाय खोजती है। वहीं दूसरी तरफ डिग्गी तालाब जैसे ही प्रदेश और अजमेर जिले के अन्य कई तालाब जिनके पानी को पीने योग्य बनाया जा सकता है, वह फिलहाल अनदेखी का शिकार हो रहे है।

सरकार नहीं लेती सुध

यह तालाब सालों पुराना है। यदि इसके पानी को साफ कर दिया जाए और पीने योग्य बना दिया जाए तो पूरे डिग्गी बाजार और आस-पास की बस्तियों में पानी की आपूर्ति हो सकती है। लेकिन सरकार के स्तर पर इसकी कोई सुध नहीं ली जाती। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी तालाब के सरंक्षण को लेकर कुछ नहीं करते।

-ठाकुरदास, क्षेत्रवासी।

दिनरात बहता है उपयोगी पानी

तालाब का पानी मीठा है और यदि इसकी सफाई कर दी जाए तो यह पीने योग्य भी हो सकता है। हर रोज और दिन रात तालाब का उपयोगी पानी नालियों में बह कर गंदा हो रहा है। पानी बचाने को लेकर नेता तो केवल दिखावा करते है। जमीनी स्तर पर कोई सार्थक कदम नहीं उठाते।

-मंगलसिंह, क्षेत्रीय दुकानदार।

पत्रिका व्यू

डिग्गी तालाब का हर रोज हजारों लीटर पानी नालियों के रास्ते बह कर गंदा हो रहा है। यदि तालाब के दूषित पानी को स्वच्छ कर दिया जाए और तालाब के नजदीक ही सरकारी स्तर पर जल स्टोरेज बना दिया जा तो इस तालाब के पानी का सदुपयोग हो सकता है। साथ ही तालाब का सौंदर्य भी बना रह सकता है।

kali charan Reporting
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