
असीम संभावनाएं है पर अनदेखी से पिछड़ रहा रावली पयर्टन
ब्यावर. प्रदेश में माउंट आबू के बाद सबसे ऊंची पर्वतमाला टॉडगढ़-रावली क्षेत्र में स्थित पर्वतमाला है। इस इलाके में पर्यटन की असीम संभावाएं मौजूद हैं। जरूरत है तो बस इन संभावनाओं को विश्व पटल पर लाकर उन्हे आगे बढ़ाने की। क्षेत्र में मौजूद पर्यटन की संभावनाओं को देश-प्रदेश के मानचित्र में आगे लाने को लेकर स्थानीय स्तर पर कई बार प्रयास हो चुके हैं। इसके बावजूद अनदेखी के चलते इस क्षेत्र की संभावनाओं को बल नहीं मिल पाया और आज भी यह क्षेत्र असीम संभावनाओं के बाजवूद पर्यटन की नजर से पिछड़ा हुआ है। टॉडगढ़-रावली अभ्यारण्य 195.27 स्क्वायर किलोमीटर में फैला हुआ है। यह अभ्यारण्य पर्यटन, शूटिंग एवं एडवेंचर स्पोट्र्स की संभावनाओं को समेटे है। क्षेत्र में अभ्यारण्य से कुंभलगढ़ अभ्यारण्य का जुड़ाव भी है। इस क्षेत्र में वन्यजीव भी विचरण करते है। पर्यटन की दृष्टि से इस क्षेत्र को विकसित किया जाता है। पर्यटन के नजरिए से टॉडगढ़-रावली अभ्यारण्य का देवगढ़, नाथद्वारा, उदयपुर, कुंभलगढ़, हल्दीघाटी के पर्यटन से जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा रावली क्षेत्र ट्रेकिंग व रोमांचक खेलों को लेकर काफी संभावनाएं मौजूद है। जिसमें माउंट क्लाइंम्बिंग सहित अन्य रोमांचक खेलों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यहां मौजूद गेस्ट हाउस से तालाब के आस-पास पेंथर समेत कई वन्य जीवों को आसानी से देखा जा सकता है। इस कारण बढ़ सकती हैं संभावनाएंरावली-टॉटगढ़ क्षेत्र हल्दीघाटी, नाथद्वारा एवं अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह एवं विश्व विख्यात पुष्कर के मध्य स्थित है। यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य देखते ही बनता है। इस वन्य क्षेत्र में रावली, दुधालेश्वर महादेव, गोरमघाट, कातर घाटी व प्रज्ञा शिखर, भील बेरी सहित अन्य स्थान शामिल है। जो पर्यटकों को लुभाते है। यहां पर शूटिंग के लिए भी उपयुक्त स्थान के रुप में उपयोग लिया जा सकता है। पर्यटन व फिल्म शूटिंग के लिहाज से अपार संभावनाएं है। यहां पर बाहर से आने वालों के रहने के लिए होटलें बनी है तो वन विभाग की ओर से भी दुधालेश्वर में होटल व रावली में गेस्ट हाउस बना रखा है। अगर पर्यटन विभाग की ओर से प्रदेश में पर्यटन करने के लिए आने वाले पर्यटकों को इस क्षेत्र के बारे में जानकारी उपलब्ध करा कर इस क्षेत्र को जोडऩे से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रशासन की ओर से भेजा गया था प्रस्ताव
स्थानीय प्रशासन की ओर से कुछ सालों पूर्व राज्य सरकार को एक प्रस्ताव बना कर भेजा गया था। इस प्रस्ताव के तहत ब्यावर में रावली-टॉटगढ़ अभ्यारण को पर्यटन की नजर से बढ़ावा देने के अलावा बादशाह मेले को स्पेन में आयोजित होने वाले टोमेटिना फैस्टिवलÓ की तर्ज पर बढ़ावा देने की बात कही गई थी। परंतु आज तक इन प्रस्तावों पर कोई तवज्जो नहीं दी गई।
राजनीतिक उदासीनता से पिछड़ रहा है क्षेत्र
ब्यावर में ऐतिहासिक व भौगोलिक दृष्टि से संभावनाएं है। राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के कारण ब्यावर को स्थान नहीं मिल पा रहा है। जबकि जहां ब्यावर में स्वतंत्रता सैनानी प्रशिक्षण लेने आते थे। उनके ठहरने के स्थान व प्रशिक्षण स्थल को सहजा जाए तो पर्यटन की संभावनाएं भी खुल सकती है। टॉडगढ़ रावली अभ्यारण्य में भी विपुल संभावनाएं है लेकिन अब तक किसी भी राजनेता या राजनैतिक दल की ओर से कोई खास प्रयास नहीं किया गया। महज पूर्व में तत्कालीन उपखंड अधिकारी भगवतीप्रसाद ने प्रस्ताव बनाकर भेजे थे लेकिन इसके बाद किसी ने भी कोई प्रयास नहीं किया।
Published on:
30 Sept 2020 05:10 pm
बड़ी खबरें
View Allब्यावर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
