
स्क्रीनिंग व एक्स-रे एक दिन में, ऑनलाइन देखेंगे चिकित्सक
ब्यावर. सिलीकोसिस से पीड़ित श्रमिकों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। पीड़ित को स्वयं की सेहत से ज्यादा परिवार के लालन-पालन की चिंता सताने लगती है। हालांकि सिलीकोसिस मरीजों की सार-संभाल के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। जिले का जिला क्षय केन्द्र ब्यावर में संचालित है। जिसका भवन जर्जर होने से फिलहाल अमृतकौर चिकित्सालय की गायनिक विंग में संचालित हो रहा है। इसके बावजूद सरकार इसके लिए बजट स्वीकृत नहीं कर रही। जबकि मसूदा एवं जवाजा के ही 913 मरीज सिलीकोसिस पीड़ित हैं। यहां पर डीएमएफटी के तहत बजट स्वीकृत तो किया गया लेकिन बाद में निरस्त कर दिया। इसके बाद से पत्र व्यवहार चल रहा है। लेकिन बजट नहीं मिल पा रहा।
मसूदा में सर्वाधिक रोगी
जिले में सिलीकोसिस से पीड़ित सर्वाधिक रोगी मसूदा उपखंड क्षेत्र के हैं। खनन कार्य में लगे श्रमिक इस बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। मसूदा में 588, जवाजा में 325 को सिलोकोसिस पीड़ित का प्रमाण पत्र जारी हो चुका है।
जांच प्रक्रिया में किया बदलाव
सिलिकोसिस के मरीजों को सुविधा देने के लिए व्यवस्था में बदलाव किया गया है। पहले स्क्रीन के लिए अलग से आना पड़ता था। स्क्रीन में चिन्हित मरीजों को बाद में जांच शिविर में बुलाया जाता था। लेकिन अब स्क्रीनिंग एवं एक्सरे एक ही दिन में किया जाएगा। इसके तहत स्क्रीनिंग के बाद डिजिटल एक्सरे किया जाएगा। इस एक्सरे को ऑनलाइन ही चिकित्सक को भेज दिया जाएगा। ताकि मरीज को अनावश्यक चक्कर नहीं काटने पड़े।
यह हो रही परेशानी
जिला क्षय निवारण केन्द्र का भवन जर्जर होने से चिकित्सक अमृतकौर चिकित्सालय की पुरानी गायनिक विंग में मरीज देखते हैं। जबकि मरीजों की जांच लैब पुराने भवन में ही संचालित हो रही है। इसके अलावा दवाओं का स्टॉक भी पुराने भवन में ही रहता है।
खनन ही आजीविका का सहारा...मसूदा व जवाजा उपखंड में खेती योग्य जमीन बहुत कम है। अधिकांश लोगों की आजीविका मजदूरी है। अधिकांश ग्रामीण खनन कार्य कर व मिनरल यूनिट में काम कर अपने परिवार का गुजर-बसर कर रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र में सिलीकोसिस से पीड़ित अधिक लोग सामने आ रहे हैं। अमृतकौर चिकित्सालय में हर दिन मरीजों की जांच की जाती है।
इनका कहना है...
सिलिकोसिस की जांच के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी नहीं हो इसे लेकर एक ही दिन में जांच व एक्सरे की व्यवस्था एवं एक्सरे को ऑनलाइन भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इससे मरीजों की परेशानी कम होगी।
डॉ. लोकेश गुप्ता, प्रभारी, जिला क्षय निवारण केन्द्र, ब्यावर
Published on:
30 Jul 2022 01:41 pm
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