
जोखिम भरा सफर, जिम्मेदार बेपरवाह
ब्यावर. शहर के आस-पास करीब तीस से चालीस किलोमीटर दायरे के लोग प्रतिदिन शहर में मजदूरी करने एवं अन्य काम से आते हैं। दूरदराज आबाद इन गांवों से शहर तक आने के लिए वाहनों का अभाव है। अधिकांश रूट पर रोडवेज बसें संचालित ही नहीं हो रही है।
संचालित हो भी रही तो इनकी संख्या एक-दो ही है। ऐसे में ग्रामीणों को निजी वाहनों के जरिए यात्रा करनी पड़ रही है। इन वाहन संचालकों की एकजुटता के चलते क्षमता से अधिक सवारियां बैठाकर यात्रा करवा रहे हैं। ऐसे में जीवन को संकट में डालकर यात्रा करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है।
पुलिस प्रशासन व परिवहन विभाग की चुप्पी के चलते निजी वाहन चालकों की मनमानी बढ़ गई है। ग्रामीण बस सेवा नहीं होने एवं आस-पास के गांवों में बस सेवा का रूट नहीं होने से ग्रामीण जीप, टैम्पो व ऑटो पर निर्भर है। अन्य कोई साधन नहीं होने से यह निजी वाहन चालक क्षमता से अधिक सवारियां बैठा रहे हैं। हालात यह है कि जीप व टैम्पो की छत पर आठ से दस की संख्या तक लोगों को बैठाया जा रहा है। ग्रामीण मजबूरी में जीवन को संकट में डाल यात्रा करने को मजबूर है। इसके बावजूद परिवहन विभाग व यातायात पुलिस इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इन रूट की स्थिति बेहद खराब
गिरी नानणा, बाबरा, रास, मसूदा मार्ग, कोटड़ा-काबरा मार्ग सहित अन्य मार्गों पर रोडवेज बस सेवाएं बेहद कम है। भीम मार्ग को छोड़ अन्य रूट पर रोडवेज बस सेवा की संख्या इक्का-दुक्का ही है। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरी में निजी वाहनों में यात्रा करनी पड़ रही है। इसी का फायदा उठाकर निजी वाहन संचालकों ने एकजुटता कर ली है, जब तक क्षमता से अधिक सवारियां नहीं बैठ जाती तब तक वाहन नहीं चलाते है। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरी में इन वाहनों में सांसों को संकट में डालकर यात्रा करना मजबूरी है।
यह रूट है पर निजी वाहनों के भरोसे
शहर के मेडता रूट सहित आस-पास के कई गांवों में आवागमन को लेकर रूट बने हुए। इनमें रोडवेज की बस सुविधा नहीं है। इसके अलाटा निजी वाहनों की सेवाएं है लेकिन इन पर प्रशासन की नियमित निगरानी का अभाव है।
इसके चलते निजी वाहन चालक मनमानी करते है। जिला परिवहन अधिकारी जाकिर हुसैन ने बताया कि आस-पास के क्षेत्रों के वाहन के रूट बने हुए हैं। नगरीय बस सेवा का भी अगर कोई रूट लेना चाहे तो ले सकते हैं।
Published on:
15 Mar 2023 05:08 pm
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