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हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की…

-जलझूलनी एकादशी, ठाकुरजी को कराया जलविहार, निकाली रेवाडिय़ां

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ब्यावर. जलझूलनी एकादशी पर मंगलवार को शहर के विभिन्न मंदिरों से ठाकुरजी की रेवाडिय़ां निकाली गई। रेवाडिय़ों का शहर में जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। रेवाडिय़ों के नीचे से निकलने के लिए लोगों में होड़ मची रही। महिलाओं ने रेवाडिय़ों की पूजा की। शहर में स्थित सभी प्रमुख मंदिरों से निकाली गई रेवाडिय़ां विभिन्न मार्गों से होते हुए शाम के समय एकता सर्किल पर आकर एकत्र हुई। रेवाडिय़ों का जुलूस एकता सर्किल पर ठहरने के दौरान यहां पांव रखने तक की जगह नहीं थी। बाद में रघुनाथ जी के बड़े मंदिर की रेवाड़ी के पहुंचने पर सभी रेवाडिय़ां बिचड़ली तालाब की ओर रवाना हुई। बिचड़ली तालाब में ठाकुरजी को जलविहार कराया गया। इस दौरान रेवाडिय़ों में विराजित ठाकुरजी के दर्शन व पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। रंग-बिरंगे परिधान में मेला देखने आई महिलाओं व बच्चों में रेवाडिय़ों के नीचे से निकलने की होड़ दिखाई दी। रेवाडिय़ों में शामिल श्रद्धालु हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैयालाल की….आदि जयघोष करते चल रहे थे। रेवाडिय़ों का विभिन्न सामाजिक संगठनों व श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। विभिन्न समाजों के मंदिरों से आई रेवाडिय़ां पाली बाजार, महावीर बाजार, अग्रसेन बाजार, एकता सर्किल, तेजा चौक होते हुए पहले एकता सर्किल तथा बाद में यहां से समूह के रूप में बिचड़ली तालाब पहुंची। जहां ठाकुरजी को जल विहार कराकर आरती की गई।